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Mohali News: न्यूरो के मरीज हैं तो चंडीगढ़ रैफर, सिविल अस्पताल में नहीं हैं इलाज
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मोहाली। फेज-6 सिविल अस्पताल में पीजीआई की तर्ज पर सुविधाएं जुटाने का दावा किया जा रहा है पर न्यूरो सर्जन न होने से मरीजों को पीजीआई और जीएमसीएच-32 रैफर किया जा रहा है। वैसे भी यहां जो सर्जन हैं उनके मरीजों को ऑपरेशन के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।
मरीजों को रैफर न किया जाए, इसका विभाग के पास कोई समाधान नहीं है। प्रदेश के किसी भी अस्पताल में न्यूरो सर्जन की तैनाती नहीं होने से मरीजों को चंडीगढ़ के अलावा निजी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है। फेज-6 सिविल अस्पताल में मस्तिष्क और हड्डी के ऑपरेशन से जुड़े मरीजों की इलाज के दौरान मस्तिष्क से ट्यूमर हटाने की सर्जरी और रीढ़ की हड्डी के इलाज के दौरान न्यूरो सर्जन की जरूरत पड़ती है। न्यूरो सर्जन नहीं होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वर्तमान में सर्जरी और मनोरोग विभाग के मरीजों को पीजीआई और जीएमसीएच-32 रैफर किए जा रहे हैं।
इस वजह से शहर सहित खरड़, कुराली आदि समेत विभिन्न गांवों के मरीजों को सर्वाधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। सिविल अस्पताल के कुछ डॉक्टरों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनके पास माह में करीब 10 से 15 मरीज मनोरोग से संबंधित आते हैं जिन्हें न्यूरो सर्जन की जरूरत भी महसूस होती है। ऐसे में मरीजों को रैफर करने के अलावा कोई चारा नहीं रहता है। हड्डी रोग विशेषज्ञों का भी कहना है कि कई बार मरीजों के इलाज के दौरान न्यूरो सर्जन की जरूरत महसूस होती है। ऐसे में मरीजों को रैफर किया जाता है।
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इन बीमारियों में होती ही न्यूरो सर्जन की जरूरत
न्यूरो सर्जन मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी, तंत्रिकाओं, इंट्राकैनियल और इंट्रास्पाइनल वैस्क्युलेचर रोगों का इलाज करता है। न्यूरोसर्जन विशेष रूप से तंत्रिका तंत्र, मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी परेशानियों के उपचार में लोगों की मदद करते हैं। इसके अलावा शल्यकार, शल्य चिकित्सक, स्नायु विशेषज्ञ, मस्तिष्क विशेषज्ञ, ऑपरेटिंग सर्जन के नामों से जाना जाता है।
स्वास्थ्य विभाग मरीजों का इलाज करता है। हमारे पास न्यूरो के स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं हैं। पूरे पंजाब में ही इस तरह के स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं हैं। - डॉ. एच.एस. सीमा, सीएमओ
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मरीजों को रैफर न किया जाए, इसका विभाग के पास कोई समाधान नहीं है। प्रदेश के किसी भी अस्पताल में न्यूरो सर्जन की तैनाती नहीं होने से मरीजों को चंडीगढ़ के अलावा निजी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है। फेज-6 सिविल अस्पताल में मस्तिष्क और हड्डी के ऑपरेशन से जुड़े मरीजों की इलाज के दौरान मस्तिष्क से ट्यूमर हटाने की सर्जरी और रीढ़ की हड्डी के इलाज के दौरान न्यूरो सर्जन की जरूरत पड़ती है। न्यूरो सर्जन नहीं होने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वर्तमान में सर्जरी और मनोरोग विभाग के मरीजों को पीजीआई और जीएमसीएच-32 रैफर किए जा रहे हैं।
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इस वजह से शहर सहित खरड़, कुराली आदि समेत विभिन्न गांवों के मरीजों को सर्वाधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। सिविल अस्पताल के कुछ डॉक्टरों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनके पास माह में करीब 10 से 15 मरीज मनोरोग से संबंधित आते हैं जिन्हें न्यूरो सर्जन की जरूरत भी महसूस होती है। ऐसे में मरीजों को रैफर करने के अलावा कोई चारा नहीं रहता है। हड्डी रोग विशेषज्ञों का भी कहना है कि कई बार मरीजों के इलाज के दौरान न्यूरो सर्जन की जरूरत महसूस होती है। ऐसे में मरीजों को रैफर किया जाता है।
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इन बीमारियों में होती ही न्यूरो सर्जन की जरूरत
न्यूरो सर्जन मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी, तंत्रिकाओं, इंट्राकैनियल और इंट्रास्पाइनल वैस्क्युलेचर रोगों का इलाज करता है। न्यूरोसर्जन विशेष रूप से तंत्रिका तंत्र, मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी परेशानियों के उपचार में लोगों की मदद करते हैं। इसके अलावा शल्यकार, शल्य चिकित्सक, स्नायु विशेषज्ञ, मस्तिष्क विशेषज्ञ, ऑपरेटिंग सर्जन के नामों से जाना जाता है।
स्वास्थ्य विभाग मरीजों का इलाज करता है। हमारे पास न्यूरो के स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं हैं। पूरे पंजाब में ही इस तरह के स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं हैं। - डॉ. एच.एस. सीमा, सीएमओ