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अंग्रेजों के जमाने में भी जमीन उनके नाम पर थी, अब सरकार कर रही है धक्का
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मुल्लांपुर (नयागांव)। सरकार और ग्रामीणों के बीच 3603 एकड़ जमीन को लेकर चल रहे विवाद में नया मोड़ आ गया है। ग्रामीणों ने इस मामले में शुक्रवार को डीसी अमित तलवार से मुलाकात कर उन्हें अपना मांगपत्र सौंपा। साथ ही आजादी से पहले 1942 में हुई एक रजिस्ट्री की कॉपी लगाई है। इसके पीछे उन्होंने तर्क दिया कि आजादी से पहले भी यह जमीन गांव वालों के नाम थी। जबकि सत्ता में आई नई सरकार गांव वालों के साथ धक्केशाही कर रही है। ग्रामीणों ने कहा कि राजस्व विभाग की ओर से एक जून को किए गए फैसले को जल्द से जल्द नहीं बदला गया तो सरकार के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा। वहीं इलाके के ग्रामीणों को भारतीय किसान यूनियन का भी समर्थन मिला है।
एक जून को 30 साल पहले चकबंदी अधिकारी के आदेशों को निरस्त कर एफसीआर द्वारा 3603 एकड़ 3 कनाल 13 मरले जमीन को हिस्सेदारों की मालकिन से हटाकर ग्राम पंचायत के नाम कर दिया था। जिसमें 2172 एकड़ 7 कनाल 1 मरले पहाड़ी जमीन थी, जबकि 499 एकड़ 1 कनाल 10 मरले जमीन नदी नालों की थी। एफसीआर के फैसले के बाद से ही ग्रामीणों की तरफ से उनके इस आदेश का विरोध किया जा रहा है। ग्रामीणों ने शुक्रवार को अपनी इस मांग के लिए डीसी को एक मांग पत्र सौंपा है। मांग पत्र के साथ उन्होंने एक आजादी से पहले 1942 की रजिस्ट्री की कॉपी साथ लगाई है। ग्रामीणों का तर्क है कि अंग्रेजों के जमाने में भी इस जमीन की रजिस्ट्री गांव वालों के नाम होती थी तो, अब सरकार की तरफ से बिना ग्रामीणों का पक्ष सुने यह अंग्रेजी फरमान सुनाया है। जो कि किसी को भी मंजूर नहीं है। सरकार जनता के साथ अंग्रेजों से भी बुरा बर्ताव कर रही है ।अगर सरकार की तरफ से एक जून के फैसले को वापस नहीं लिया गया तो सरकार के खिलाफ जल्द ही बड़ा आंदोलन किया जाएगा। ग्रामीणों के साथ डीसी को मांगपत्र देने किसान नेता परमजीत सिंह वैधवान भी पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि किसी भी किसान के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। सरकार को दोबारा से मामले में सुनवाई करनी चाहिए। अगर ग्रामीणों का जमीन पर हक है तो सरकार को यह फैसला बदलना चाहिए।
युवक ने की सोशल मीडिया पर अपील
इलाके के एक युवक का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इसमें युवक ने अपील की है कि पूरे पंजाब से ग्रामीण उनकी समस्या में उनका साथ दें। उनके बुजुर्गों की तरफ से मेहनत मजदूरी करके यह जमीन हासिल की थी। इस जमीन का छोटा सा टुकड़ा भी सरकार को नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही युवक की तरफ से मीडिया से भी अपील की गई है कि इस जमीन को सरकारी जमीन न बोला जाए।
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सरकार तक पहुंचाएंगे लोगों की मांग
लोगों ने जो मांगपत्र दिया है उसे सरकार तक पहुंचाएंगे। किसी भी फैसले को चुनौती दी जा सकती है, लेकिन मैं एफसीआर के फैसले पर टिप्पणी नहीं कर सकता। -अमित तलवार, डीसी मोहाली
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एक जून को 30 साल पहले चकबंदी अधिकारी के आदेशों को निरस्त कर एफसीआर द्वारा 3603 एकड़ 3 कनाल 13 मरले जमीन को हिस्सेदारों की मालकिन से हटाकर ग्राम पंचायत के नाम कर दिया था। जिसमें 2172 एकड़ 7 कनाल 1 मरले पहाड़ी जमीन थी, जबकि 499 एकड़ 1 कनाल 10 मरले जमीन नदी नालों की थी। एफसीआर के फैसले के बाद से ही ग्रामीणों की तरफ से उनके इस आदेश का विरोध किया जा रहा है। ग्रामीणों ने शुक्रवार को अपनी इस मांग के लिए डीसी को एक मांग पत्र सौंपा है। मांग पत्र के साथ उन्होंने एक आजादी से पहले 1942 की रजिस्ट्री की कॉपी साथ लगाई है। ग्रामीणों का तर्क है कि अंग्रेजों के जमाने में भी इस जमीन की रजिस्ट्री गांव वालों के नाम होती थी तो, अब सरकार की तरफ से बिना ग्रामीणों का पक्ष सुने यह अंग्रेजी फरमान सुनाया है। जो कि किसी को भी मंजूर नहीं है। सरकार जनता के साथ अंग्रेजों से भी बुरा बर्ताव कर रही है ।अगर सरकार की तरफ से एक जून के फैसले को वापस नहीं लिया गया तो सरकार के खिलाफ जल्द ही बड़ा आंदोलन किया जाएगा। ग्रामीणों के साथ डीसी को मांगपत्र देने किसान नेता परमजीत सिंह वैधवान भी पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि किसी भी किसान के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। सरकार को दोबारा से मामले में सुनवाई करनी चाहिए। अगर ग्रामीणों का जमीन पर हक है तो सरकार को यह फैसला बदलना चाहिए।
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युवक ने की सोशल मीडिया पर अपील
इलाके के एक युवक का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इसमें युवक ने अपील की है कि पूरे पंजाब से ग्रामीण उनकी समस्या में उनका साथ दें। उनके बुजुर्गों की तरफ से मेहनत मजदूरी करके यह जमीन हासिल की थी। इस जमीन का छोटा सा टुकड़ा भी सरकार को नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही युवक की तरफ से मीडिया से भी अपील की गई है कि इस जमीन को सरकारी जमीन न बोला जाए।
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सरकार तक पहुंचाएंगे लोगों की मांग
लोगों ने जो मांगपत्र दिया है उसे सरकार तक पहुंचाएंगे। किसी भी फैसले को चुनौती दी जा सकती है, लेकिन मैं एफसीआर के फैसले पर टिप्पणी नहीं कर सकता। -अमित तलवार, डीसी मोहाली