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अंग्रेजों के जमाने से बसे शहर खरड़ में आजादी के बाद भी नहीं बनाया गया अपना बस स्टैंड
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खरड़। नेशनल हाईवे-5, जो कि पहले नेशनल हाईवे-21 था, इस पर अंग्रेजों के जमाने से बसा हुआ है शहर खरड़। संयुक्त पंजाब में अंबाला के बाद इस शहर का ही नाम था, लेकिन आजादी के बाद से यह शहर उपेक्षा का ऐसा शिकार हुआ कि अभी तक इसे अपना बस स्टैंड नसीब नहीं हो पाया। अब से 14 साल पहले 2006 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने यहां मौजूदा नेशनल हाईवे-5 पर बस स्टैंड का नींव पत्थर रखा था, लेकिन यह प्रोजेक्ट उससे आगे नहीं बढ़ पाया और यह नींव पत्थर धरा ही रह गया। परेशान लोग बारिश, सर्दी, तपती धूप में हाईवे पर खड़े होकर बसेें पकड़ने को मजबूर हैं। जब भी चुनाव आते हैं तो इस बस स्टैंड के प्रोजेक्ट पर राजनीति जमकर होती है। नेता ऐसे बड़े-बड़े दावे करते हैं कि मानों बस अब जल्द ही शहर में बस स्टैंड बन जाएगा। लेकिन चुनाव नतीजों के बाद इसे सब भूल जाते हैं।
बता दें कि खरड़ नेशनल हाईवे-5 के दोनों तरफ बसा हुआ है। यह पंजाब का सबसे बड़ा विधानसभा हलका है और खरड़ बस स्टैंड की लोकेशन काफी अहम है। क्योंकि यहां से एक नेशनल हाईवे आगे चंडीगढ़ तो दूसरी तरफ बनूड़ की ओर जाता है।
इस शहर की आबादी तीन लाख से ज्यादा है। यहां पर हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, यूपी, बिहार और जम्मू-कश्मीर के अधिकतर लोग बसे हुए हैं। रोजाना 7-8 हजार लोग उक्त बस स्टैंड की खाली जगह से बसों में सफर करते हैं। लेकिन बस स्टैंड नहीं बना होने के कारण लोगों को भारी दिक्कत उठानी पड़ती है। जिसमें महिलाओं और बुजुर्गों को ज्यादा परेशानी होती है।
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हालात यह हैं कि 14 साल पहले इस बस स्टैंड के प्रोजेक्ट के रखे गए नींव पत्थर के बाद से किसी ने भी काम शुरू नहीं करवाया, जबकि 2006 के बाद से अब तक पंजाब के तीन बार मुख्यमंत्री बदल गए। वहीं, इस प्रोजेक्ट का नींव पत्थर रखने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह मौजूदा समय में भी मुख्यमंत्री हैं, लेकिन जानकारों की मानें तो सरकार बदलने के बाद प्रोजेक्ट राजनीतिक का शिकार हो गया था। इसका शुरू होने वाला काम रुक गया था।
ऐसे लटका प्रोजेक्ट का काम
जानकारी के मुताबिक मई 2006 में बस स्टैंड की योजना बनाई गई थी। परिवहन विभाग, नगर परिषद और ग्रामीण विभाग की ओर से मिलकर इस प्रोजेक्ट में काम किया जाना था। इसे 19 कनाल में बनाया जाना था और सरकार ने इसके निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये भी मंजूर किए थे और 7 सितंबर, 2006 को नींव पत्थर रखा गया था। 2007 में जैसे ही सरकार बदली तो प्रोजेक्ट की किस्मत भी बदल गई और तभी से यह अधर में है। मजबूरी में यहां लो-पार्किंग स्थल, एटीएम कियोस्क बने हैं, जबकि अभी बस स्टैंड के कोई संकेत नहीं हैं। इस प्रोजेक्ट को लेकर कई बैठकें भी हुई। इतना ही नहीं इलाके के लोगों, मुख्यमंत्री की पूर्व ओएसडी लखविंदर कौर गरचा समेत कई लोगों ने इस मामले को उठाया। लेकिन यह प्रोजेक्ट शुरू ही नहीं हो पाया।
बस स्टैंड के नाम पर बने हैं बस क्यू शेल्टर, इनका भी कोई फायदा नहीं
