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Mohali News: फर्जी मुठभेड़ मामले में 31 साल बाद पंजाब के पूर्व डीआईजी व डीएसपी दोषी करार
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मोहाली। सीबीआई की विशेष अदालत ने पंजाब के पूर्व डीआईजी दिलबाग सिंह और सेवानिवृत डीएसपी गुरबचन सिंह को फर्जी मुठभेड़ के 31 साल बाद वीरवार को हत्या का दोषी ठहराया। दोनों आरोपियों को शुक्रवार को सजा सुनाई जाएगी। मामला तरनतारन (अमृतसर) के जंडाला रोड निवासी फल विक्रेता गुलशन कुमार की हत्या से जुड़ा है। आरोपियों के खिलाफ सीबीआई ने 28 फरवरी 1997 को सीबीआई ने आईपीसी की धारा 302, 364, 201, 218, 120बी व 34 के तहत मामला दर्ज किया था।
सीबीआई की ओर से दायर आरोपपत्र के अनुसार, गुलशन कुमार के पिता चमन लाल ने जांच एजेंसी को दिए बयान में बताया था कि 22 जून 1993 की शाम को तरनतारन
के तत्कालीन डीएसपी दिलबाग सिंह (बाद में डीआईजी के पद से सेवानिवृत्त) के नेतृत्व में तरनतारन पुलिस ने उनके बेटे गुलशन को जबरन उठा लिया और 22 जुलाई
1993 को फर्जी मुठभेड़ में उसकी हत्या कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें सूचित किए बिना उनके बेटे के शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
आरोपपत्र के साथ अदालत में पेश सीबीआई की जांच रिपोर्ट से पता चला कि फर्जी मुठभेड़ में हत्या से पहले तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर व तरनतारन (शहर) थाने के एसएचओ गुरबचन सिंह ने गुलशन कुमार को अवैध हिरासत में रखा था। जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 7 मई 1999 को तत्कालीन डीएसपी दिलबाग सिंह, तत्कालीन इंस्पेक्टर गुरबचन सिंह, तत्कालीन एएसआई अर्जुन सिंह, तत्कालीन एएसआई देविंदर सिंह और तत्कालीन एसआई बलबीर सिंह के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था। इनमें
से आरोपी अर्जुन सिंह, देविंदर सिंह और बलबीर सिंह की लंबे समय तक चले मामले की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। मामले में 7 फरवरी 2000 को आरोपियों के
खिलाफ आरोप तय किए गए थे।
वीरवार को सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश राकेश कुमार की अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया। सीबीआई ने कुल 32 गवाहों का हवाला दिया था।मुकदमे के दौरान चश्मदीद गवाहों के ठोस सबूतों से दोनों आरोपी साबित हुए थे और दस्तावेजों से दोषी पुलिस अधिकारियों द्वारा गढ़ी गई कहानी झूठी साबित हुई थी।
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सीबीआई की ओर से दायर आरोपपत्र के अनुसार, गुलशन कुमार के पिता चमन लाल ने जांच एजेंसी को दिए बयान में बताया था कि 22 जून 1993 की शाम को तरनतारन
के तत्कालीन डीएसपी दिलबाग सिंह (बाद में डीआईजी के पद से सेवानिवृत्त) के नेतृत्व में तरनतारन पुलिस ने उनके बेटे गुलशन को जबरन उठा लिया और 22 जुलाई
1993 को फर्जी मुठभेड़ में उसकी हत्या कर दी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें सूचित किए बिना उनके बेटे के शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
आरोपपत्र के साथ अदालत में पेश सीबीआई की जांच रिपोर्ट से पता चला कि फर्जी मुठभेड़ में हत्या से पहले तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर व तरनतारन (शहर) थाने के एसएचओ गुरबचन सिंह ने गुलशन कुमार को अवैध हिरासत में रखा था। जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 7 मई 1999 को तत्कालीन डीएसपी दिलबाग सिंह, तत्कालीन इंस्पेक्टर गुरबचन सिंह, तत्कालीन एएसआई अर्जुन सिंह, तत्कालीन एएसआई देविंदर सिंह और तत्कालीन एसआई बलबीर सिंह के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था। इनमें
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से आरोपी अर्जुन सिंह, देविंदर सिंह और बलबीर सिंह की लंबे समय तक चले मामले की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। मामले में 7 फरवरी 2000 को आरोपियों के
खिलाफ आरोप तय किए गए थे।
वीरवार को सीबीआई की विशेष अदालत के न्यायाधीश राकेश कुमार की अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया। सीबीआई ने कुल 32 गवाहों का हवाला दिया था।मुकदमे के दौरान चश्मदीद गवाहों के ठोस सबूतों से दोनों आरोपी साबित हुए थे और दस्तावेजों से दोषी पुलिस अधिकारियों द्वारा गढ़ी गई कहानी झूठी साबित हुई थी।
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