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बरगाड़ी बेअदबी मामलाः सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पंजाब पुलिस की जांच से उलट
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मोहाली। सितंबर 2015 में हुए बरगाड़ी बेअदबी मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट पंजाब पुलिस की जांच से उलट है। सीबीआई मामले में किसी की भी संलिप्तता का पता नहीं लगा सकी है। हालांकि सीबीआई ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी को स्वीकार किया है। यह खुलासा उस क्लोजर रिपोर्ट से हुआ है जो सीबीआई ने कोर्ट में दाखिल की थी। कोर्ट के आदेश पर वीरवार को क्लोजर रिपोर्ट शिकायतकर्ता और आरोपियों को सौंप दी गई।
सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट में कहा है कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की जांच के दौरान मिले सबूतों के आधार पर किसी की भागीदारी साबित नहीं हो सकी है। सीबीआई ने कहा है कि स्व. मोहिंदर पाल सिंह बिट्टू, शक्ति सिंह और सुखजिंदर सिंह उर्फ सनी सहित 18 लोगों का जांच के दौरान मनोवैज्ञानिक परीक्षण भी किया गया, लेकिन बेअदबी में उनकी भागीदारी के प्रमाण नहीं मिले। रिपोर्ट में कहा गया है कि शिकायतकर्ता गोरा सिंह का पॉलिग्राफिक टेस्ट करवाया गया। गोरा सिंह बरगाड़ी के गुरुद्वारा साहिब में ग्रंथी हैं। गोरा सिंह के अलावा उसकी पत्नी स्वर्णजीत कौर व तीन अन्य गुरमुख सिंह, जसविंदर सिंह और अमनदीप सिंह की जांच की गई, लेकिन कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले।
क्लोजर रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सिख गुरुओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणी वाले हाथ से लिखे पोस्टरों सहित डेरा सच्चा सौदा की फिल्म एमएसजी-2 की रिलीज बाधित करने पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब के अंग फाड़ने की धमकी वाले पोस्टरों की लिखाई से तीनों आरोपियों मोहिंदर पाल बिट्टू, शक्ति सिंह व सुखजिंदर सिंह की लिखाई का मिलान भी करवाया गया, लेकिन यह मेल नहीं खाई। ऐसे पोस्टर 24 और 25 सितंबर को बरगाड़ी और बुर्ज जवाहर सिंह वाला गांवों में चिपकाए गए थे।
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सीबीआई ने पंजाब पुलिस की जांच को सिरे खारिज किया है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि तत्कालीन घटनाक्रम के दौरान पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की 53 घटनाओं में से 19 को पंजाब पुलिस ने हल किया है। क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया है कि पंजाब पुलिस ने मोगा जिले के सालासर पुलिस स्टेशन में दर्ज बेअदबी मामले के दौरान मोहिंदर पाल बिट्टू से पूछताछ की, जिसमें बिट्टू ने मार्च 2011 में मोगा में हुए दंगों और आगजनी की घटनाओं में शामिल होने की बात मानी। पंजाब पुलिस की जांच में बिट्टू ने फरीदकोट जिले में 2015 में हुई बेअदबी मामलों की साजिश का खुलासा किया था। पंजाब पुलिस की जांच में यह भी कहा गया था कि बिट्टू 1 जून 2015 को बुर्ज जवाहर सिंह वाला के गुरुद्वारा से गुरु ग्रंथ साहिब की चोरी का मुख्य आरोपी था। इसके साथ पवित्र पुस्तक के फटे अंगों को फेंकने और अपमानजनक पोस्टर चिपकाने में उसकी अहम भूमिका थी। पुलिस की जांच में बिट्टू के साथ सुखजिंदर सिंह, शक्ति सिंह के नामों का खुलासा हुआ था।
सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट में सभी की लिखावट के नमूने लेकर जांच करने, लेयर्ड वॉयस एनालेसिस टेस्ट के दौरान आवाज में धोखे के संकेत न मिलने की बात कही गई है। सीबीआई ने पंजाब पुलिस की उस थ्यूरी पर भी सवाल उठाए जिसमें पुलिस ने कहा था कि इन आरोपियों ने पवित्र पुस्तक के फटे अंग नष्ट कर दिए, लेकिन इसका कोई चश्मदीद गवाह नहीं है। सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पंजाब पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ की गई थी ताकि यह पता चल सके कि क्या कानून व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए कोई आम साजिश थी, लेकिन इन मामलों से संबंधित कोई सुराग नहीं मिला।
