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शिक्षा विभाग निजी स्कूलों की फीसों की करेगा जांच
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मोहाली। जिले के निजी स्कूलों पर आखिर शिक्षा विभाग ने शिकंजा कस दिया है। फीसों और वर्दियों के नाम पर स्कूलों द्वारा परिजनों की जा रही लूट की सच्चाई एक हफ्ते में सामने आ जाएगी। इस संबंधी शिक्षा विभाग ने 18 सदस्यीय कमेटी गठित की गई। इसमें स्कूल प्रिंसिपल व हेड मास्टर शामिल हैं। ये टीमें जांच के बाद अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंपेंगी। इसके बाद विभाग द्वारा आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस संबंधी आदेश को तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया हैं।
जिले में कुल 419 निजी स्कूल चल रहे हैं। अकसर अभिभावकों की शिकायतें विभाग को मिलती थीं कि स्कूल फीसों के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे हैं। इतना ही नहीं तय समय फीस न भरने वाले को भी जरा सी भी छूट नहीं देते हैं। दूसरी तरफ कुछ समय पहले राज्य की सत्ता पर काबिज हुई आम आदमी पार्टी ने सभी निजी स्कूलों को हिदायत दी थी कि वे अपनी फीसों में बढ़ोतरी न करे। उनकी तरफ से पहले इस मामले की पड़ताल की जाएगी। इसके बाद आगे की प्रक्रिया चलेगी। हालांकि इससे एक बात साफ हो गई है कि शिक्षा विभाग के पास इस संबंधी कोई जानकारी नहीं थी कि फीस किस हिसाब से वसूली जा रही है।
अब विभाग द्वारा स्कूलों को भेजे गए प्रोफार्मे में पहले स्कूल का नाम और किस बोर्ड से संबंधित है, उसकी डिटेल देनी होगी। स्कूल कौन-सी कक्षा तक पढ़ाता है। साथ ही कक्षावाइज ट्यूूशन फीस, सालाना फंड, एडमिशन फीस बतानी होगी। यह सत्र 2021-22 और 2022 -23 के बारे में बताना होगा। इसके साथ ही यह भी बताना होगा कि पिछले साल की तुलना में कितने फीसदी फीस बढ़ाई है।
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कितने साल बाद बदला सिलेबस और वर्दियां
इसके साथ स्कूलों को प्रोफार्मे में यह भी बताना होगा कि वर्दियां किसी स्पेशल दुकान या स्कूल से खरीदी जाती है। कितने वर्षों के बाद वर्दी बदली जाती है। किताबें किसी स्पेशल दुकान से खरीदी जाती है और कितने साल बाद सिलेबस बदला जाता है। सेफ वाहन पॉलिसी अधीन कमेटी बनी हुई है। साथ ही क्या वह पूरी तरह से लागू है। इस संबंधी जानकारी भी देनी होगी।
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जिले में कुल 419 निजी स्कूल चल रहे हैं। अकसर अभिभावकों की शिकायतें विभाग को मिलती थीं कि स्कूल फीसों के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे हैं। इतना ही नहीं तय समय फीस न भरने वाले को भी जरा सी भी छूट नहीं देते हैं। दूसरी तरफ कुछ समय पहले राज्य की सत्ता पर काबिज हुई आम आदमी पार्टी ने सभी निजी स्कूलों को हिदायत दी थी कि वे अपनी फीसों में बढ़ोतरी न करे। उनकी तरफ से पहले इस मामले की पड़ताल की जाएगी। इसके बाद आगे की प्रक्रिया चलेगी। हालांकि इससे एक बात साफ हो गई है कि शिक्षा विभाग के पास इस संबंधी कोई जानकारी नहीं थी कि फीस किस हिसाब से वसूली जा रही है।
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अब विभाग द्वारा स्कूलों को भेजे गए प्रोफार्मे में पहले स्कूल का नाम और किस बोर्ड से संबंधित है, उसकी डिटेल देनी होगी। स्कूल कौन-सी कक्षा तक पढ़ाता है। साथ ही कक्षावाइज ट्यूूशन फीस, सालाना फंड, एडमिशन फीस बतानी होगी। यह सत्र 2021-22 और 2022 -23 के बारे में बताना होगा। इसके साथ ही यह भी बताना होगा कि पिछले साल की तुलना में कितने फीसदी फीस बढ़ाई है।
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कितने साल बाद बदला सिलेबस और वर्दियां
इसके साथ स्कूलों को प्रोफार्मे में यह भी बताना होगा कि वर्दियां किसी स्पेशल दुकान या स्कूल से खरीदी जाती है। कितने वर्षों के बाद वर्दी बदली जाती है। किताबें किसी स्पेशल दुकान से खरीदी जाती है और कितने साल बाद सिलेबस बदला जाता है। सेफ वाहन पॉलिसी अधीन कमेटी बनी हुई है। साथ ही क्या वह पूरी तरह से लागू है। इस संबंधी जानकारी भी देनी होगी।