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जीरकपुर में खनन का खेल :
Updated Thu, 15 Jun 2017 07:39 PM IST
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पुलिस की सांठगांठ से चल रहा है खनन का गोरखधंधा
-पुलिस के आने से पहले मिल जाती है सूचना
-अब रात में नहीं, बल्कि दिनदहाड़े जमीन से उठा रहे रेत और ग्रेवल्स
-सेक्टर-23 और 24 पंचकूला के रास्तों से मशीनें लेकर भाग गए माफिया
अश्वनी कुमार
जीरकपुर।
खनन माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि वह अब रात के अंधेरे में नहीं बल्कि दिनदहाड़े अपने गोरखधंधे को अंजाम दे रहे हैं। साथ ही पुलिस विभाग में उनके संपर्क इतने मजबूत हैं कि पुलिस के आने के पहले ही उनको सूचना मिल जाती है। इसके बाद पुलिस महज खानापूर्ति करके चली जाती और खनन माफिया अपने रेत और ग्रेवल्स से भरे वाहन लेकर आराम से निकल जाते हैं। इसके बाद पुलिस महज जांच की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ लेती है। ऐसा ही बुधवार को भी देखने को मिला। जब बुधवार दोपहर करीब 12 बजे सेक्टर-23 और 24 पंचकूला के रास्तों से पोकलेन, जेसीबी और भारी संख्या में टिप्परों की एक टीम गांव किशनपुरा के पिछली ओर स्थित गोल्डन फोरेस्ट की जमीन पर पहुंच गई। कुछ ही घंटों में पोकलेन मशीनों से कई फुट नीचे तक जमीन खोद दी। इसके बाद जेसीबी ने ग्रेवल्स के साथ रेत उठाया और टिप्परों में भरना शुरू कर दिया। गांव सनोली स्थित हनुमान मंदिर से गुजर रहे एक राहगीर ने ग्रेवल्स से भरे टिप्परों को जाते हुए देखा तो उसने पुलिस को सूचना दी।
पुलिस रेत माफिया को भागने का देती है पूरा मौका
राहगीर ने पुलिस दोपहर डेढ़ बजे सूचना दी थी। लेकिन कितनी गंभीर है इसका अंदाजा इस बात से लगाय जा सकता है कि वह तीन बजे मौके पर पहुंची। वह भी गांव नगला में बनी चर्च के पास। जबकि अवैध माइनिंग का गोरखधंधा गांव किशनपुरा के पिछली तरफ बीड़ पीरमुछल्ला में स्थित गोल्डन फोरेस्ट की 50 एकड़ जमीन के अंदर चल रहा था। पुलिस की लापरवाही का फायदा उठाकर रेत माफिया से जुड़े लोग बड़े आराम से अपने सामान सहित निकल गए।
पेड़ और पानी की मोटर के चारों तरफ कर दी खुदाई
खनन माफिया ने पोकलेन मशीनों से पेड़ और पानी की मोटर के क्षेत्र को छोड़कर उसके आसपास 20 से 25 फुट नीचे तक खुदाई करके ग्रेवल्स निकाल लिए है। इसके अलावा एक गोल्डन फोरेस्ट की जमीन पर एक कमरा बना है, जिसके चारों तरफ भी पोकलेन मशीनों ने खुदाई कर दी है।
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अवैध माइनिंग जीरकपुर में, एसडीएम की कार्रवाई डेराबस्सी में
बुधवार को रेत माफिया एक ओर जीरकपुर में अवैध माइनिंग कर रहे थे तो दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारी डेराबस्सी में ट्रॉलियों को जब्त करके वाहवाही लूट रहे थे। बता दें कि पुलिस विभाग खुद को रेत माफिया से अलग होने का दावा करता रहता है। लेकिन असल मायनों में रेत माफिया पुलिस विभाग के आलाधिकारियों की मदद से ही अवैध खनन को सरेआम अंजाम दे रहे हैं।
कोट्स :::::
सूचना मिली थी पर मैं डेराबस्सी था : एसडीएम
बुधवार को अवैध माइनिंग के खिलाफ एक मुहिम चलाकर 5 ट्रॉलियां गांव भांखरपुर और एक ट्रॉली को बाकरपुर से कब्जे में ली है। इनके पास माइनिंग से जुड़े कार्यों को लेकर मंजूरियां नहीं थीं। इसके बाद इनको कब्जे में लेकर डेराबस्सी पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करवा दी है। जब जीरकपुर में अवैध माइनिंग के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सूचना मिल गई थी, लेकिन उस समय डेराबस्सी था। इसलिए जीरकपुर पुलिस के थाना प्रभारी को आदेश देकर जांच करने के लिए कह दिया था।
