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काम छूट गया, जेब खाली.. अब यहां क्या करेंगे
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जीरकपुर। एक-दो दिनों में देश की राजधानी दिल्ली में मजदूरों की संख्या फिर से बढ़ने वाली है। 24 घंटों में पूरे ट्राइसिटी से 20 हजार से ज्यादा मजदूर व निजी कंपनियों में काम करते यूपी, बिहार व राजस्थान के निकले हैं। यह खुलासा अमर उजाला की शनिवार की रात और रविवार पूरे दिन की रियलिटी चेक में हुआ है। सभी दिल्ली तक जाएंगे क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि वहीं जाकर उन्हें कुछ मदद मिलेगी।
राशन महंगा, आठ दिनों से काम बंद दिहाड़ीदार मजदूर कहां से लाएं पैसे
मौलीजागरां में रहने वाले ऋषिपाल ने बताया कि चंडीगढ़ में 750 रुपये में दस किलो आटा, पांच किलो चावल, एक किलो दाल व रिफाइंड सहित थोड़ा मसाला दिया जा रहा है। आठ दिनों से काम बंद है। इतने पैसे जेब में नहीं है कि राशन खरीद सकें। मजबूरन अपने गांव यूपी के इटावा के लिए साइकिल से अपनी बहन को घर लेकर जा रहा हूं। साथ में अंकित भी अपनी बहन को लेकर इटावा जा रहा है।
पूरी रात पैदल चलेंगे, एक-दो दिन मेें दिल्ली पहुंच गए तो कोई न कोई बंदोबस्त हो जाएगा
शनिवार की रात चंडीगढ़ से निकले भगवान दास ने बताया कि हमारे साथ करीब पचास दिहाड़ीदार मजदूर हैं, सबको यहां से पैदल लखनऊ तक जाना है। सुना था कि दिल्ली से बसें यूपी तक जा रही हैं। एक-दो दिन में पैदल चलकर हम लोग दिल्ली तक पहुंच गए तो सफर आसान हो जाएगा। अगर वहां मदद मिलती है तो नहीं तो पैदल तो घर जाना ही है, क्योंकि यहां रहे तो कोरोना से बाद में भूख से पहले मर जाएंगे।
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चंडीगढ़ से हाथ में एलसीडी और सामान लिए के लिए यूपी पैदल निकले
राजेश पाल ने बताया कि चंडीगढ़ में दिहाड़ी का काम करता हूं। यहां मकान का किराया और खान के लिए पैसे नहीं है। मेरे साथ करीब दस लोग हैं। सबको किसी तरह दिल्ली पहुंचना है, उसके बाद वहां से लखनऊ तक कोई न कोई बंदोबस्त कर लेंगे। यह बंदी कब तक होगी, यह किसी को पता नहीं है, जिस तरह कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, उसे देखकर ऐसा लग रहा है कि आगे भी लॉकडाउन हो सकता है। ऐसे में अगर पांच से छह दिनों में घर पहुंच गए तो घर पर रोटी तो मिलेगी। यहां रहे तो मकान का किराया और राशन का पैसा कौन देगा।
सोहन लाल रेहड़ी पर परिवार को लेकर इटावा के लिए निकले
चंडीगढ़ के मौलीजागरां से सोहन लाल पत्नी सीमा सहित चार बच्चों को लेकर रेहड़ी पर यूपी के इटावा तक जाएगा। उसका कहना है कि जहां थकेंगे, वहां रुक जाएंगे। हमारे पास पेट पालने के लिए कोई विकल्प भी तो नहीं है, इतने पढ़े-लिखे भी नहीं है कि प्रशासन से मदद की गुहार लगा सके। मदद मिलते-मिलते तो भूख से मर जाएंगे। इसलिए घर निकलना पड़ा है।
पंजाब के होशियारपुर से देहरादून के लिए पैदल निकले
अब्दूल और हुसैन ने बताया कि करीब बारह लोग देहरादून जा रहे हैं। शनिवार को पंजाब के होशियारपुर से निकले थे। रविवार को डेराबस्सी बरवाला रोड पर पहुंचे हैं, कोई साधन भी नहीं मिल रहा है। कोशिश यही है कि किसी तरह घर तक सही-सलामत पहुंच जाए। क्या करें दिहाड़ीदार हैं, चार पांच दिन तो काम चल गया, लेकिन अब मुश्किल था। इसलिए घर के लिए निकल गए।
फैक्ट्री बंद, जेब में पैसे नहीं, इसलिए घर पैदल निकल लिए
डेराबस्सी में रेल का पार्ट बनाने वाली कंपनी में काम करने वाले शिव सागर ने बताया कि कंपनी बंद हो गई है। इनकम कुछ है नहीं, परिवार पालना मुश्किल हो रहा है, सब्जी से लेकर राशन तक महंगा हो गया है। ऐसे में अब इतने पैसे भी जेब में नहीं बचे कि ज्यादा दिनों तक घर का खर्च चल पाएगा। इसलिए पैदल ही पत्नी, छोटी बिटिया, बेटी वंदना व छोटे बेटे आशीष सहित कंपनी के ही अन्य लोगों के साथ हरदोई के लिए पैदल निकले हैं।