जानकारी के मुुताबिक खरड़ में ट्रैफिक जाम को दूर करने के लिए कुछ समय पहले फ्लाईओवर बनाया गया था। इसके बाद खरड़ बस स्टैंड के प्वाइंट पर सड़क के दोनों तरफ बस क्यू शेल्टर तो बनाए गए हैं, लेकिन लोग इसका फायदा तक नहीं उठा पा रहे हैं। बसें यहां नहीं रुकतीं, इसलिए सवारियां भी यहां खड़ी नहीं होतीं। बसें चौक पर ही रुक जाती हैं। इस वजह से भी लोगों को दिक्कत आ रही है।
क्या कहते हैं विधायक और अन्य पार्टियों के नेता
अब तो सीएम को भी नहीं पता, कहां रख है नींव पत्थर
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने फार्म हाउस में व्यस्त रहते हैं। इतने सालों के बाद उन्हें खुद ही पता नहीं है कि उन्होंने कहां-कहां पर नींव पत्थर रखे हैं। मुख्यमंत्री के रखे गए नींव पत्थर का यह हाल है, तो सरकार के दूसरे नुमाइंदे कैसे काम कर रहे हैं, इसका इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है। हम इस प्रोजेक्ट को लेकर काम करेंगे।
- रंजीत सिंह गिल, अकाली दल के हलका इंचार्ज खरड़
सरकार बनने पर सबसे पहले बनाएंगे बस स्टैंड
मौजूदा सरकार बस स्टैंड का नींव पत्थर रखने तक ही सीमित है। विकास कार्यों का झूठा ढींढोरा पीट रही है। पूरे प्रदेश की जनता बेहाल है। उन्होंने 2022 में आप की सरकार बनने पहले के आधार पर बस स्टैंड बनाया जाएगा।
- परमिंदर सिंह गोल्डी, प्रदेश उप प्रधान युवा विंग, आम आदमी पार्टी
क्या कहते हैं स्थानीय लोग
खरड़ ऐतिहासिक शहर है, सुध ले सरकार
खरड़ का संबंध भगवान श्रीराम से भी जुड़ा माना जाता है और महाभारत काल का इस इलाके से नाता है। पूरा खरड़ हलका ऐतिहासिक है। लेकिन बस स्टैंड न होने के कारण इससे शहर की सुंदरता पर असर पड़ता है। लोग परेशानी उठाते हैं। पहल के आधार पर बस स्टैंड बनाया जाना चाहिए।
- अमन, स्थानीय निवासी
खरड़ है पंजाब का प्रवेश द्वार
खरड़ पंजाब का प्रवेेश द्वार है। यहां पर पंजाब की सबसे बड़ी अनाज मंडी है। एक समय था, जब लोग पूरे उत्तरी भारत में यहां से सामान लेेकर जाते थे। लेकिन शहर में अभी तक बस स्टैंड न बन पाना दुर्भाग्य पूूर्ण है। सरकार को इस दिशा में सोचना चाहिए।
- अनिल आनंद, स्थानीय निवासी
नोट -- विधायक कंवर संधू और कांग्रेस से जगमोहन सिंह कंग का कोट अभी आना बाकी है।
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बता दें कि खरड़ नेशनल हाईवे-5 के दोनों तरफ बसा हुआ है। यह पंजाब का सबसे बड़ा विधानसभा हलका है और खरड़ बस स्टैंड की लोकेशन काफी अहम है। क्योंकि यहां से एक नेशनल हाईवे आगे चंडीगढ़ तो दूसरी तरफ बनूड़ की ओर जाता है।
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इस शहर की आबादी तीन लाख से ज्यादा है। यहां पर हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, यूपी, बिहार और जम्मू-कश्मीर के अधिकतर लोग बसे हुए हैं। रोजाना 7-8 हजार लोग उक्त बस स्टैंड की खाली जगह से बसों में सफर करते हैं। लेकिन बस स्टैंड नहीं बना होने के कारण लोगों को भारी दिक्कत उठानी पड़ती है। जिसमें महिलाओं और बुजुर्गों को ज्यादा परेशानी होती है।
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हालात यह हैं कि 14 साल पहले इस बस स्टैंड के प्रोजेक्ट के रखे गए नींव पत्थर के बाद से किसी ने भी काम शुरू नहीं करवाया, जबकि 2006 के बाद से अब तक पंजाब के तीन बार मुख्यमंत्री बदल गए। वहीं, इस प्रोजेक्ट का नींव पत्थर रखने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह मौजूदा समय में भी मुख्यमंत्री हैं, लेकिन जानकारों की मानें तो सरकार बदलने के बाद प्रोजेक्ट राजनीतिक का शिकार हो गया था। इसका शुरू होने वाला काम रुक गया था।
