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गत्ता फैक्टरी में आग, करोड़ों का सामान जला
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डेराबस्सी। गांव मुबारिकपुर के पास स्थित एक गत्ते की ट्रे बनाने वाली फैक्टरी में बीती देर रात आग लग गई। आग इतनी भीषण थी कि कुछ ही मिनटों में आग ने फैक्टरी के कई गोदामों व ट्रे तैयार करने वाले प्लांट को अपनी चपेट में ले लिया।
आग इतनी भयानक थी कि उसकी लपेटें देखकर अफरातफरी मच गई। आग पर काबू डालने के लिए डेराबस्सी के दमकल विभाग को सूचना दी गई। डेराबस्सी, लालड़ू, जीरकपुर, पंचकूला, रामगढ़, अंबाला व मोहाली सहित अन्य नजदीकी जगहों से दमकल विभाग की करीब 12 गाड़ियों ने रातभर की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग रात करीब एक बजे लगी और आग से फैक्टरी के गोदाम में पड़े तैयार व कच्चे माल के अलावा अंडे व सेब की ट्रे तैयार करने वाली एक बड़ी मशीन, ट्रैक्टर, ट्रक सहित फैक्टरी का बड़ा हिस्सा जल कर राख हो गया। फैक्टरी प्रबंधकों के मुताबिक आग में करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।
हादसे के समय 51 कर्मी दे रहे थे ड्यूटी
हादसे के वक्त फैक्टरी में दो अलग-अलग मशीनें चल रही थीं। इन पर करीब 36 मजदूर काम कर रहे थे। इसके अलावा 15 अन्य स्टाफ सदस्य फैक्टरी के अंदर मौजूद थे। रात के समय मौके पर मौजूद फैक्टरी के कर्मियों ने गोदाम के अंदर लगी आग को बुझाने का काफी प्रयास किया लेकिन वे नाकाम रहे।
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हादसे के बाद पहुंची पुलिस
आग लगने की सूचना सबसे पहले फायर विभाग को दी गई। इसके बाद इसकी जानकारी पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही डेराबस्सी थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर कुलबीर सिंह, मुबारिकपुर थाना प्रभारी बलवीर सिंह, फायर अफसर बलजीत सिंह सबसे पहले मौके पर पहुंचे।
सूखे गत्ते के कारण आग बुझाने में आई मुश्किल
आग पर काबू डालने के लिए दर्जनों गाड़ियां पानी से भर कर आग बुझाने की कोशिश में सारी रात लगी रही। दमकलकर्मियों की सारी मेहनत खराब जा रही थी क्योंकि भीषण गर्मी में गत्ता पूरी तरह से सूखा हुआ था। इस कारण आग ने एकदम भीषण रूप धारण कर लिया।
गनीमत रही कि डीजल टैंक और पेट्रोल पंप तक नहीं पहुंची आग
फायर अफसर बलजीत सिंह ने कहा कि फैक्टरी के अंदर डीजल रखने के लिए एक टैंक बनाया गया था। इसके अंदर हजारों लीटर डीजल रखा हुआ है। आग उसके पास के गोदाम तक पहुंच चुकी थी। दमकल विभाग के कर्मियों ने समय रहते आग को उस तरफ फैलने से रोक लिया। अगर आग डीजल टैंक तक पहुंचती तो बड़ा धमाका हो सकता था। इसके अलावा फैक्टरी की दीवार से जुड़ा एक पेट्रोल पंप है जहां आग को फैलने से रोका गया। अगर आग वहां पहुंच जाती तो नुकसान का अंदाजा लगाना मुश्किल होता। फैक्टरी में बिजली के अलावा जनरेटर और गैस से भी मशीनरी चलती थी।
फैक्टरी सुरक्षाकर्मियों ने बरती समझदारी
मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि जब उन्होंने आग को फैलते देखा तो सबसे पहले उन्होंने फैक्टरी के अंदर भरे कई गैस सिलेंडरों को बाहर निकाला। साथ ही फैक्टरी के अंदर खड़े 2 ट्रक और कारों को बाहर निकाला गया। अगर आग गैस से भरे सिलेंडर तक पहुंचती तो बड़ा विस्फोट हो सकता था।
बिजली के शार्ट सर्किट से आग लगने की संभावना
फायर अफसर बलजीत सिंह ने कहा कि आग के कारणों की जांच की जा रही है जो अभी स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक जांच में आग बिजली के शार्ट सर्किट के कारण लगने का अंदेशा है।
सुबह तक सुलगती रही आग
फैक्टरी में आग रात को एक बजे तक लगी थी लेकिन पूरी रात की मेहनत के बावजूद फायर कर्मी आग पर काबू डालने में जुटे रहे लेकिन वे नाकामयाब रहे। हालांकि सुबह आग पर कुछ हद तक काबू डाल लिया गया था लेकिन वह रह-रह कर सुलग रही थी। इसलिए मौके पर ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां खड़ी की हुई थीं।