-परमदीप सिंह, एसडीएम, डेराबस्सी।
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-पुलिस के आने से पहले मिल जाती है सूचना
-अब रात में नहीं, बल्कि दिनदहाड़े जमीन से उठा रहे रेत और ग्रेवल्स
-सेक्टर-23 और 24 पंचकूला के रास्तों से मशीनें लेकर भाग गए माफिया
अश्वनी कुमार
जीरकपुर।
खनन माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि वह अब रात के अंधेरे में नहीं बल्कि दिनदहाड़े अपने गोरखधंधे को अंजाम दे रहे हैं। साथ ही पुलिस विभाग में उनके संपर्क इतने मजबूत हैं कि पुलिस के आने के पहले ही उनको सूचना मिल जाती है। इसके बाद पुलिस महज खानापूर्ति करके चली जाती और खनन माफिया अपने रेत और ग्रेवल्स से भरे वाहन लेकर आराम से निकल जाते हैं। इसके बाद पुलिस महज जांच की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ लेती है। ऐसा ही बुधवार को भी देखने को मिला। जब बुधवार दोपहर करीब 12 बजे सेक्टर-23 और 24 पंचकूला के रास्तों से पोकलेन, जेसीबी और भारी संख्या में टिप्परों की एक टीम गांव किशनपुरा के पिछली ओर स्थित गोल्डन फोरेस्ट की जमीन पर पहुंच गई। कुछ ही घंटों में पोकलेन मशीनों से कई फुट नीचे तक जमीन खोद दी। इसके बाद जेसीबी ने ग्रेवल्स के साथ रेत उठाया और टिप्परों में भरना शुरू कर दिया। गांव सनोली स्थित हनुमान मंदिर से गुजर रहे एक राहगीर ने ग्रेवल्स से भरे टिप्परों को जाते हुए देखा तो उसने पुलिस को सूचना दी।
पुलिस रेत माफिया को भागने का देती है पूरा मौका
राहगीर ने पुलिस दोपहर डेढ़ बजे सूचना दी थी। लेकिन कितनी गंभीर है इसका अंदाजा इस बात से लगाय जा सकता है कि वह तीन बजे मौके पर पहुंची। वह भी गांव नगला में बनी चर्च के पास। जबकि अवैध माइनिंग का गोरखधंधा गांव किशनपुरा के पिछली तरफ बीड़ पीरमुछल्ला में स्थित गोल्डन फोरेस्ट की 50 एकड़ जमीन के अंदर चल रहा था। पुलिस की लापरवाही का फायदा उठाकर रेत माफिया से जुड़े लोग बड़े आराम से अपने सामान सहित निकल गए।
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पेड़ और पानी की मोटर के चारों तरफ कर दी खुदाई
खनन माफिया ने पोकलेन मशीनों से पेड़ और पानी की मोटर के क्षेत्र को छोड़कर उसके आसपास 20 से 25 फुट नीचे तक खुदाई करके ग्रेवल्स निकाल लिए है। इसके अलावा एक गोल्डन फोरेस्ट की जमीन पर एक कमरा बना है, जिसके चारों तरफ भी पोकलेन मशीनों ने खुदाई कर दी है।
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अवैध माइनिंग जीरकपुर में, एसडीएम की कार्रवाई डेराबस्सी में
बुधवार को रेत माफिया एक ओर जीरकपुर में अवैध माइनिंग कर रहे थे तो दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारी डेराबस्सी में ट्रॉलियों को जब्त करके वाहवाही लूट रहे थे। बता दें कि पुलिस विभाग खुद को रेत माफिया से अलग होने का दावा करता रहता है। लेकिन असल मायनों में रेत माफिया पुलिस विभाग के आलाधिकारियों की मदद से ही अवैध खनन को सरेआम अंजाम दे रहे हैं।
कोट्स :::::
सूचना मिली थी पर मैं डेराबस्सी था : एसडीएम
बुधवार को अवैध माइनिंग के खिलाफ एक मुहिम चलाकर 5 ट्रॉलियां गांव भांखरपुर और एक ट्रॉली को बाकरपुर से कब्जे में ली है। इनके पास माइनिंग से जुड़े कार्यों को लेकर मंजूरियां नहीं थीं। इसके बाद इनको कब्जे में लेकर डेराबस्सी पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करवा दी है। जब जीरकपुर में अवैध माइनिंग के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सूचना मिल गई थी, लेकिन उस समय डेराबस्सी था। इसलिए जीरकपुर पुलिस के थाना प्रभारी को आदेश देकर जांच करने के लिए कह दिया था।
-परमदीप सिंह, एसडीएम, डेराबस्सी।