यूपी और बिहार के लिए समूह में निकले दिहाड़ीदार
रविवार की रात को राहुल, रणविजय, रंजीत, पप्पू सहित दर्जनों दिहाड़ीदार पैदल निकले हैं। इनमें कुछ लोगों को यूपी तो कई लोगों को बिहार जाना है।
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राशन महंगा, आठ दिनों से काम बंद दिहाड़ीदार मजदूर कहां से लाएं पैसे
मौलीजागरां में रहने वाले ऋषिपाल ने बताया कि चंडीगढ़ में 750 रुपये में दस किलो आटा, पांच किलो चावल, एक किलो दाल व रिफाइंड सहित थोड़ा मसाला दिया जा रहा है। आठ दिनों से काम बंद है। इतने पैसे जेब में नहीं है कि राशन खरीद सकें। मजबूरन अपने गांव यूपी के इटावा के लिए साइकिल से अपनी बहन को घर लेकर जा रहा हूं। साथ में अंकित भी अपनी बहन को लेकर इटावा जा रहा है।
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पूरी रात पैदल चलेंगे, एक-दो दिन मेें दिल्ली पहुंच गए तो कोई न कोई बंदोबस्त हो जाएगा
शनिवार की रात चंडीगढ़ से निकले भगवान दास ने बताया कि हमारे साथ करीब पचास दिहाड़ीदार मजदूर हैं, सबको यहां से पैदल लखनऊ तक जाना है। सुना था कि दिल्ली से बसें यूपी तक जा रही हैं। एक-दो दिन में पैदल चलकर हम लोग दिल्ली तक पहुंच गए तो सफर आसान हो जाएगा। अगर वहां मदद मिलती है तो नहीं तो पैदल तो घर जाना ही है, क्योंकि यहां रहे तो कोरोना से बाद में भूख से पहले मर जाएंगे।
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चंडीगढ़ से हाथ में एलसीडी और सामान लिए के लिए यूपी पैदल निकले
राजेश पाल ने बताया कि चंडीगढ़ में दिहाड़ी का काम करता हूं। यहां मकान का किराया और खान के लिए पैसे नहीं है। मेरे साथ करीब दस लोग हैं। सबको किसी तरह दिल्ली पहुंचना है, उसके बाद वहां से लखनऊ तक कोई न कोई बंदोबस्त कर लेंगे। यह बंदी कब तक होगी, यह किसी को पता नहीं है, जिस तरह कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, उसे देखकर ऐसा लग रहा है कि आगे भी लॉकडाउन हो सकता है। ऐसे में अगर पांच से छह दिनों में घर पहुंच गए तो घर पर रोटी तो मिलेगी। यहां रहे तो मकान का किराया और राशन का पैसा कौन देगा।
सोहन लाल रेहड़ी पर परिवार को लेकर इटावा के लिए निकले
चंडीगढ़ के मौलीजागरां से सोहन लाल पत्नी सीमा सहित चार बच्चों को लेकर रेहड़ी पर यूपी के इटावा तक जाएगा। उसका कहना है कि जहां थकेंगे, वहां रुक जाएंगे। हमारे पास पेट पालने के लिए कोई विकल्प भी तो नहीं है, इतने पढ़े-लिखे भी नहीं है कि प्रशासन से मदद की गुहार लगा सके। मदद मिलते-मिलते तो भूख से मर जाएंगे। इसलिए घर निकलना पड़ा है।
पंजाब के होशियारपुर से देहरादून के लिए पैदल निकले
अब्दूल और हुसैन ने बताया कि करीब बारह लोग देहरादून जा रहे हैं। शनिवार को पंजाब के होशियारपुर से निकले थे। रविवार को डेराबस्सी बरवाला रोड पर पहुंचे हैं, कोई साधन भी नहीं मिल रहा है। कोशिश यही है कि किसी तरह घर तक सही-सलामत पहुंच जाए। क्या करें दिहाड़ीदार हैं, चार पांच दिन तो काम चल गया, लेकिन अब मुश्किल था। इसलिए घर के लिए निकल गए।
फैक्ट्री बंद, जेब में पैसे नहीं, इसलिए घर पैदल निकल लिए
डेराबस्सी में रेल का पार्ट बनाने वाली कंपनी में काम करने वाले शिव सागर ने बताया कि कंपनी बंद हो गई है। इनकम कुछ है नहीं, परिवार पालना मुश्किल हो रहा है, सब्जी से लेकर राशन तक महंगा हो गया है। ऐसे में अब इतने पैसे भी जेब में नहीं बचे कि ज्यादा दिनों तक घर का खर्च चल पाएगा। इसलिए पैदल ही पत्नी, छोटी बिटिया, बेटी वंदना व छोटे बेटे आशीष सहित कंपनी के ही अन्य लोगों के साथ हरदोई के लिए पैदल निकले हैं।
यूपी और बिहार के लिए समूह में निकले दिहाड़ीदार
रविवार की रात को राहुल, रणविजय, रंजीत, पप्पू सहित दर्जनों दिहाड़ीदार पैदल निकले हैं। इनमें कुछ लोगों को यूपी तो कई लोगों को बिहार जाना है।