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पाइपलाइन से गैस की सप्लाई, न कूड़े से बनी बिजली, सरकार नहीं गंभीर

Sun, 09 Jan 2022 01:48 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Sun, 09 Jan 2022 01:48 AM IST
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Gas supply from pipeline, no electricity made from garbage, government is not serious
मोहाली। वीआईपी शहर के लोगों को रसोई गैस के लिए सिलिंडरों से मुक्ति दिलाने के लिए पाइपलाइन के माध्यम से गैस की सप्लाई देने की योजना का काम पांच साल में सिरे नहीं चढ़ पाया है, यही हाल कूड़े से बिजली पैदा करने के लिए समगौली में लगने वाले सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट का है। जबकि इस मामले में चंडीगढ़ और पंचकूला काफी आगे निकल गए हैं। इन दोनों प्रोजेक्टों के सिरे ने चढ़ने से जहां आम लोगों का नुकसान हो रहा है, वहीं स्वच्छता रैकिंग पर भी असर पड़ रहा है।
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जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार की योजना के तहत मोहाली में पाइपलाइन से गैस की सप्लाई देने के प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ था। राजपुरा से एयरोसिटी होते हुए मोहाली शहर में लाइन बिछाई गई थी। जबकि शहर के अंदरूनी एरिया में लाइन बिछाने के लिए बकायदा हाउस की बैठक में प्रस्ताव पास किया गया था। इस दौरान जो कंपनियां प्रोजेक्ट के लिए आगे आई थीं, उनकी तरफ से नगर निगम में इस संबंधी एक अपनी प्रस्तुति तक दी गई थी, लेकिन इसके बाद भी प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया है। पूर्व पार्षद अशोक झा बताते हैं कि इससे पहले वाली नगर निगम में जब वह पार्षद थे, उस समय हाउस की बैठक में प्रस्ताव पास किया गया था। साथ ही प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए सहमति दी गई थी। इसके बावजूूद उक्त प्रोजेक्ट को अधर में लटकाया जा रहा है ताकि इलाके में चल रही गैस कंपनियों को फायदा दिया जा सके। इसी तरह समगौली में पचास एकड़ जगह जगह में कूड़े से बिजली पैदा करने वाला सात मेगावाट क्षमता वाला सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेेक्ट स्थापित होना था, लेकिन यह प्रोजेक्ट भी अधर है। पूर्व पार्षद अरूण शर्मा ने बताया कि इस सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। इसी वजह से इलाके की स्वच्छता रैकिंग पर असर पड़ रहा है। वहीं, इसी वजह से शहर में ही एक कूड़े का पहाड़ बन गया है।
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पमेंट के नाम पर कंपनियां हटीं पीछे
नगर निगम के डिप्टी मेयर कुलजीत सिंह बेदी ने बताया कि पाइपलाइन से गैस की सप्लाई के लिए नगर निगम गंभीर है। शहर पूरी तरह विकसित हो चुका है। अंदरूनी एरिया में लाइन बिछाने के लिए उन्होंने कंपनियों के लिए शर्त रखी थी। इसमें था कि वह पाइपलाइन बिछाने से पहले सिक्योरिटी राशि जमा करवाए ताकि लाइन बिछाते समय होने वाले नुकसान की भरपाई हो सके, लेकिन पेमेंट के नाम से कंपनियां पीछे हट रही हैं।
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नियम पूरे करने वाली कंपनियों को मिलती है अनुमति
नगर निगम के कमिश्नर डॉ. कमल कुमार गर्ग ने कहा कि गैस लाइन बिछाने व कनेक्शन देने का काम कंपनियों ने करना है। उनकी तरफ से नियम पूरे करने वाली कंपनियों को अनुमति दी जाती है। जिन कंपनियों ने नियम पूरे किए उन्हें अनुमति दी गई है। सगमौली में लगने वाला प्रोजेक्ट सरकार स्तर पर चल रहा है।
किसानी संघर्ष में गैस लाइन के प्रोजेक्ट पर लगी ब्रेक
जब कृषि कानूनों को लेकर संघर्ष चल रहा था। उस समय में गैस लाइन के प्रोजेक्ट पर कुछ महीने के लिए ब्रेक लग गई थी। क्योंकि किसानों ने कुछ एरिया में पाइप लाइन का प्रोजेक्ट रुकवा दिया था। उस समय उनका कहना था कि जिन उद्योगपतियों का वह विरोध कर रहे थे, उनकी कंपनी ही इलाके में गैसलाइन बिछा रही है। हालांकि बाद में कंपनी ने काम शुरू कर दिया था।

अस्पतालों व पेट्रोल पंपों तक पहुुंची गैस लाइन
भले ही आम लोगों को पाइप से गैस की सुविधा नहीं मिल पाई है, लेकिन निजी अस्पतालों व पेट्रोल पंपों तक इसकी सप्लाई पहुंच गई। कई निजी अस्पताल पाइपलाइन से गैस की सप्लाई ले रहे हैं। लोगों का कहना है कि आम लोगों को भी यह सुविधा मिलनी चाहिए। इलाके में एक सिलिंडर की कीमत आठ सौ रुपये से अधिक है।
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