ऐसे लटका प्रोजेक्ट का काम
जानकारी के मुताबिक मई 2006 में बस स्टैंड की योजना बनाई गई थी। परिवहन विभाग, नगर परिषद और ग्रामीण विभाग की ओर से मिलकर इस प्रोजेक्ट में काम किया जाना था। इसे 19 कनाल में बनाया जाना था और सरकार ने इसके निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये भी मंजूर किए थे और 7 सितंबर, 2006 को नींव पत्थर रखा गया था। 2007 में जैसे ही सरकार बदली तो प्रोजेक्ट की किस्मत भी बदल गई और तभी से यह अधर में है। मजबूरी में यहां लो-पार्किंग स्थल, एटीएम कियोस्क बने हैं, जबकि अभी बस स्टैंड के कोई संकेत नहीं हैं। इस प्रोजेक्ट को लेकर कई बैठकें भी हुई। इतना ही नहीं इलाके के लोगों, मुख्यमंत्री की पूर्व ओएसडी लखविंदर कौर गरचा समेत कई लोगों ने इस मामले को उठाया। लेकिन यह प्रोजेक्ट शुरू ही नहीं हो पाया।
बस स्टैंड के नाम पर बने हैं बस क्यू शेल्टर, इनका भी कोई फायदा नहीं
जानकारी के मुुताबिक खरड़ में ट्रैफिक जाम को दूर करने के लिए कुछ समय पहले फ्लाईओवर बनाया गया था। इसके बाद खरड़ बस स्टैंड के प्वाइंट पर सड़क के दोनों तरफ बस क्यू शेल्टर तो बनाए गए हैं, लेकिन लोग इसका फायदा तक नहीं उठा पा रहे हैं। बसें यहां नहीं रुकतीं, इसलिए सवारियां भी यहां खड़ी नहीं होतीं। बसें चौक पर ही रुक जाती हैं। इस वजह से भी लोगों को दिक्कत आ रही है।
क्या कहते हैं विधायक और अन्य पार्टियों के नेता
अब तो सीएम को भी नहीं पता, कहां रख है नींव पत्थर
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह अपने फार्म हाउस में व्यस्त रहते हैं। इतने सालों के बाद उन्हें खुद ही पता नहीं है कि उन्होंने कहां-कहां पर नींव पत्थर रखे हैं। मुख्यमंत्री के रखे गए नींव पत्थर का यह हाल है, तो सरकार के दूसरे नुमाइंदे कैसे काम कर रहे हैं, इसका इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है। हम इस प्रोजेक्ट को लेकर काम करेंगे।
- रंजीत सिंह गिल, अकाली दल के हलका इंचार्ज खरड़
सरकार बनने पर सबसे पहले बनाएंगे बस स्टैंड
मौजूदा सरकार बस स्टैंड का नींव पत्थर रखने तक ही सीमित है। विकास कार्यों का झूठा ढींढोरा पीट रही है। पूरे प्रदेश की जनता बेहाल है। उन्होंने 2022 में आप की सरकार बनने पहले के आधार पर बस स्टैंड बनाया जाएगा।
- परमिंदर सिंह गोल्डी, प्रदेश उप प्रधान युवा विंग, आम आदमी पार्टी
क्या कहते हैं स्थानीय लोग
खरड़ ऐतिहासिक शहर है, सुध ले सरकार
खरड़ का संबंध भगवान श्रीराम से भी जुड़ा माना जाता है और महाभारत काल का इस इलाके से नाता है। पूरा खरड़ हलका ऐतिहासिक है। लेकिन बस स्टैंड न होने के कारण इससे शहर की सुंदरता पर असर पड़ता है। लोग परेशानी उठाते हैं। पहल के आधार पर बस स्टैंड बनाया जाना चाहिए।
- अमन, स्थानीय निवासी
खरड़ है पंजाब का प्रवेश द्वार
खरड़ पंजाब का प्रवेेश द्वार है। यहां पर पंजाब की सबसे बड़ी अनाज मंडी है। एक समय था, जब लोग पूरे उत्तरी भारत में यहां से सामान लेेकर जाते थे। लेकिन शहर में अभी तक बस स्टैंड न बन पाना दुर्भाग्य पूूर्ण है। सरकार को इस दिशा में सोचना चाहिए।
- अनिल आनंद, स्थानीय निवासी
नोट -- विधायक कंवर संधू और कांग्रेस से जगमोहन सिंह कंग का कोट अभी आना बाकी है।