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प्रभ आसरा ने तीस वर्षो से संस्था में रह रहे लावारिस को अपने परिवार से मिलाया
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कुराली। गांव पडियाला की प्रभ आसरा संस्था ने संस्था में रह रहे लावारिस को अपने परिवार से मिलाया है। वह 20 साल पहले (जब उसकी उम्र 10 साल थी) अचानक घर छोड़कर चला गया था। आज परिवार से मिलने के बाद सुनील आज बहुत खुश नजर आए।
संस्था की प्रबंधक रजिन्द्र कौर पडियाला ने बताया कि अगस्त 2010 को एसडीएम के आदेशों पर लगभग 30 साल के युवक को जो दयनीय हालत में डीसी कांप्लेक्स के आगे से मिला था, को संस्था में दाखिल करवाया गया था। दाखिले के समय सुनील अपना पता बताने में असमर्थ था जिस कारण संस्था ने उसका नाम सुनील रख दिया। वहां उसका उपचार और सेवा की जा रही थी। दाखिला होने के लगभग तीन वर्ष के बाद उसने अपना आधा-अधूरा पता बताना शुरू किया। इस पर मिशन मिलाप मुहिम तहत कई वर्ष लगातार कोशिश करने के वहिया (यूपी) में रहते उसके परिवार के साथ प्रबंधकों का संपर्क हुआ तो सुनील को लेने के लिए उसका भाई और गांव के मुखिया प्रभ आसरा कुराली पहुंचे। उन्होंने बताया कि सुनील का असली नाम झब्बर प्रसाद है।
परिवार से मिल खुश हुए सुनील पर बोले- अब प्रभ आसरा ही मेरा परिवार
सुनील (झब्बर प्रसाद) को लेने के लिए उसके पारिवारिक सदस्य आए तो सुनील ने उनके साथ यादें ताजा कीं। उसने बताया कि उसे अपने परिवार से मिलने की बहुत खुशी है लेकिन वह प्रभ आसरा परिवार छोड़कर नहीं जा सकता। परिवार और संस्था के प्रबंधकों द्वारा समझाने पर भी सुनील ने प्रभ आसरा संस्था को अपना परिवार समझते हुए यहीं पर रहने का फैसला किया।
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संस्था की प्रबंधक रजिन्द्र कौर पडियाला ने बताया कि अगस्त 2010 को एसडीएम के आदेशों पर लगभग 30 साल के युवक को जो दयनीय हालत में डीसी कांप्लेक्स के आगे से मिला था, को संस्था में दाखिल करवाया गया था। दाखिले के समय सुनील अपना पता बताने में असमर्थ था जिस कारण संस्था ने उसका नाम सुनील रख दिया। वहां उसका उपचार और सेवा की जा रही थी। दाखिला होने के लगभग तीन वर्ष के बाद उसने अपना आधा-अधूरा पता बताना शुरू किया। इस पर मिशन मिलाप मुहिम तहत कई वर्ष लगातार कोशिश करने के वहिया (यूपी) में रहते उसके परिवार के साथ प्रबंधकों का संपर्क हुआ तो सुनील को लेने के लिए उसका भाई और गांव के मुखिया प्रभ आसरा कुराली पहुंचे। उन्होंने बताया कि सुनील का असली नाम झब्बर प्रसाद है।
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परिवार से मिल खुश हुए सुनील पर बोले- अब प्रभ आसरा ही मेरा परिवार
सुनील (झब्बर प्रसाद) को लेने के लिए उसके पारिवारिक सदस्य आए तो सुनील ने उनके साथ यादें ताजा कीं। उसने बताया कि उसे अपने परिवार से मिलने की बहुत खुशी है लेकिन वह प्रभ आसरा परिवार छोड़कर नहीं जा सकता। परिवार और संस्था के प्रबंधकों द्वारा समझाने पर भी सुनील ने प्रभ आसरा संस्था को अपना परिवार समझते हुए यहीं पर रहने का फैसला किया।
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