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दस साल में बसा दिए पांच शहर, सुविधाओं का टोटा और सड़कों पर पशुओं का कहर
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मोहाली। राज्य सरकार ने जिले के शहरी एरिया में बढ़ोतरी करते हुए दस साल में करीब पांच नए शहर बसाए हैं। इन इलाकों को सिंगापुर और दुबई की तर्ज पर बसाया गया है। पंजाब ही नहीं बल्कि कई राज्यों के लोगों ने इन इलाकों में लाखों रुपये निवेश कर अपने सपनों के घर बसाए हैं। लेकिन हालात यह है कि वहां पर लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ता है, साथ ही सड़कों पर लावारिस पशु घूमने से सड़क हादसों का खतरा बना रहता है। वहीं, अगर रात को किसी को दांत में दर्द शुरू हो जाए तो इनमें डॉक्टर तक की सुविधा नहीं हैं।
इतना ही नहीं इलाकों की सुरक्षा भी राम भरोसे ही है। कई लोग तो इन एरिया में आकर पछता रहे हैं। लोगों का कहना है कि चीज हिसाब से इलाकों में विकास हो रहा है। उससे ऐसा लगता है कि मानों आने वाले दस साल भी इसी तरह धक्के खाने पड़ेंगे। जबकि कुछ एरिया की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने प्रस्ताव पास किए हैं कि आने वाले विधानसभा चुनाव में केवल उसी के हक में मतदान करेंगे, जो उम्मीदवार लिखित में देगा कि सत्ता में आने पर उनकी दिक्कतें दूर कर दी जाएंगी।
इसके साथ ही गमाडा की ओर से इंटरनेशनल एयरपोर्ट के साथ लगते इलाके में एयरोसिटी बसाई गई है। यह सिटी 2010 में बसाई गई थी। यहां पर करीब चार हजार रिहायशी प्लॉट गमाडा ने काटे थे। इसके अलावा कॉमर्शियल एरिया भी काटा गया है। कई ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी और बिजनेस टावर बस रहे हैं। लेकिन अभी तक लोग मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। यहां पर अभी तक डिस्पेंसरी, सरकारी स्कूल, फायर स्टेशन, श्मशानघाट, वेरका बूथ, धार्मिक स्थल, डाकघर समेत कोई सुविधा नहीं है। लोगों को छोटी सी छोटी चीज लेने के लिए मोहाली या चंडीगढ़ जाना पड़ता है। लेकिन इलाके में शराब के ठेके जरूर खुल गए हैं।
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नाम आईटी सिटी, टूटी सड़कें और पार्कों में पशु
एयरोसिटी के साथ लगते एरिया में भी ही गमाडा की ओर से 2014 में आईटी सिटी बसाई गई है। यह करीब 1700 एकड़ में बसी है। इसमें रिहायशी, इंडस्ट्रियल और कॉमर्शियल तीन हिस्सों में बसाई गई है। लेकिन यहां भी हालत काफी खराब है। इलाके की पूरी सड़कें जवाब दे गई हैं। घर के बाहर निकलते ही लावारिस पशु मुंह मारते रहते हैं। बाकी यहां भी कोई मूलभूत सुविधा नहीं है। अगर किसी की एटीएम से पैसे भी निकालने हों तो साथ बसे गांव मनौली में जाना पड़ता है। इसके अलावा एनचो की वजह से लोगों को काफी दिक्कत आ रही है। लोग अपनी समस्याओं के हल के लिए कई बार अधिकारियों से मिल चुके हैं।
नाम गेटवे सिटी, पहुंचने के लिए सडक तक नहीं
