{"_id":"5734ae494f1c1b374191a40b","slug":"chapparchiri-sarhind-fateh-march-gurudwara-sahib-mohali","type":"story","status":"publish","title_hn":" चप्पड़चिड़ी गुरुद्वारा साहिब में निकाला गया सरहिंद फतेह मार्च","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चप्पड़चिड़ी गुरुद्वारा साहिब में निकाला गया सरहिंद फतेह मार्च
अमर उजाला ब्यूरो, मोहाली
Updated Thu, 12 May 2016 09:57 PM IST
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सरहिंद फतेह मार्च
- फोटो : अमर उजाला
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जरनैल बाबा बंदा सिंह बहादुर की सरहिंद फतेह दिवस को समर्पित गुरुद्वारा साहिब चप्पड़चिड़ी के मैदान से फतेह मार्च निकाला गया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की छत्रछाया में पंज प्यारों की अगुवाई में मार्च का शुभारंभ हुआ।
इसमें विभिन्न धार्मिक सभाओं सोसाइटियों, टकसालों, सिंह सभाओं के बैंड और गतका पार्टियों के निहंग सिंहों की जत्थेबंदियों ने हिस्सा लिया। वहीं, मार्च की घोड़े व ऊंटों ने भी शान बढ़ाई। इस दौरान गतका पार्टियों ने अपने जौहर दिखाए। सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने मार्च में विशेष तौर पर हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने बाबा बंदा सिंह बहादुर की जंगी यादगार स्थापित करके बहुत ही बढ़िया काम किया है।
वहीं, एसजीपीसी के प्रधान अवतार सिंह ने कहा कि 12 मई 1710 को बाबा बंदा सिंह बहादुर की अगुवाई में खालसा फौजों ने चप्पड़चिड़ी के ऐतिहासिक मैदान में सूबा सरहिंद के वजीर खान को मार गिराया था।
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साथ ही श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे लख्ते जिगर बाबा जोरावर सिंह, बाबा फतेह सिंह और माता गुजर कौर की शहादत का बदला लिया था। इसी तरह 14 मई 1710 को बाबा बंदा सिंह बहादुर की अगुवाई में सरहिंद फतेह कर लिया था। इस दौरान अकाली नेता उजागर सिंह बडाली, जेपी सिंह, राजा कंवरजोत सिंह मोहाली, पार्षद गुरमुख सिंह सोहल, पमरजीत सिंह काहलो मौजूद रहे।
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इसमें विभिन्न धार्मिक सभाओं सोसाइटियों, टकसालों, सिंह सभाओं के बैंड और गतका पार्टियों के निहंग सिंहों की जत्थेबंदियों ने हिस्सा लिया। वहीं, मार्च की घोड़े व ऊंटों ने भी शान बढ़ाई। इस दौरान गतका पार्टियों ने अपने जौहर दिखाए। सांसद प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने मार्च में विशेष तौर पर हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने बाबा बंदा सिंह बहादुर की जंगी यादगार स्थापित करके बहुत ही बढ़िया काम किया है।
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वहीं, एसजीपीसी के प्रधान अवतार सिंह ने कहा कि 12 मई 1710 को बाबा बंदा सिंह बहादुर की अगुवाई में खालसा फौजों ने चप्पड़चिड़ी के ऐतिहासिक मैदान में सूबा सरहिंद के वजीर खान को मार गिराया था।
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साथ ही श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के छोटे लख्ते जिगर बाबा जोरावर सिंह, बाबा फतेह सिंह और माता गुजर कौर की शहादत का बदला लिया था। इसी तरह 14 मई 1710 को बाबा बंदा सिंह बहादुर की अगुवाई में सरहिंद फतेह कर लिया था। इस दौरान अकाली नेता उजागर सिंह बडाली, जेपी सिंह, राजा कंवरजोत सिंह मोहाली, पार्षद गुरमुख सिंह सोहल, पमरजीत सिंह काहलो मौजूद रहे।