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Mohali News: चेक बाउंस मामले में साबित नहीं हुए आरोप, बरी
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चेक बाउंस मामले में साबित नहीं हुए आरोप, बरी
ट्रायल कोर्ट ने जुर्माने समेत 48 लाख रुपये हर्जाना देने का दिया था आदेश
जिला अदालत ने ट्रायल कोर्ट का फैसला बदला, 24 लाख के चेक बाउंस का था आरोप
माई सिटी रिपोर्ट
मोहाली। अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में आरोप साबित न होने पर आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया है। जिला अदालत ने ट्रायल कोर्ट की ओर से सुनाए गए सजा के फैसले को निरस्त करने का आदेश देते हुए आरोपी परवीन ओबरॉय को बरी कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक ट्रायल कोर्ट ने फेज-11 निवासी रंजन गल्होत्रा की शिकायत पर आरोपी को छह महीने की सजा के साथ 24 लाख रुपये के चेक की दोगुना कीमत (48 लाख रुपये) देने का फैसला सुनाया था। इसके चलते आरोपी ने ट्रायल कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ मोहाली के एडिशनल सेशंस जज में अपील दायर की थी।
आरोपी के वकील जतिन कुमार सैनी ने बताया कि शिकायतकर्ता ने आरोपी का ब्लैंक साइन किए चेक का गलत इस्तेमाल किया था। इसके अलावा शिकायतकर्ता ने ट्रायल कोर्ट में दी गवाही में कहा था कि उसे चेक बाउंस का मेमो 16 दिसंबर, 2018 को प्राप्त हुआ था। लेकिन आरोपी के बैंक की ओर से जारी किया गया चेक बाउंस मेमो में स्पष्ट हुआ कि वह 9 दिसंबर, 2018 को जारी किया गया था। वहीं, शिकायतकर्ता की ओर से ऐसा कोई साक्ष्य पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित होता हो कि चेक बाउंस का मेमो 16 दिसंबर, 2018 को प्राप्त हुआ हो। इन सभी साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने ट्रायल कोर्ट का फैसला बदल उक्त आरोपी को बरी कर दिया।
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ट्रायल कोर्ट ने जुर्माने समेत 48 लाख रुपये हर्जाना देने का दिया था आदेश
जिला अदालत ने ट्रायल कोर्ट का फैसला बदला, 24 लाख के चेक बाउंस का था आरोप
माई सिटी रिपोर्ट
मोहाली। अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में आरोप साबित न होने पर आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया है। जिला अदालत ने ट्रायल कोर्ट की ओर से सुनाए गए सजा के फैसले को निरस्त करने का आदेश देते हुए आरोपी परवीन ओबरॉय को बरी कर दिया है।
जानकारी के मुताबिक ट्रायल कोर्ट ने फेज-11 निवासी रंजन गल्होत्रा की शिकायत पर आरोपी को छह महीने की सजा के साथ 24 लाख रुपये के चेक की दोगुना कीमत (48 लाख रुपये) देने का फैसला सुनाया था। इसके चलते आरोपी ने ट्रायल कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ मोहाली के एडिशनल सेशंस जज में अपील दायर की थी।
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आरोपी के वकील जतिन कुमार सैनी ने बताया कि शिकायतकर्ता ने आरोपी का ब्लैंक साइन किए चेक का गलत इस्तेमाल किया था। इसके अलावा शिकायतकर्ता ने ट्रायल कोर्ट में दी गवाही में कहा था कि उसे चेक बाउंस का मेमो 16 दिसंबर, 2018 को प्राप्त हुआ था। लेकिन आरोपी के बैंक की ओर से जारी किया गया चेक बाउंस मेमो में स्पष्ट हुआ कि वह 9 दिसंबर, 2018 को जारी किया गया था। वहीं, शिकायतकर्ता की ओर से ऐसा कोई साक्ष्य पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित होता हो कि चेक बाउंस का मेमो 16 दिसंबर, 2018 को प्राप्त हुआ हो। इन सभी साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने ट्रायल कोर्ट का फैसला बदल उक्त आरोपी को बरी कर दिया।
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