पंजाब अर्बन डेवलपमेंट अथारिटी (पुडा) ने वर्ष-2015 में गेटवे सिटी प्रोजेक्ट शुरू किया था। नेशनल हाईवे-5 चंडीगढ़ खरड़ हाईवे के किनारे बसाया गया था। यहां पर 417 रिहायशी प्लॉटों की स्कीम निकाली थी। सितंबर 2016 में अलॉटियों को अलाटमेंट पत्र जारी किए गए थे। साथ ही डेढ़ साल के अंदर यहां सभी मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने का दावा किया गया था। लेकिन गमाडा यह चीज नहीं कर पाया। लोगों ने बताया कि करीब 40 से ज्यादा घर बनकर तैयार हो चुके हैं। लेकिन सीवरेज के कनेक्शन न होने से लोगों को दिक्कत उठानी पड़ रही है। क्योंकि गमाडा ने सीवरेज की लाइन बिछा दी है। अभी तक निकासी का प्रबंध नहीं किया गया है। क्योंकि पंचायत विभाग से जमीन के लेकर विवाद चल रहा था। इस वजह से इस काम में देरी हो रही थी। इसके अलावा अभी तक सड़क के लिए जमीन एक्वायर करने संबंधी नोटिफिकेशन जारी होने के बाद भी काम अधर में है।
ईकोसिटी में न मार्केट और न ही अन्य सुविधाएं
गमाडा की ओर से न्यू चंडीगढ़ में साल 2011 में ईको सिटी बसाने की दिशा में काम शुरू हुआ था। यह एरिया चंडीगढ़ गढ़ से सटा हुआ है। ऐसे में लोगों ने यहां पर लाखों रुपये निवेश किए हैं। लेकिन यहां भी लोगों को अभी तक मार्केट तक नसीब नहीं हुई है। पुलिस चौकी भी नहीं बन पाई है। डिस्पेंसरी और फायर स्टेशन की कोई सुविधा नहीं है। लोगों का कहना है कि वह नाम के लिए न्यू चंडीगढ़ में रहते हैं। लेकिन हालात गांवों से भी बदतर हैं। हालांकि गमाडा ने इस एरिया में कुछ चीजों पर फोकस किया है, लेकिन हालात सुधरने में अभी समय लग सकता है।
मेडिसिटी बसाने की तैयारी, डिस्पेंसरी की सुविधा नहीं
इसी तरह न्यू चंडीगढ़ में गमाडा की ओर से मेडिसिटी बसाई जा रही है। जहां पर टाटा कैंसर अस्पताल से लेकर कई अन्य अस्पताल स्थापित किए जाएंगे। लेकिन मौजूदा समय में वहां भी लोगों को दिक्कत उठानी पड़ रही है। इलाके में कोई डिस्पेंसरी नहीं है। साथ लगते गांवों में डिस्पेंसरी स्थापित की गई है। लेकिन शाम होते ही वहां पर ताला लग जाता है। ऐसे में कोई बीमार पड़ जाता है तो उसे इलाज के लिए चंडीगढ़ या मोहाली जाना पड़ता है। इस वजह से भी लोग दिक्कत उठा रहे है।
क्या कहते हैं लोग
इलाके को बसाकर भूली सरकर
ऐसे लगता है जैसे कि सरकार इस इलाके को बसा करके भूल गई है। सरकार का इलाका वासियों की मूल सुविधाओं की तरफ कोई ध्यान नहीं है। इलाके में बिजली, पानी, सड़क, पोस्ट ऑफिस, बस क्यू शेल्टर, सेवा केंद्र, पार्क, स्ट्रीट लाइट जैसी मुख्य समस्याएं हैं जिनमें से कुछ समस्याओं तो ऐसी हैं जिनका रखरखाव नहीं किया जा रहा है। जबकि कुछ समस्याएं ऐसी हैं जिनको सरकार भूल ही चुकी है। - संतोष कुमार, निवासी ईको सिटी।
ईको सिटी में एक दुकान तक नहीं खुली
ईको सिटी का प्रोजेक्ट जब सरकार की तरफ से लांच किया गया था। उस समय पर बड़े-बड़े वादे गमाडा कर ओर से किए गए थे। अगर इस तरह के झूठे वादे कर महंगे दामों पर कोई प्राइवेट बिल्डर अगर जमीन बेचता तो उसके खिलाफ सरकार कानूनी कार्रवाई कर सकती थी। लेकिन जब सरकार ही इस प्रकार कर रही है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। लगभग पिछले 10 साल से बसे ईको सिटी-1 में अब तक एक छोटी सी दुकान भी उपलब्ध नहीं हो पाई है। बीमारी होने पर इलाज के लिए चंडीगढ़ जाना पड़ता है।
- सतवंत राय, निवासी ईको सिटी।
गेटवे सिटी के लोग भी आफत में
