फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Mohali News ›   Guava Orchard Scam: Naib Tehsildar to turn approver in 138 crore case

अमरूद बाग घोटाला: 138 करोड़ रुपये के मामले में नायब तहसीलदार बनेगा वादा माफ गवाह

Wed, 17 Jun 2026 01:58 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 17 Jun 2026 01:58 AM IST
विज्ञापन
Guava Orchard Scam: Naib Tehsildar to turn approver in 138 crore case
मोहाली। बहुचर्चित अमरूद बाग घोटाले की जांच में एक बड़ा मोड़ आया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने तत्कालीन नायब तहसीलदार जसकरण सिंह बराड़ को वादा माफ गवाह बनने की अनुमति दे दी है। विजिलेंस ब्यूरो की अर्जी पर सुनवाई के बाद यह फैसला लिया गया। माना जा रहा है कि बराड़ के बयान से करीब 138 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले के कई अहम राज खुल सकते हैं। विजिलेंस के डीएसपी इंद्रपाल सिंह ने अदालत में अर्जी दायर की थी। अर्जी में कहा गया था कि बराड़ मामले के आरोपियों में शामिल रहा है। उसके पास घोटाले और सह-आरोपियों की भूमिका से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी है। अदालत ने रिकॉर्ड देखने के बाद माना कि बराड़ का बयान सच्चाई सामने लाने में अहम होगा। इसके बाद अदालत ने उसे माफी देकर सरकारी गवाह बनाने की अनुमति दी। विजिलेंस अधिकारियों का कहना है कि बराड़ के वादा माफी गवाह बनने से अन्य आरोपियों की भूमिका स्पष्ट होगी। जांच एजेंसी अब उसके बयान के आधार पर पूरे घोटाले की परतें खोलने में जुटी है। जिम्मेदार लोगों की भूमिका तय करने पर भी काम किया जा रहा है।
विज्ञापन


घोटाले की पृष्ठभूमि
यह मामला एरोट्रोपोलिस आवासीय परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से जुड़ा है। वर्ष 2016-17 के दौरान गमाडा द्वारा गांव बाकरपुर सहित कई गांवों की भूमि अधिग्रहित की जा रही थी। कुछ लोगों ने अधिक मुआवजा पाने के लिए अधिग्रहित भूमि पर फलदार अमरूद के बाग होने का दावा किया। जांच में आरोप है कि भूपिंदर सिंह और उसके सहयोगियों ने भूमि अधिग्रहण की पूर्व जानकारी पर जमीनें खरीदीं। उन्होंने बिक्री दस्तावेजों में अमरूद के बागों का उल्लेख करवाया। बाद में अधिक मुआवजा प्राप्त करने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और गिरदावरी रिकॉर्ड तैयार किए गए।
विज्ञापन

फर्जीवाड़े का तरीका
विजिलेंस का आरोप है कि तत्कालीन हलका पटवारी बचित्तर सिंह ने मूल गिरदावरी रजिस्टर नष्ट कर दिए। उनकी जगह फर्जी रिकॉर्ड तैयार किए गए, जिनमें जमीनों पर पुराने अमरूद के बाग दर्शाए गए। जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरे मामले में राजस्व विभाग और बागवानी विभाग की मिलीभगत सामने आई है। भूमि अधिग्रहण कलेक्टर कार्यालय और गमाडा के कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों की भी कथित मिलीभगत थी। विजिलेंस का दावा है कि इस कथित साजिश से सरकार और गमाडा को लगभग 138 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन

मुआवजे का भुगतान
जांच में सामने आया कि जसकरण सिंह बराड़ के कार्यकाल से पहले भुगतान हुए थे। फलदार पेड़ों के मुआवजे के रूप में 16 करोड़ 80 लाख 22 हजार 485 रुपये की राशि आठ भूमि मालिकों को जारी की गई थी। इसके बाद शेष 101 लाभार्थियों से संबंधित 123 करोड़ 35 लाख 67 हजार 575 रुपये की राशि भी जारी कर दी गई। विजिलेंस के अनुसार, सह-आरोपी जगदीश सिंह जौहल ने भुगतान जारी किए थे। उन्होंने कथित तौर पर किसी भी स्थल का निरीक्षण नहीं किया था। निर्धारित विशेष शर्तों को भी नजरअंदाज किया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed