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विदेशी कोच आया की तरह होते हैं, अपने कोच दादा नानी की तरह है

Tue, 26 May 2020 02:18 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Tue, 26 May 2020 02:18 AM IST
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Foreign coaches are like Aya, their coach is like grandparents
मोहाली। हॉकी लीजेंड बलबीर सिंह खेल और खिलाड़ियों को बहुत ही करीब से समझते थे। उनका मानना था कि हॉकी खिलाड़ी अब बढ़िया प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि जहां तक कोच रखने की बात है तो उसमें भारतीय कोच अच्छी भूमिका निभा सकते हैं। क्योंकि वह गेम्स में दिलचस्पी लेते हैं। विदेशी कोच तो आया की तरह होते हैं। उन्हें सिर्फ अपने पैसे से मतलब होता है। जबकि अपने कोच दादी नानी जैसे होते हैं। वह हरेक चीज को समझते हैं। यह बात ओलंपियन बलबीर सिंह ने मीडिया से उस समय कही थी जब लोकसभा चुनाव से ठीक पहले गृहमंत्री अमित शाह उनसे मिलने आए थे।
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बलबीर सिंह ने कहा था कि उन्होंने सरकार को साफ कहा है कि खेलों को प्रमोट किया जाए। खेलों के जरिए बच्चों को तरक्की मिले। खेलों को पढ़ाई से जोड़ा जाए।
बलबीर सिंह ने बताया था कि जब वह स्पोर्ट्स डायरेक्टर थे तो भी उन्होंने इस बात को समझा था। उन्होंने कहा कि उस समय भी उन्होंने कई तरह की स्कालरशिप शुरू करवाई थी। इसमें जैसे खिलाड़ी का स्तर बढ़ता जाता है, वैसे ही उसकी स्कालरशिप बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने बताया था कि अब जमाना पूरी तरह से बदल गया है। उनके समय में खिलाड़ी रोटी खाकर खेल लेते थे, लेकिन अब डाइट पर फोकस रहता है। यह जरूरी भी है। इस चीज को पैरेंट्स भी समझते हैं।
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