गेटवे सिटी के लोगों को कई तरह की दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं और वह आफत में हैं। एक तो पटियाला की राव की वजह से लोगों को काफी मुश्किल सहनी पड़ रही है। दूसरी तरफ वहां पर लोग गंदगी और कबाड़ आदि फेंक देेेते हैं। जिससे पटियाला की राव का बहाव बदल रहा है। इसके अलावा सीवरेज के कनेक्शन का काम अधूरा है। सीधी सड़क तक की सुविधा नहीं है। - रामराज, अलॉटी गेटवे सिटी।
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इतना ही नहीं इलाकों की सुरक्षा भी राम भरोसे ही है। कई लोग तो इन एरिया में आकर पछता रहे हैं। लोगों का कहना है कि चीज हिसाब से इलाकों में विकास हो रहा है। उससे ऐसा लगता है कि मानों आने वाले दस साल भी इसी तरह धक्के खाने पड़ेंगे। जबकि कुछ एरिया की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने प्रस्ताव पास किए हैं कि आने वाले विधानसभा चुनाव में केवल उसी के हक में मतदान करेंगे, जो उम्मीदवार लिखित में देगा कि सत्ता में आने पर उनकी दिक्कतें दूर कर दी जाएंगी।
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इसके साथ ही गमाडा की ओर से इंटरनेशनल एयरपोर्ट के साथ लगते इलाके में एयरोसिटी बसाई गई है। यह सिटी 2010 में बसाई गई थी। यहां पर करीब चार हजार रिहायशी प्लॉट गमाडा ने काटे थे। इसके अलावा कॉमर्शियल एरिया भी काटा गया है। कई ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी और बिजनेस टावर बस रहे हैं। लेकिन अभी तक लोग मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। यहां पर अभी तक डिस्पेंसरी, सरकारी स्कूल, फायर स्टेशन, श्मशानघाट, वेरका बूथ, धार्मिक स्थल, डाकघर समेत कोई सुविधा नहीं है। लोगों को छोटी सी छोटी चीज लेने के लिए मोहाली या चंडीगढ़ जाना पड़ता है। लेकिन इलाके में शराब के ठेके जरूर खुल गए हैं।
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नाम आईटी सिटी, टूटी सड़कें और पार्कों में पशु
एयरोसिटी के साथ लगते एरिया में भी ही गमाडा की ओर से 2014 में आईटी सिटी बसाई गई है। यह करीब 1700 एकड़ में बसी है। इसमें रिहायशी, इंडस्ट्रियल और कॉमर्शियल तीन हिस्सों में बसाई गई है। लेकिन यहां भी हालत काफी खराब है। इलाके की पूरी सड़कें जवाब दे गई हैं। घर के बाहर निकलते ही लावारिस पशु मुंह मारते रहते हैं। बाकी यहां भी कोई मूलभूत सुविधा नहीं है। अगर किसी की एटीएम से पैसे भी निकालने हों तो साथ बसे गांव मनौली में जाना पड़ता है। इसके अलावा एनचो की वजह से लोगों को काफी दिक्कत आ रही है। लोग अपनी समस्याओं के हल के लिए कई बार अधिकारियों से मिल चुके हैं।
नाम गेटवे सिटी, पहुंचने के लिए सडक तक नहीं
पंजाब अर्बन डेवलपमेंट अथारिटी (पुडा) ने वर्ष-2015 में गेटवे सिटी प्रोजेक्ट शुरू किया था। नेशनल हाईवे-5 चंडीगढ़ खरड़ हाईवे के किनारे बसाया गया था। यहां पर 417 रिहायशी प्लॉटों की स्कीम निकाली थी। सितंबर 2016 में अलॉटियों को अलाटमेंट पत्र जारी किए गए थे। साथ ही डेढ़ साल के अंदर यहां सभी मूलभूत सुविधाएं मुहैया करवाने का दावा किया गया था। लेकिन गमाडा यह चीज नहीं कर पाया। लोगों ने बताया कि करीब 40 से ज्यादा घर बनकर तैयार हो चुके हैं। लेकिन सीवरेज के कनेक्शन न होने से लोगों को दिक्कत उठानी पड़ रही है। क्योंकि गमाडा ने सीवरेज की लाइन बिछा दी है। अभी तक निकासी का प्रबंध नहीं किया गया है। क्योंकि पंचायत विभाग से जमीन के लेकर विवाद चल रहा था। इस वजह से इस काम में देरी हो रही थी। इसके अलावा अभी तक सड़क के लिए जमीन एक्वायर करने संबंधी नोटिफिकेशन जारी होने के बाद भी काम अधर में है।
