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32 साल बाद मिला न्याय: स्वतंत्रता सैनानी और वाइस प्रिंसिपल का अपहरण मामला, पंजाब पुलिस का पूर्व SHO दोषी करार
Wed, 18 Dec 2024 08:48 PM IST
अंकेश ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली (पंजाब)
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Wed, 18 Dec 2024 08:48 PM IST
सार
32 साल पुराने स्वतंत्रता सैनानी और वाइस प्रिंसिपल के अपहरण मामले में मोहाली की सीबीआई कोर्ट से पीड़ित परिवार को न्याय मिला है। मामले में अदालत ने पंजाब पुलिस के पूर्व एसएचओ को दोषी करार दिया है।
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पति व ससुर की फोटो दिखाती सुखदेव सिंह की पत्नी।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मोहाली की सीबीआई कोर्ट में 32 साल पुराने स्वतंत्रता सैनानी और वाइस प्रिंसिपल के अपहरण, अवैध कारावास में रखकर लापता करने के मामले की बुधवार को सुनवाई हुई। सीबीआई स्पेशल जज मनजोत कौर की अदालत ने आरोपी पूर्व एसएचओ सुरिंदरपाल सिंह सहित दो अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया है। हालांकि एक आरोपी एएसआई अवतार सिंह की ट्रॉयल के दौरान पहले ही मौत हो चुकी है। दोषी पूर्व एसएचओ सुरिंदरपाल सिंह को 23 दिसंबर को सजा सुनाई जाएगी। दोषी सुरिंदरपाल जो कि जेल में बंद है को वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया था।
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जानकारी के अनुसार दोषी तत्कालीन एसएचओ सुरिंदरपाल सिंह पहले ही जसंवत सिंह खालड़ा की हत्या के केस में उम्र कैद की सजा काट रहा है। उसको तरनतारन के गांव जिओबाला के परिवार के चार सदस्यों को अगवा करके लापता करने के एक अन्य केस में भी 10 साल की सजा सुनाई गई है। अदालत ने थाना सरहाली जिला तरनतारन के उस समय के एसएचओ सुरिंदरपाल सिंह को धारा 120बी, 342, 364, 365 में दोषी ठहराया है। इस पर आरोप है कि 31 अक्तूबर-1992 की शाम को सुखदेव सिंह वाइस प्रिंसिपल और उसके 80 वर्षीय ससुर सुल्लखन सिंह (स्वतंत्रता सैनानी निवासी भकना) को एएसआई अवतार सिंह के नेतृत्व में पुलिस पार्टी ने हिरासत में लिया था। अवतार सिंह ने परिवार वालों को सूचना दी थी कि सुखदेव सिंह और सुल्लखन सिंह को एसएचओ सुरिंदरपाल सिंह ने पूछताछ के लिए बुलाया है। फिर दोनों को तीन दिन तक पुलिस थाना सरहाली तरनतारन में अवैध तरीके से कैद करके रखा गया, जहां परिवार और अध्यापक यूनियन के सदस्य उनको मिले और उन्हें खाना, कपड़े मुहैया करवाए, लेकिन दसके बाद से उनका कोई पता नहीं चला।
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इस मामले में सुखदेव सिंह की पत्नी सुखवंत कौर ने पुलिस के उच्चाधिकारियों को शिकायत की थी सुखदेव सिंह और सुल्लखन सिंह को आपराधिक मामलों में फंसाया गया है, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। उस समय सुखदेव सिंह सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल लोपोके जिला अमृतसर के लैक्चरर-वाइस प्रिंसिपल के तौर पर सेवाएं निभा रहे थे और उनके ससुर सुल्लखन सिंह स्वतंत्रता सैनानी थे, वह आजादी की लहर के दौरान बाबा सोहन सिंह भकना के नजदीकी साथियों में से एक थे। उन्होंने उसके साथ जेल भी काटी थी। इस मामले में पूर्व विधायक सतपाल डांग और विमला डांग ने भी तत्कालीन मुख्यमंत्री पंजाब बेअंत सिंह को अलग-अलग पत्र लिखे और मुख्यमंत्री ने भी जवाब दिया कि वह पुलिस की हिरासत में नहीं हैं।
