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Mohali News: गैस की महंगी आंच ने बिगाड़ा चाय का स्वाद, ढाबों पर तंदूरी रोटी से चल रहा काम
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जीरकपुर। गैस सिलिंडर के बढ़ते दाम और किल्लत ने आम लोगों के साथ-साथ ढाबा संचालकों और छोटे होटल कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। महंगी गैस की आंच अब रसोई तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि लोगों के खाने-पीने के स्वाद पर भी असर डाल रही है। शहर में कई ढाबों और छोटे होटलों में काॅमर्शियल गैस सिलिंडर समय पर नहीं मिल पा रहे हैं। इसके चलते जहां पहले तवे पर बनने वाली गर्म-गर्म रोटियां मिलती थीं, वहीं अब ग्राहकों को मजबूरी में तंदूरी रोटी से ही काम चलाना पड़ रहा है। ढाबा संचालकों का कहना है कि गैस की कमी के कारण वे पूरी डिश तैयार नहीं कर पा रहे हैं और सीमित मैन्यू में ही ग्राहकों को खाना परोस रहे हैं।
गैस के बढ़ते दामों का सीधा असर खाने-पीने की चीजों के दाम पर पड़ा है। पहले 60 रुपये में मिलने वाली सिंपल थाली अब 90 रुपये तक पहुंच गई है। इसी तरह 30 रुपये का पराठा अब 40 से 50 रुपये में मिल रहा है। चाय, जो कभी 10 रुपये में आसानी से मिल जाती थी, अब 20 रुपये में बिक रही है।
ढाबा संचालकों का कहना है कि महंगे गैस सिलिंडर के कारण लागत बढ़ गई है, जबकि ग्राहकों की संख्या में भी गिरावट आई है। ऐसे में उन्हें नुकसान से बचने के लिए दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं। वहीं, छोटे स्तर पर खाना बनाने वाले लोग, जैसे ठेला संचालक और चाय बेचने वाले, भी इस स्थिति से काफी प्रभावित हैं।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि बढ़ती महंगाई ने उनकी जेब पर बोझ बढ़ा दिया है। रोजमर्रा की चीजें महंगी होने से अब बाहर खाना और चाय पीना भी सोच-समझकर करना पड़ रहा है। अगर जल्द ही गैस की किल्लत और बढ़ते दामों पर काबू नहीं पाया गया, तो इसका असर और भी गहरा हो सकता है। छोटे कारोबारियों का कहना है कि सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए, ताकि आम लोगों और छोटे व्यापारियों को राहत मिल सके।
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गैस के बढ़ते दामों का सीधा असर खाने-पीने की चीजों के दाम पर पड़ा है। पहले 60 रुपये में मिलने वाली सिंपल थाली अब 90 रुपये तक पहुंच गई है। इसी तरह 30 रुपये का पराठा अब 40 से 50 रुपये में मिल रहा है। चाय, जो कभी 10 रुपये में आसानी से मिल जाती थी, अब 20 रुपये में बिक रही है।
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ढाबा संचालकों का कहना है कि महंगे गैस सिलिंडर के कारण लागत बढ़ गई है, जबकि ग्राहकों की संख्या में भी गिरावट आई है। ऐसे में उन्हें नुकसान से बचने के लिए दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं। वहीं, छोटे स्तर पर खाना बनाने वाले लोग, जैसे ठेला संचालक और चाय बेचने वाले, भी इस स्थिति से काफी प्रभावित हैं।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि बढ़ती महंगाई ने उनकी जेब पर बोझ बढ़ा दिया है। रोजमर्रा की चीजें महंगी होने से अब बाहर खाना और चाय पीना भी सोच-समझकर करना पड़ रहा है। अगर जल्द ही गैस की किल्लत और बढ़ते दामों पर काबू नहीं पाया गया, तो इसका असर और भी गहरा हो सकता है। छोटे कारोबारियों का कहना है कि सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए, ताकि आम लोगों और छोटे व्यापारियों को राहत मिल सके।