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आग इतनी भयानक थी कि उसकी लपेटें देखकर अफरातफरी मच गई। आग पर काबू डालने के लिए डेराबस्सी के दमकल विभाग को सूचना दी गई। डेराबस्सी, लालड़ू, जीरकपुर, पंचकूला, रामगढ़, अंबाला व मोहाली सहित अन्य नजदीकी जगहों से दमकल विभाग की करीब 12 गाड़ियों ने रातभर की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग रात करीब एक बजे लगी और आग से फैक्टरी के गोदाम में पड़े तैयार व कच्चे माल के अलावा अंडे व सेब की ट्रे तैयार करने वाली एक बड़ी मशीन, ट्रैक्टर, ट्रक सहित फैक्टरी का बड़ा हिस्सा जल कर राख हो गया। फैक्टरी प्रबंधकों के मुताबिक आग में करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।
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हादसे के समय 51 कर्मी दे रहे थे ड्यूटी
हादसे के वक्त फैक्टरी में दो अलग-अलग मशीनें चल रही थीं। इन पर करीब 36 मजदूर काम कर रहे थे। इसके अलावा 15 अन्य स्टाफ सदस्य फैक्टरी के अंदर मौजूद थे। रात के समय मौके पर मौजूद फैक्टरी के कर्मियों ने गोदाम के अंदर लगी आग को बुझाने का काफी प्रयास किया लेकिन वे नाकाम रहे।
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हादसे के बाद पहुंची पुलिस
आग लगने की सूचना सबसे पहले फायर विभाग को दी गई। इसके बाद इसकी जानकारी पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही डेराबस्सी थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर कुलबीर सिंह, मुबारिकपुर थाना प्रभारी बलवीर सिंह, फायर अफसर बलजीत सिंह सबसे पहले मौके पर पहुंचे।
सूखे गत्ते के कारण आग बुझाने में आई मुश्किल
आग पर काबू डालने के लिए दर्जनों गाड़ियां पानी से भर कर आग बुझाने की कोशिश में सारी रात लगी रही। दमकलकर्मियों की सारी मेहनत खराब जा रही थी क्योंकि भीषण गर्मी में गत्ता पूरी तरह से सूखा हुआ था। इस कारण आग ने एकदम भीषण रूप धारण कर लिया।
गनीमत रही कि डीजल टैंक और पेट्रोल पंप तक नहीं पहुंची आग
फायर अफसर बलजीत सिंह ने कहा कि फैक्टरी के अंदर डीजल रखने के लिए एक टैंक बनाया गया था। इसके अंदर हजारों लीटर डीजल रखा हुआ है। आग उसके पास के गोदाम तक पहुंच चुकी थी। दमकल विभाग के कर्मियों ने समय रहते आग को उस तरफ फैलने से रोक लिया। अगर आग डीजल टैंक तक पहुंचती तो बड़ा धमाका हो सकता था। इसके अलावा फैक्टरी की दीवार से जुड़ा एक पेट्रोल पंप है जहां आग को फैलने से रोका गया। अगर आग वहां पहुंच जाती तो नुकसान का अंदाजा लगाना मुश्किल होता। फैक्टरी में बिजली के अलावा जनरेटर और गैस से भी मशीनरी चलती थी।
फैक्टरी सुरक्षाकर्मियों ने बरती समझदारी
मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि जब उन्होंने आग को फैलते देखा तो सबसे पहले उन्होंने फैक्टरी के अंदर भरे कई गैस सिलेंडरों को बाहर निकाला। साथ ही फैक्टरी के अंदर खड़े 2 ट्रक और कारों को बाहर निकाला गया। अगर आग गैस से भरे सिलेंडर तक पहुंचती तो बड़ा विस्फोट हो सकता था।
बिजली के शार्ट सर्किट से आग लगने की संभावना
फायर अफसर बलजीत सिंह ने कहा कि आग के कारणों की जांच की जा रही है जो अभी स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक जांच में आग बिजली के शार्ट सर्किट के कारण लगने का अंदेशा है।
सुबह तक सुलगती रही आग
फैक्टरी में आग रात को एक बजे तक लगी थी लेकिन पूरी रात की मेहनत के बावजूद फायर कर्मी आग पर काबू डालने में जुटे रहे लेकिन वे नाकामयाब रहे। हालांकि सुबह आग पर कुछ हद तक काबू डाल लिया गया था लेकिन वह रह-रह कर सुलग रही थी। इसलिए मौके पर ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां खड़ी की हुई थीं।