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खाली कागज पर करवाए हस्ताक्षर
वर्ष 2003 में कुछ पुलिस मुलाजिमों ने सुखवंत कौर (सुखदेव सिंह की पत्नी) के साथ संपर्क किया और उसके खाली कागज पर हस्ताक्षर करवा लिए थे। कुछ दिन बाद उसको सुखदेव सिंह की मौत का सर्टिफिकेट सौंपा गया, जिसमें 8 जुलाई 1993 को उसकी मौत होने का जिक्र किया गया था। परिवार को सूचित किया गया था कि जेल में रिमांड के दौरान सुखदेव सिंह की मौत हो गई और उसकी लाश सुल्लखन सिंह सहित हरीके नहर में फेंक दी गई।
वर्ष 2003 में कुछ पुलिस मुलाजिमों ने सुखवंत कौर (सुखदेव सिंह की पत्नी) के साथ संपर्क किया और उसके खाली कागज पर हस्ताक्षर करवा लिए थे। कुछ दिन बाद उसको सुखदेव सिंह की मौत का सर्टिफिकेट सौंपा गया, जिसमें 8 जुलाई 1993 को उसकी मौत होने का जिक्र किया गया था। परिवार को सूचित किया गया था कि जेल में रिमांड के दौरान सुखदेव सिंह की मौत हो गई और उसकी लाश सुल्लखन सिंह सहित हरीके नहर में फेंक दी गई।
हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया दरवाजा
सुखवंत कौर ने अपने पति और पिता को जबरन उठाने, गैर कानूनी तौर पर हिरासत में रखने और फिर लापता होने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट का रूख किया। नवंबर 1995 में एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को बड़े स्तर पर मृतकों के संस्कार के मामले की जांच करने के निर्देश दिए। मानवीय अधिकार कारकून जसवंत सिंह खालड़ा ने पंजाब पुलिस की ओर से लाशों को लावारिस बताकर संस्कार करने का खुलासा किया था।
सुखवंत कौर ने अपने पति और पिता को जबरन उठाने, गैर कानूनी तौर पर हिरासत में रखने और फिर लापता होने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट का रूख किया। नवंबर 1995 में एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को बड़े स्तर पर मृतकों के संस्कार के मामले की जांच करने के निर्देश दिए। मानवीय अधिकार कारकून जसवंत सिंह खालड़ा ने पंजाब पुलिस की ओर से लाशों को लावारिस बताकर संस्कार करने का खुलासा किया था।
2009 में सीबीआई ने दायर की थी चार्जशीट
पूछताछ में सीबीआई ने 20 नवंबर 1996 को सुखवंत कौर के बयान दर्ज किए और उसके बयान पर 6 मार्च 1997 को एएसआई अवतार सिंह, एसआई सुरिंदरपाल सिंह तत्कालीन एसएचओ सरहाली और अन्य के खिलाफ धारा 364/34 के तहत केस दर्ज किया और वर्ष 2000 में सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट दायर की। इसको सीबीआई कोर्ट पटियाला ने वर्ष 2002 में रद्द कर दिया और अगली जांच के निर्देश दिए। वर्ष 2009 में सीबीआई ने सुरिंदरपाल और अवतार सिंह के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर की। वर्ष 2016 में सीबीआई अदालत पटियाला की ओर से धारा 120बी, 342, 364, 365 के तहत आरोप तय किए गए।
पूछताछ में सीबीआई ने 20 नवंबर 1996 को सुखवंत कौर के बयान दर्ज किए और उसके बयान पर 6 मार्च 1997 को एएसआई अवतार सिंह, एसआई सुरिंदरपाल सिंह तत्कालीन एसएचओ सरहाली और अन्य के खिलाफ धारा 364/34 के तहत केस दर्ज किया और वर्ष 2000 में सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट दायर की। इसको सीबीआई कोर्ट पटियाला ने वर्ष 2002 में रद्द कर दिया और अगली जांच के निर्देश दिए। वर्ष 2009 में सीबीआई ने सुरिंदरपाल और अवतार सिंह के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर की। वर्ष 2016 में सीबीआई अदालत पटियाला की ओर से धारा 120बी, 342, 364, 365 के तहत आरोप तय किए गए।