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सरकारी जमीन आवंटन में बड़ा खेल : गमाडा ने पुराने रेट पर बांटे 441 प्लॉट, 400 करोड़ का नुकसान का अनुमान

Sun, 25 Oct 2026 02:12 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 25 Oct 2026 02:12 AM IST
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Major irregularities in government land allotment: GMADA allocates 441 plots at old rates; estimated loss of 400 crore.
ईडी जांच में बड़ा खुलासा, सात साल तक पुराने रेट पर प्लॉट बांटे, सरकारी जमीन के आवंटन में नियमों पर उठे सवाल
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माई सिटी रिपोर्टर

मोहाली। पंजाब में सरकारी जमीन के आवंटन को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के में यह बात सामने आई है। ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) ने करीब सात साल तक विस्थापितों को प्लॉट की बढ़ी हुई कीमत के बजाय पुराने रेट पर ही आवंटन किए। इससे पंजाब सरकार को करीब 400 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। जांच में सामने आया कि 2018 में 25 हजार रुपये प्रति वर्ग गज तय की गई दर पर 2025-26 तक भी प्लॉटों के आवंटन पत्र जारी होते रहे, जबकि दर बढ़कर 65 हजार रुपये प्रति वर्ग गज हो चुकी थी। जांच में सामने आया कि वर्ष 2018 से वर्ष 2020 के बीच 25 हजार, वर्ष 2021 से 32 हजार 500 रुपये प्रति वर्ग गज, वर्ष 2022 में 39 हजार प्रति वर्ग गज, और वर्ष 2023- 2024 में 42,900 रुपये प्रति वर्ग गज, वर्ष 2025 में 51500 रुपये प्रति वर्ग गज और वर्ष 2026 में 65000 रुपये प्रति वर्ग गज रखा गया है।



441 प्लॉट पुराने रेट पर आवंटित किए

ईडी की जांच वर्ष 2019 से 2026 के बीच मोहाली की आईटी सिटी में सेक्टर-82 अल्फा और सेक्टर-66 बीटा में विस्थापितों के कोटे के तहत कुल 441 प्लॉट आवंटित किए गए। इनमें सेक्टर-82 अल्फा के 100 और सेक्टर-66 बीटा के 341 प्लॉट शामिल हैं। इसके अलावा 169 आवेदन अभी लंबित हैं। इनमें सेक्टर-82 अल्फा के 39 और सेक्टर-66 बीटा के 130 आवेदन हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस अवधि में जमीन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई, लेकिन विस्थापितों को प्लॉट देने के दौरान नई दरों को लागू नहीं किया गया। इससे सरकारी जमीन के आवंटन में नियमों के पालन और दरें तय करने की प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। ईडी की जांच में इसी अंतर को सरकारी खजाने को हुए नुकसान की अहम वजह माना गया है। एजेंसी के अनुसार, यदि बढ़ी हुई दरों पर आवंटन किया जाता तो सरकार को अधिक राजस्व मिल सकता था। इस मामले में करीब 400 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान जताया गया है।
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कमेटी की बैठक में दरों पर चर्चा

जांच में जून 2020 में हुई एक कमेटी की बैठक का भी जिक्र है। इस बैठक में गमाडा और पुडा के वरिष्ठ अधिकारियों, एस्टेट ऑफिसर (प्लॉट्स) और कानूनी सलाहकार ने विस्थापितों के कोटे के तहत प्लॉट आवंटित करने की दरों पर चर्चा की थी। इसके बावजूद बाद के वर्षों में आवंटन के दौरान संशोधित दरें लागू नहीं किए जाने का मामला जांच के दायरे में आया है। ईडी की जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि गमाडा ने दरें बढ़ने के बावजूद विस्थापितों को पुराने रेट पर प्लॉट क्यों दिए। जून 2020 में कमेटी की बैठक में नई दरों पर चर्चा होने के बाद भी उन्हें लागू क्यों नहीं किया गया। इस पर जब्त रिकॉर्ड से ईडी जांच कर रही है। इसमें जल्द ही पूछताछ के लिए भी गमाडा के आलाधिकारियों को बुलाने का प्लान बनाया जा रहा है।
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कोट --

गमाडा से ईडी ने इस तरह का कोई रिकॉर्ड नहीं मांगा है। अगर ईडी इस मामले में जांच करने आती है तो उसका सहयोग किया जाएगा। अगर यह सबूत है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। संदीप ऋषि, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, गमाडा



ईडी ने पंजाब पुलिस से किया संपर्क

मोहाली। ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) में जमीन के सौदों और वित्तीय रियायतों से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गमाडा के वरिष्ठ अधिकारियों और दिल्ली की रियल एस्टेट कंपनी रेमिगेट बिल्डस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए पंजाब पुलिस से संपर्क किया है। जांच का एक प्रमुख पहलू कंपनी को दी गई वित्तीय राहत और मोहाली के सेक्टर-62 में व्यावसायिक भूखंड के आवंटन से जुड़ा है। सितंबर 2015 में 1.13 एकड़ का फूड कोर्ट स्थल नीलामी के जरिये कंपनी को 32.50 करोड़ रुपये में आवंटित किया गया था। ईडी यह जांच कर रही है कि कंपनी को बकाया राशि, ब्याज और अन्य शुल्कों में किस आधार पर राहत दी गई। रिपोर्टों के अनुसार, करीब 57 करोड़ रुपये के बकाये की छूट का मामला सामने आया है, जबकि लगभग 40 करोड़ रुपये की राहत अलग से चर्चा में रही है। पंजाब के आवास निर्माण एवं शहरी विकास विभाग के प्रमुख सचिव विकास गर्ग ने 15 अक्तूबर को कंपनी की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। साथ ही, गमाडा के अपीलीय अधिकारी की ओर से 5 फरवरी 2026 को जारी आदेश को भी रद कर दिया। इससे कंपनी को दी गई करीब 40 करोड़ रुपये की राहत वापस ले ली गई।






पुड्डा भवन में 50 घंटे तक चली थी ईडी की तलाशी

ईडी ने 22 से 24 सितंबर के बीच मोहाली के सेक्टर-62 स्थित पुड्डा भवन में करीब 50 घंटे तक तलाशी और जांच की थी। इस दौरान सरकारी रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से संबंधित सामग्री की पड़ताल की गई। गमाडा और पंजाब सरकार ने ईडी की इस कार्रवाई को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी है। 7 अक्तूबर को सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने ईडी और केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। मामले की अगली सुनवाई 28 अक्तूबर को निर्धारित है। अब एफआईआर दर्ज कराने के लिए ईडी की ओर से पंजाब पुलिस से संपर्क किए जाने के बाद जांच आगे बढ़ने की संभावना है। हालांकि, आरोपों की पुष्टि और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होना जांच तथा कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
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