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सीबीआई अदालत ने 27 साल पुराने केस में तत्कालीन एसएचओ सबूतों के अभाव में बरी
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मोहाली। सीबीआई की अदालत ने 27 साल पुराने आतंकवाद के दौर से जुड़े मामले में शनिवार को अहम फैसला सुनाया। अदालत ने तरनतारन पुलिस द्वारा घर से उठाए गए एक युवक संबंधी पुलिस के खिलाफ चल रहे केस में तत्कालीन एसएचओ वल्टोहा (जिला तरनतारन) गोविन्द्र सिंह को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
बचाव पक्ष के वकील एडवोकेट शेखर शुक्ला ने बताया कि अदालत में केस की कार्रवाई चली तो बीरा के परिजन पुलिस द्वारा उसे किडनैप किए जाने व उसे लापता करने के आरोपों को सिद्ध नहीं कर सके। न ही कोई ठोस सबूत अदालत में पेश कर सके। गोविन्द्र सिंह जो अब रिटायर हो चुके हैं, इस समय जमानत पर चल रहे थे।
जानकारी के मुताबिक वल्टोहा पुलिस स्टेशन की पुलिस ने दिसंबर 1992 को जिला अमृतसर के गांव डिबीपुरा निवासी युवक बलबीर सिंह बीरा को उठा लिया था। उसके बाद बीरा के जिंदा व मुर्दा होने के बारे में कोई सुराग नहीं लग सका। बीरा के परिजनों ने पुलिस अधिकारियों पर केस दायर करवा दिया था। इस केस की जांच सीबीआई ने की थी। इस दौरान सीबीआई ने 5 मार्च 1997 को वहां के एसएचओ गोविन्द्र सिंह व एक अन्य पुलिस इंस्पेक्टर के खिलाफ आईपीसी की धारा 342, 343, 346, 364, 365, 368, 34 के तहत केस दर्ज किया था। केस की सुनवाई सीबीआई की अदालत में चल रही थी।
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बचाव पक्ष के वकील एडवोकेट शेखर शुक्ला ने बताया कि अदालत में केस की कार्रवाई चली तो बीरा के परिजन पुलिस द्वारा उसे किडनैप किए जाने व उसे लापता करने के आरोपों को सिद्ध नहीं कर सके। न ही कोई ठोस सबूत अदालत में पेश कर सके। गोविन्द्र सिंह जो अब रिटायर हो चुके हैं, इस समय जमानत पर चल रहे थे।
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जानकारी के मुताबिक वल्टोहा पुलिस स्टेशन की पुलिस ने दिसंबर 1992 को जिला अमृतसर के गांव डिबीपुरा निवासी युवक बलबीर सिंह बीरा को उठा लिया था। उसके बाद बीरा के जिंदा व मुर्दा होने के बारे में कोई सुराग नहीं लग सका। बीरा के परिजनों ने पुलिस अधिकारियों पर केस दायर करवा दिया था। इस केस की जांच सीबीआई ने की थी। इस दौरान सीबीआई ने 5 मार्च 1997 को वहां के एसएचओ गोविन्द्र सिंह व एक अन्य पुलिस इंस्पेक्टर के खिलाफ आईपीसी की धारा 342, 343, 346, 364, 365, 368, 34 के तहत केस दर्ज किया था। केस की सुनवाई सीबीआई की अदालत में चल रही थी।
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