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Mohali News: कर्ज के बोझ तले खुदकुशी कर रहे किसान भाइयों के समर्थन में किसानों का मोहाली कूच

Mon, 01 Jun 2026 11:31 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jun 2026 11:31 PM IST
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Farmers march to Mohali in support of their debt-ridden brothers who are committing suicide.
मोहाली। फरीदकोट जिले के गांव हरी नौ में कर्ज के बोझ तले दबे दो सगे किसान भाइयों की आत्महत्या के मामले ने प्रदेशव्यापी किसान आंदोलन का रूप ले लिया है। सोमवार को भारतीय किसान यूनियन डल्लेवाल, सिद्धूपुर और अन्य किसान संगठनों के आह्वान पर पंजाब के विभिन्न जिलों से हजारों किसान मोहाली पहुंचे और पीएडीबी (प्राइमरी एग्रीकल्चर डेवलपमेंट बैंक) और सहकारी बैंकों के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए रजिस्ट्रार कार्यालय का घेराव करने के लिए चंडीगढ़ की ओर कूच किया।
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किसानों ने पहले गुरुद्वारा अंब साहिब में एकत्र होकर सभा की और बाद में वाईपीएस चौक से चंडीगढ़ की तरफ मार्च शुरू किया। हालांकि चंडीगढ़ पुलिस ने जेल रोड के निकट भारी बैरिकेडिंग कर किसानों को रोक लिया। इसके बाद किसानों ने वहीं धरना देकर सरकार और बैंक प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में नौ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को अधिकारियों से बातचीत के लिए चंडीगढ़ जाने की अनुमति दी।
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किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने आरोप लगाया कि किसानों की आत्महत्याएं कोई आम घटनाएं नहीं हैं, बल्कि बढ़ते कर्ज और बैंकिंग व्यवस्था की कथित अनियमितताओं का परिणाम हैं। पिछले ढाई महीने से पंजाब भर में पीएडीबी बैंकों के बाहर धरने जारी हैं और किसानों की शिकायतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
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डल्लेवाल ने आरोप लगाया कि ऋण वितरण के समय किसानों से खाली चेक लिए जाते हैं, जिनका बाद में दुरुपयोग किया जाता है। उन्होंने दावा किया कि कई मामलों में किसान पूरा कर्ज चुकाने के बावजूद खातों से धनराशि कटने की शिकायत कर रहे हैं। कुछ किसानों के पास ऋण समाप्ति के आधिकारिक प्रमाण पत्र होने के बावजूद बाद में उन्हें फर्जी बताया जाता है, जिससे उन्हें कानूनी और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।


किसानों की यह मांग
किसान संगठनों ने मांग की है कि पीएडीबी, लैंड मॉर्गेज और सहकारी बैंकों के कामकाज की सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए। इसके अलावा किसानों के लिए वन टाइम सेटलमेंट योजना लागू की जाए, ऋण के समय लिए गए खाली चेक वापस किए जाएं तथा किसानों पर दर्ज मामले वापिस लिए जाएं। किसान नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा बैंकों के बाहर चल रहे धरनों का दायरा बढ़ाया जाएगा।
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