क्लोजर रिपोर्ट पर शिकायतकर्ता गोरा सिंह के वकील गुरदीप सिंह बल ने कहा कि वे अदालत में एक विरोध याचिका दायर करेंगे कि सीबीआई द्वारा की गई जांच गलत है और पंजाब पुलिस की जांच से पूरी तरह उलट है।
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सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट में कहा है कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की जांच के दौरान मिले सबूतों के आधार पर किसी की भागीदारी साबित नहीं हो सकी है। सीबीआई ने कहा है कि स्व. मोहिंदर पाल सिंह बिट्टू, शक्ति सिंह और सुखजिंदर सिंह उर्फ सनी सहित 18 लोगों का जांच के दौरान मनोवैज्ञानिक परीक्षण भी किया गया, लेकिन बेअदबी में उनकी भागीदारी के प्रमाण नहीं मिले। रिपोर्ट में कहा गया है कि शिकायतकर्ता गोरा सिंह का पॉलिग्राफिक टेस्ट करवाया गया। गोरा सिंह बरगाड़ी के गुरुद्वारा साहिब में ग्रंथी हैं। गोरा सिंह के अलावा उसकी पत्नी स्वर्णजीत कौर व तीन अन्य गुरमुख सिंह, जसविंदर सिंह और अमनदीप सिंह की जांच की गई, लेकिन कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले।
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क्लोजर रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सिख गुरुओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणी वाले हाथ से लिखे पोस्टरों सहित डेरा सच्चा सौदा की फिल्म एमएसजी-2 की रिलीज बाधित करने पर श्री गुरु ग्रंथ साहिब के अंग फाड़ने की धमकी वाले पोस्टरों की लिखाई से तीनों आरोपियों मोहिंदर पाल बिट्टू, शक्ति सिंह व सुखजिंदर सिंह की लिखाई का मिलान भी करवाया गया, लेकिन यह मेल नहीं खाई। ऐसे पोस्टर 24 और 25 सितंबर को बरगाड़ी और बुर्ज जवाहर सिंह वाला गांवों में चिपकाए गए थे।
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सीबीआई ने पंजाब पुलिस की जांच को सिरे खारिज किया है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि तत्कालीन घटनाक्रम के दौरान पंजाब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की 53 घटनाओं में से 19 को पंजाब पुलिस ने हल किया है। क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया है कि पंजाब पुलिस ने मोगा जिले के सालासर पुलिस स्टेशन में दर्ज बेअदबी मामले के दौरान मोहिंदर पाल बिट्टू से पूछताछ की, जिसमें बिट्टू ने मार्च 2011 में मोगा में हुए दंगों और आगजनी की घटनाओं में शामिल होने की बात मानी। पंजाब पुलिस की जांच में बिट्टू ने फरीदकोट जिले में 2015 में हुई बेअदबी मामलों की साजिश का खुलासा किया था। पंजाब पुलिस की जांच में यह भी कहा गया था कि बिट्टू 1 जून 2015 को बुर्ज जवाहर सिंह वाला के गुरुद्वारा से गुरु ग्रंथ साहिब की चोरी का मुख्य आरोपी था। इसके साथ पवित्र पुस्तक के फटे अंगों को फेंकने और अपमानजनक पोस्टर चिपकाने में उसकी अहम भूमिका थी। पुलिस की जांच में बिट्टू के साथ सुखजिंदर सिंह, शक्ति सिंह के नामों का खुलासा हुआ था।
सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट में सभी की लिखावट के नमूने लेकर जांच करने, लेयर्ड वॉयस एनालेसिस टेस्ट के दौरान आवाज में धोखे के संकेत न मिलने की बात कही गई है। सीबीआई ने पंजाब पुलिस की उस थ्यूरी पर भी सवाल उठाए जिसमें पुलिस ने कहा था कि इन आरोपियों ने पवित्र पुस्तक के फटे अंग नष्ट कर दिए, लेकिन इसका कोई चश्मदीद गवाह नहीं है। सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पंजाब पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ की गई थी ताकि यह पता चल सके कि क्या कानून व्यवस्था को बिगाड़ने के लिए कोई आम साजिश थी, लेकिन इन मामलों से संबंधित कोई सुराग नहीं मिला।
क्लोजर रिपोर्ट पर शिकायतकर्ता गोरा सिंह के वकील गुरदीप सिंह बल ने कहा कि वे अदालत में एक विरोध याचिका दायर करेंगे कि सीबीआई द्वारा की गई जांच गलत है और पंजाब पुलिस की जांच से पूरी तरह उलट है।