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जिले मोहाली में दोगुने हुए कोयले के दाम, भट्ठा मालिकों ने बंद कीं ईंटें बनानी
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मोहाली। जिले की भट्ठा मालिक एसोसिएशन के सदस्यों ने सोमवार को एक बैठक आयोजित कर कोयले के लगातार बढ़ रहे दामों को लेकर चर्चा की। इस मौके पर एसोसिएशन के सदस्यों ने कोयले के दोगुने हुए दामों का विरोध करते हुए सर्वसम्मति से ईंटें बनानी बंद करने के लिए अपने भट्ठों को बंद करने का फैसला लिया और इसे सोमवार की आधी रात से लागू कर दिया है।
बता दें कि बीते कुछ महीनों से केंद्र सरकार की ओर से कोयले के दामों में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है। इससे कोयले के दाम दोगुने हो गए हैं और इसका असर यह हुआ कि ईंटें बनाने में कोयले की खपत के चलते भट्ठा मालिकों को मजबूरन की ईंटों के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं। जिससे ईंटों की बिक्री पर सीधा असर पड़ रहा है।
सोमवार सुबह 11 बजे आयोजित इस बैठक में भट्ठा मालिक एसोसिएशन के प्रधान कुलदीप सिंह मक्कड़ ने अध्यक्षता की। इस बैठक में लालड़ू, डेराबस्सी, जीरकपुर, खरड़, कुराली, नयागांव में काम करने वाले भट्ठा मालिक शामिल हुए। इस बैठक के दौरान भट्ठा मालिक की ओर से कोयले के लगातार बढ़ते दामों को लेकर चर्चा की गई और सदस्यों की और से सुझाव भी दिए गए। इस बैठक में एसोसिएशन के प्रधान कुलदीप सिंह मक्कड़ ने बताया कि कोयले के बढ़ते दामों की वजह से भट्ठा मालिकों को ईंटों के दाम बढ़ाने के लिए मजबूर कर दिया है। आलम यह है कि दो महीनों से प्रति हजार ईंट के दाम जो साढ़े 5 हजार रुपये थे, वो आज 6200 रुपये प्रति हजार हो चुके हैं।
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वहीं, दूसरी ओर, ईंट के दाम बढ़ने के बाद मार्केट के अंदर खरीददारों की कमी भी देखने को मिलने लगी है। सोमवार को हुई बैठक के बाद एसोसिएशन के सभी सदस्यों की सहमति से 30 नवंबर तक भट्ठों को पूर्ण रूप से बंद रखने का फैसला लिया गया है। अगर सरकार ने उनकी मांग पर गौर नहीं किया तो आगे की योजना पर फैसला लिया जाएगा।
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बता दें कि बीते कुछ महीनों से केंद्र सरकार की ओर से कोयले के दामों में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है। इससे कोयले के दाम दोगुने हो गए हैं और इसका असर यह हुआ कि ईंटें बनाने में कोयले की खपत के चलते भट्ठा मालिकों को मजबूरन की ईंटों के दाम बढ़ाने पड़ रहे हैं। जिससे ईंटों की बिक्री पर सीधा असर पड़ रहा है।
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सोमवार सुबह 11 बजे आयोजित इस बैठक में भट्ठा मालिक एसोसिएशन के प्रधान कुलदीप सिंह मक्कड़ ने अध्यक्षता की। इस बैठक में लालड़ू, डेराबस्सी, जीरकपुर, खरड़, कुराली, नयागांव में काम करने वाले भट्ठा मालिक शामिल हुए। इस बैठक के दौरान भट्ठा मालिक की ओर से कोयले के लगातार बढ़ते दामों को लेकर चर्चा की गई और सदस्यों की और से सुझाव भी दिए गए। इस बैठक में एसोसिएशन के प्रधान कुलदीप सिंह मक्कड़ ने बताया कि कोयले के बढ़ते दामों की वजह से भट्ठा मालिकों को ईंटों के दाम बढ़ाने के लिए मजबूर कर दिया है। आलम यह है कि दो महीनों से प्रति हजार ईंट के दाम जो साढ़े 5 हजार रुपये थे, वो आज 6200 रुपये प्रति हजार हो चुके हैं।
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वहीं, दूसरी ओर, ईंट के दाम बढ़ने के बाद मार्केट के अंदर खरीददारों की कमी भी देखने को मिलने लगी है। सोमवार को हुई बैठक के बाद एसोसिएशन के सभी सदस्यों की सहमति से 30 नवंबर तक भट्ठों को पूर्ण रूप से बंद रखने का फैसला लिया गया है। अगर सरकार ने उनकी मांग पर गौर नहीं किया तो आगे की योजना पर फैसला लिया जाएगा।