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Mohali News: दिन में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे, रात को आपात सेवाओं को लग जाता है ताला
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मोहाली। फेज-6 सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत पंजाब सरकार के बड़े-बड़े दावों पर सवाल खड़े कर रही है। दिन में आधुनिक सुविधाओं और बेहतर इलाज के दावे किए जाते हैं, लेकिन रात होते ही ये दावे हवा हो जाते हैं। रात के समय अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों और तीमारदारों को भारी परेशानी का सामान करना पड़ता है। रविवार रात दस बजे संवाद प्रतिनिधि ने सरकारी अस्पताल और एम्स की पड़ताल की तो हालात बदतर नजर आए। रात के समय अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध ही नहीं रहती। आपात स्थिति में पहुंचे मरीजों को या तो सुबह तक इंतजार करना पड़ता है या फिर मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।
यही हाल इंडोस्कोपी व कलोनोस्कोपी कक्ष का है। वहां रात होते ही ताला लग जाता है। गंभीर पेट दर्द या अन्य आपात समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के लिए हालात पीड़ादायक है। पंजाब सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन मोहाली के इस अस्पताल की रात की स्थिति उन दावों की पोल खोल रही है। सवाल यह है कि जब सबसे ज्यादा जरूरत रात के समय होती है, तब सुविधाएं क्यों ठप हो जाती हैं। मरीजों का दर्द और परिजनों की बेबसी इस बात की गवाही दे रही है कि सुधार केवल कागजों तक सीमित है। संवाद
जच्चा-बच्चा केंद्र में सुविधाओं की अनदेखी
जच्चा-बच्चा केंद्र की हालत भी चिंताजनक है। यहां मरीजों के परिजनों के बैठने के लिए रखी गई बैंचें टूटी पड़ी हैं। रातभर जागकर इलाज का इंतजार करने वाले परिजनों को जमीन पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इतना ही नहीं इसी केंद्र की सीढि़यों के पास खुली बिजली की तार हादसों को न्योता दे रही है। अंधेरे में यह खतरा और भी बढ़ जाता है, इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
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पार्किंग में सालों से खड़ी कंडम एंबुलेंस
अस्पताल परिसर की पार्किंग में कई सालों से खड़ी कंडम एंबुलेंस भी परेशानी का सबब बनी हुई है। यह न केवल जगह घेर रही है, बल्कि यह सवाल भी उठाती हैं कि आखिर आपात सेवाओं के नाम पर खड़ी की गई एंबुलेंसों का उपयोग क्यों नहीं हो रहा।
रात में ब्लड सैंपल, रिपोर्ट सुबह
लैब सेवाओं की स्थिति भी निराशाजनक है। रात के समय जब ब्लड सैंपल देने और रिपोर्ट के बारे में पूछा गया, तो जवाब मिला कि सैंपल तो ले लिए जाएंगे, लेकिन रिपोर्ट सुबह ही मिलेगी। अगर तुरंत रिपोर्ट चाहिए तो बाहर से टेस्ट करवाना पड़ेगा। यह जवाब सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की असल तस्वीर सामने रखता है।
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यही हाल इंडोस्कोपी व कलोनोस्कोपी कक्ष का है। वहां रात होते ही ताला लग जाता है। गंभीर पेट दर्द या अन्य आपात समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के लिए हालात पीड़ादायक है। पंजाब सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन मोहाली के इस अस्पताल की रात की स्थिति उन दावों की पोल खोल रही है। सवाल यह है कि जब सबसे ज्यादा जरूरत रात के समय होती है, तब सुविधाएं क्यों ठप हो जाती हैं। मरीजों का दर्द और परिजनों की बेबसी इस बात की गवाही दे रही है कि सुधार केवल कागजों तक सीमित है। संवाद
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जच्चा-बच्चा केंद्र में सुविधाओं की अनदेखी
जच्चा-बच्चा केंद्र की हालत भी चिंताजनक है। यहां मरीजों के परिजनों के बैठने के लिए रखी गई बैंचें टूटी पड़ी हैं। रातभर जागकर इलाज का इंतजार करने वाले परिजनों को जमीन पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इतना ही नहीं इसी केंद्र की सीढि़यों के पास खुली बिजली की तार हादसों को न्योता दे रही है। अंधेरे में यह खतरा और भी बढ़ जाता है, इससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
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पार्किंग में सालों से खड़ी कंडम एंबुलेंस
अस्पताल परिसर की पार्किंग में कई सालों से खड़ी कंडम एंबुलेंस भी परेशानी का सबब बनी हुई है। यह न केवल जगह घेर रही है, बल्कि यह सवाल भी उठाती हैं कि आखिर आपात सेवाओं के नाम पर खड़ी की गई एंबुलेंसों का उपयोग क्यों नहीं हो रहा।
रात में ब्लड सैंपल, रिपोर्ट सुबह
लैब सेवाओं की स्थिति भी निराशाजनक है। रात के समय जब ब्लड सैंपल देने और रिपोर्ट के बारे में पूछा गया, तो जवाब मिला कि सैंपल तो ले लिए जाएंगे, लेकिन रिपोर्ट सुबह ही मिलेगी। अगर तुरंत रिपोर्ट चाहिए तो बाहर से टेस्ट करवाना पड़ेगा। यह जवाब सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की असल तस्वीर सामने रखता है।