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Mohali News: सोलह श्रृंगार में सजी सुहागिनें, पिया के नाम की लगाई मेहंदी... अब बस चांद का इंतजार
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मोहाली। करवाचौथ को लेकर सुबह से ही शहर की गलियों में सुहागिनों की रौनक बिखरी रही। किसी के हाथों में लगी पिया के नाम की मेहंदी खिलखिला रही थी, तो कोई अपने श्रृंगार के रंग चुन रही थी।फेज-3बी1, फेज-5, फेज-7 और फेज-11 की मार्केटों में दिनभर रौनक रही। दुकानों पर लाल साड़ियों और हरे रंग की चूड़ियों की चमक देखते ही बनती थी। फेज-7 की एक दुकान पर खरीदारी कर रहीं नीतू शर्मा ने कहा कि करवाचौथ के बिना सजे-धजे रहना तो जैसे अधूरा रहना है, ये दिन सालभर इंतजार करवाता है। फेज-7 की मेहंदी आर्टिस्ट जसप्रीत कौर के हाथों की कलाकारी देखने लायक थी। उन्होंने बताया कि इस बार ‘पिया के नाम’ और ‘अरेबिक पत्ती डिजाइन’ सबसे ज्यादा चल रहे हैं। महिलाएं चाहती हैं कि उनके हाथों में व्रत की कहानी भी झलके। फेज-11 की पार्लर संचालिका सुमन ने बताया कि करवाचौथ पर हर साल बुकिंग हफ्तेभर पहले फुल हो जाती है। आज सुबह 6 बजे से महिलाएं आने लगी थीं, शाम तक सांस लेने की फुर्सत नहीं है।
महाभारत काल से जुड़ी आस्था
करवाचौथ की कथा महाभारत काल से जुड़ी है। द्रौपदी ने पांडवों की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण के कहने पर यह व्रत रखा था। वहीं एक लोककथा में साहूकार की बेटी की कहानी आज भी सुहागिनों के दिल में बसी है जिसने छल में आकर अधूरा व्रत तोड़ा और पति को खो दिया। देवी पार्वती की कृपा से उसे पति का जीवन लौट आया, तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य का प्रतीक बना।
शाम को सजेगी थालियां, छलनी से होगा दीदार
शाम को जैसे-जैसे आसमान में सुनहरी आभा घुलेगी, सुहागिनें सोलह श्रृंगार कर पूजा की थाली सजाएंगी। हाथों में दीपक, आंखों में इंतजार और होठों पर मुस्कान लिए महिलाएं छतों पर चांद का दीदार करेंगी। जैसे ही रात 8 बजकर 10 मिनट पर आसमान में चांद निकलेगा, छलनी से झांकता वो पल पूरे व्रत की थकान मिटा देगा।
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करवाचौथ के शुभ मुहूर्त
- व्रत का समय: सूर्योदय के साथ
- पूजा का समय: शाम 4 बजे से
- चंद्रोदय: रात 8:10 बजे
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महाभारत काल से जुड़ी आस्था
करवाचौथ की कथा महाभारत काल से जुड़ी है। द्रौपदी ने पांडवों की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण के कहने पर यह व्रत रखा था। वहीं एक लोककथा में साहूकार की बेटी की कहानी आज भी सुहागिनों के दिल में बसी है जिसने छल में आकर अधूरा व्रत तोड़ा और पति को खो दिया। देवी पार्वती की कृपा से उसे पति का जीवन लौट आया, तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य का प्रतीक बना।
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शाम को सजेगी थालियां, छलनी से होगा दीदार
शाम को जैसे-जैसे आसमान में सुनहरी आभा घुलेगी, सुहागिनें सोलह श्रृंगार कर पूजा की थाली सजाएंगी। हाथों में दीपक, आंखों में इंतजार और होठों पर मुस्कान लिए महिलाएं छतों पर चांद का दीदार करेंगी। जैसे ही रात 8 बजकर 10 मिनट पर आसमान में चांद निकलेगा, छलनी से झांकता वो पल पूरे व्रत की थकान मिटा देगा।
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करवाचौथ के शुभ मुहूर्त
- व्रत का समय: सूर्योदय के साथ
- पूजा का समय: शाम 4 बजे से
- चंद्रोदय: रात 8:10 बजे