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Mohali News: विजिलेंस के पास रिमांड पर चल रहे 26 जून से मजीठिया को अदालत ने भेजा जेल
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मोहाली। आय से अधिक संपत्ति के मामले में 26 जून से विजिलेंस के पास रिमांड पर चल रहे शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया का रिमांड खत्म होने के उपरांत रविवार को दोबारा ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। मजीठिया को कड़े सुरक्षा प्रबंधों में ड्यूटी मजिस्ट्रेट गुरलीन कौर की अदालत में सुबह 10 बजे के पेश किया गया।
बिक्रम सिंह मजीठिया की पेशी से पहले रविवार को अकाली दल के नेता व काफी समर्थक मोहाली कोर्ट के बाहर पहुंच गए। अकाली वर्कर उस समय पहुंचे जब पुलिस उन्हें रोकने के लिए बंदोबस्त कर रही थी। पुलिस ने अकाली समर्थकों को रोकने के लिए तीन जिलों मोहाली, श्री फतेहगढ़ साहिब और रोपड़ से फोर्स मंगवाई थी। समर्थकों ने आते ही नारेबाजी शुरु कर दी और पुलिस को उन्हें हिरासत में लेना पड़ा। इस बीच अकाली समर्थकों व पुलिस के बीच धक्का मुक्की भी हुई। उसके बाद पुलिस अकाली वर्करों को बस में भरकर ले गई।
अदालत में सरकारी वकील व बचाव पक्ष ने अपनी-अपनी दलीलें रखी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मजीठिया को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अदालत में विजिलेंस ने आकर कहा कि उनकी जांच पूरी हो चुकी है। मजीठिया 12 दिन से पुलिस रिमांड पर थे। कानूनी अनुसार किसी भी अपराधी को 15 दिन से ज्यादा रिमांड पर नहीं रख सकते। कोर्ट ने उन्हें न्यू नाभा जेल भेजने के निर्देश दिए। इसके साथ ही जानकारी दी कि पुलिस अभी तीन दिन और रिमांड हासिल कर सकती है। अगर जरूरत हुई तो दोबारा से मजीठिया का पुलिस रिमांड लिया जाएगा। अब इस केस की सुनवाई 12 जुलाई को होगी।
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अदालत में मजीठिया के वकील अर्शदीप कलेर ने आम आदमी पार्टी के मंत्रियों, प्रतिनिधियों व मीडिया चैनलों को कानूनी चेतावनी दी। कलेर ने कहा कि मजीठिया के खिलाफ झूठी कहानियां फैलाने वालों को अदालत में जवाब देना होगा। वहीं, अकाली नेता डॉ. दलजीत चीमा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को मजीठिया का चेहरा पसंद नहीं है। इसके चलते ही उन्हें मीडिया के सामने नहीं आने देना चाहते हैं।
दूसरी तरफ सरकारी वकील ने बताया कि जांच के सिलसिले में विजिलेंस ब्यूरो की टीम कल मजीठिया को लेकर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर पहुंची थी। यहां मजीठिया परिवार की सरैया डिस्टलरी की जांच पड़ताल की गई। पता चला है कि जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, जिन्हें कोर्ट में पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि नई जांच के दौरान अगर कुछ सामने आया तो कोर्ट में दोबारा से याचिका लगाकर रिमांड की मांग की जाएगी।
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बिक्रम सिंह मजीठिया की पेशी से पहले रविवार को अकाली दल के नेता व काफी समर्थक मोहाली कोर्ट के बाहर पहुंच गए। अकाली वर्कर उस समय पहुंचे जब पुलिस उन्हें रोकने के लिए बंदोबस्त कर रही थी। पुलिस ने अकाली समर्थकों को रोकने के लिए तीन जिलों मोहाली, श्री फतेहगढ़ साहिब और रोपड़ से फोर्स मंगवाई थी। समर्थकों ने आते ही नारेबाजी शुरु कर दी और पुलिस को उन्हें हिरासत में लेना पड़ा। इस बीच अकाली समर्थकों व पुलिस के बीच धक्का मुक्की भी हुई। उसके बाद पुलिस अकाली वर्करों को बस में भरकर ले गई।
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अदालत में सरकारी वकील व बचाव पक्ष ने अपनी-अपनी दलीलें रखी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मजीठिया को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अदालत में विजिलेंस ने आकर कहा कि उनकी जांच पूरी हो चुकी है। मजीठिया 12 दिन से पुलिस रिमांड पर थे। कानूनी अनुसार किसी भी अपराधी को 15 दिन से ज्यादा रिमांड पर नहीं रख सकते। कोर्ट ने उन्हें न्यू नाभा जेल भेजने के निर्देश दिए। इसके साथ ही जानकारी दी कि पुलिस अभी तीन दिन और रिमांड हासिल कर सकती है। अगर जरूरत हुई तो दोबारा से मजीठिया का पुलिस रिमांड लिया जाएगा। अब इस केस की सुनवाई 12 जुलाई को होगी।
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अदालत में मजीठिया के वकील अर्शदीप कलेर ने आम आदमी पार्टी के मंत्रियों, प्रतिनिधियों व मीडिया चैनलों को कानूनी चेतावनी दी। कलेर ने कहा कि मजीठिया के खिलाफ झूठी कहानियां फैलाने वालों को अदालत में जवाब देना होगा। वहीं, अकाली नेता डॉ. दलजीत चीमा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल को मजीठिया का चेहरा पसंद नहीं है। इसके चलते ही उन्हें मीडिया के सामने नहीं आने देना चाहते हैं।
दूसरी तरफ सरकारी वकील ने बताया कि जांच के सिलसिले में विजिलेंस ब्यूरो की टीम कल मजीठिया को लेकर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर पहुंची थी। यहां मजीठिया परिवार की सरैया डिस्टलरी की जांच पड़ताल की गई। पता चला है कि जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, जिन्हें कोर्ट में पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि नई जांच के दौरान अगर कुछ सामने आया तो कोर्ट में दोबारा से याचिका लगाकर रिमांड की मांग की जाएगी।