ईकोसिटी में न मार्केट और न ही अन्य सुविधाएं
गमाडा की ओर से न्यू चंडीगढ़ में साल 2011 में ईको सिटी बसाने की दिशा में काम शुरू हुआ था। यह एरिया चंडीगढ़ गढ़ से सटा हुआ है। ऐसे में लोगों ने यहां पर लाखों रुपये निवेश किए हैं। लेकिन यहां भी लोगों को अभी तक मार्केट तक नसीब नहीं हुई है। पुलिस चौकी भी नहीं बन पाई है। डिस्पेंसरी और फायर स्टेशन की कोई सुविधा नहीं है। लोगों का कहना है कि वह नाम के लिए न्यू चंडीगढ़ में रहते हैं। लेकिन हालात गांवों से भी बदतर हैं। हालांकि गमाडा ने इस एरिया में कुछ चीजों पर फोकस किया है, लेकिन हालात सुधरने में अभी समय लग सकता है।
मेडिसिटी बसाने की तैयारी, डिस्पेंसरी की सुविधा नहीं
इसी तरह न्यू चंडीगढ़ में गमाडा की ओर से मेडिसिटी बसाई जा रही है। जहां पर टाटा कैंसर अस्पताल से लेकर कई अन्य अस्पताल स्थापित किए जाएंगे। लेकिन मौजूदा समय में वहां भी लोगों को दिक्कत उठानी पड़ रही है। इलाके में कोई डिस्पेंसरी नहीं है। साथ लगते गांवों में डिस्पेंसरी स्थापित की गई है। लेकिन शाम होते ही वहां पर ताला लग जाता है। ऐसे में कोई बीमार पड़ जाता है तो उसे इलाज के लिए चंडीगढ़ या मोहाली जाना पड़ता है। इस वजह से भी लोग दिक्कत उठा रहे है।
क्या कहते हैं लोग
इलाके को बसाकर भूली सरकर
ऐसे लगता है जैसे कि सरकार इस इलाके को बसा करके भूल गई है। सरकार का इलाका वासियों की मूल सुविधाओं की तरफ कोई ध्यान नहीं है। इलाके में बिजली, पानी, सड़क, पोस्ट ऑफिस, बस क्यू शेल्टर, सेवा केंद्र, पार्क, स्ट्रीट लाइट जैसी मुख्य समस्याएं हैं जिनमें से कुछ समस्याओं तो ऐसी हैं जिनका रखरखाव नहीं किया जा रहा है। जबकि कुछ समस्याएं ऐसी हैं जिनको सरकार भूल ही चुकी है। - संतोष कुमार, निवासी ईको सिटी।
ईको सिटी में एक दुकान तक नहीं खुली
ईको सिटी का प्रोजेक्ट जब सरकार की तरफ से लांच किया गया था। उस समय पर बड़े-बड़े वादे गमाडा कर ओर से किए गए थे। अगर इस तरह के झूठे वादे कर महंगे दामों पर कोई प्राइवेट बिल्डर अगर जमीन बेचता तो उसके खिलाफ सरकार कानूनी कार्रवाई कर सकती थी। लेकिन जब सरकार ही इस प्रकार कर रही है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। लगभग पिछले 10 साल से बसे ईको सिटी-1 में अब तक एक छोटी सी दुकान भी उपलब्ध नहीं हो पाई है। बीमारी होने पर इलाज के लिए चंडीगढ़ जाना पड़ता है।
- सतवंत राय, निवासी ईको सिटी।
गेटवे सिटी के लोग भी आफत में
गेटवे सिटी के लोगों को कई तरह की दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं और वह आफत में हैं। एक तो पटियाला की राव की वजह से लोगों को काफी मुश्किल सहनी पड़ रही है। दूसरी तरफ वहां पर लोग गंदगी और कबाड़ आदि फेंक देेेते हैं। जिससे पटियाला की राव का बहाव बदल रहा है। इसके अलावा सीवरेज के कनेक्शन का काम अधूरा है। सीधी सड़क तक की सुविधा नहीं है। - रामराज, अलॉटी गेटवे सिटी।