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रेडियो सुनना पसंद था, इसलिए परिजनों ने दहेज में दिया
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नयागांव। रेडियो का जमाना बेशक पुराना हो गया है, लेकिन आज भी ऐसे लोग हैं जो रेडियो पर खबरें व गाना सुनने के बिना न ही सो पाते हैं और न ही खाना खा पाते हैं। अब रेडियो की जगह बेशक टीवी ने ले ली है, लेकिन रेडियो सुनने वाले लोगों की आज भी पहली पसंद वही है।
नयागांव निवासी बुुजुर्ग प्रेमलता का कहना है कि बचपन में रेडियो पर लता मंगेशकर के ऐसे सुरीले गाने आते थे, जिनको चाह कर भी नहीं छोड़ा जा सकता था। तब से रेडियो सुनने का ऐसा शौक लगा कि आज भी रेडियो सुने बिना नींद ही नहीं आती है। शिक्षा विभाग में सेंटर हेड टीचर के पद से सेवानिवृत्त हुई प्रेमलता का कहना है कि नौकरी के समय भी उनका रेडियो से प्यार था।
जब वह नौकरी से सेवानिवृत्त हुई थीं तो साथी कर्मचारियों ने उन्हें रेडियो ही गिफ्ट दिया था। यहां तक की रेडियो के शौक को देखते हुए माता-पिता ने भी दहेज में एक रेडियो दिया था। वृद्धावस्था में प्रेमलता अब ज्यादातर काम बैठकर ही करती हैं, लेकिन रेडियो पर खबर और गाने न सुने तो उन्हें खाना हजम भी नहीं होता है। पहले 5 रुपये की तीन बैटरी डालकर गाने सुनते थे, लेकिन अभी 80 रुपये की चार बैटरी डालकर सुनते हैं।
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रेडियो न सुनने के कारण बिगड़ी तबीयत
प्रेमलता ने बताया कि उन्हें रेडियो सुनने की आदत ऐसी है कि उनका पुराना रेडियो खराब हो गया था। कई दिन रेडियो की आवाज न सुनने के कारण उन्हें बेचैनी होने लगी और उनकी तबीयत खराब हो गई। यह देखते हुए उनकी पीसीएस बेटी अनुराधा ने नया रेडियो लाकर दे दिया। अब उस नए रेडियो से पुराने गाने सुनती हूं।
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नयागांव निवासी बुुजुर्ग प्रेमलता का कहना है कि बचपन में रेडियो पर लता मंगेशकर के ऐसे सुरीले गाने आते थे, जिनको चाह कर भी नहीं छोड़ा जा सकता था। तब से रेडियो सुनने का ऐसा शौक लगा कि आज भी रेडियो सुने बिना नींद ही नहीं आती है। शिक्षा विभाग में सेंटर हेड टीचर के पद से सेवानिवृत्त हुई प्रेमलता का कहना है कि नौकरी के समय भी उनका रेडियो से प्यार था।
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जब वह नौकरी से सेवानिवृत्त हुई थीं तो साथी कर्मचारियों ने उन्हें रेडियो ही गिफ्ट दिया था। यहां तक की रेडियो के शौक को देखते हुए माता-पिता ने भी दहेज में एक रेडियो दिया था। वृद्धावस्था में प्रेमलता अब ज्यादातर काम बैठकर ही करती हैं, लेकिन रेडियो पर खबर और गाने न सुने तो उन्हें खाना हजम भी नहीं होता है। पहले 5 रुपये की तीन बैटरी डालकर गाने सुनते थे, लेकिन अभी 80 रुपये की चार बैटरी डालकर सुनते हैं।
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रेडियो न सुनने के कारण बिगड़ी तबीयत
प्रेमलता ने बताया कि उन्हें रेडियो सुनने की आदत ऐसी है कि उनका पुराना रेडियो खराब हो गया था। कई दिन रेडियो की आवाज न सुनने के कारण उन्हें बेचैनी होने लगी और उनकी तबीयत खराब हो गई। यह देखते हुए उनकी पीसीएस बेटी अनुराधा ने नया रेडियो लाकर दे दिया। अब उस नए रेडियो से पुराने गाने सुनती हूं।