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Mohali News: कैशलेस इलाज मंजूर कर बाद में क्लेम ठुकराया, केयर हेल्थ इंश्योरेंस को झटका

Fri, 16 Oct 2026 01:22 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 16 Oct 2026 01:22 AM IST
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Care Health Insurance suffers a setback after rejecting a claim for which it had previously approved cashless treatment.
उपभोक्ता आयोग ने 99,375 रुपये देने के आदेश दिए, इलाज खर्च पर छह प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा मोहाली। बेड से गिरने के बाद रीढ़ की हड्डी के इलाज का क्लेम खारिज करना केयर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, मोहाली ने कंपनी को शिकायतकर्ता स्नेह लता को 74,375 रुपये इलाज और एंबुलेंस खर्च के रूप में लौटाने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा 25,000 रुपये मुआवजे और कानूनी खर्च के रूप में देने होंगे। इलाज खर्च पर एक अक्टूबर 2022 से वास्तविक भुगतान तक छह प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा। 15 अक्टूबर 2026 तक ब्याज सहित कुल राशि करीब 1.17 लाख रुपये बनती है।
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शिकायत के अनुसार, स्नेह लता ने 28 मई 2022 से 27 मई 2023 तक के लिए स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। इसके लिए उन्होंने 29,574 रुपये प्रीमियम दिया था। यह पॉलिसी पुरानी बीमा सुरक्षा को पोर्ट करवाकर ली गई थी।
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28 सितंबर 2022 को बेड से गिरने के बाद उन्हें तेज दर्द हुआ। उन्हें एंबुलेंस से अल्केमिस्ट अस्पताल ले जाया गया, जहां एमआरआई में रीढ़ की हड्डी में डीजेनेरेटिव बदलाव और डिस्क संबंधी समस्याएं सामने आईं। अस्पताल ने कैशलेस इलाज की मंजूरी मांगी तो कंपनी ने शुरुआत में 33,000 रुपये स्वीकृत किए, लेकिन एक अक्टूबर को क्लेम खारिज कर दिया। कंपनी ने रीढ़ की बीमारी के लिए 24 महीने की प्रतीक्षा अवधि का हवाला दिया।
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दुर्घटना और पुरानी पॉलिसी पर विचार

शिकायतकर्ता ने बताया कि दर्द गिरने के बाद शुरू हुआ था। इलाज के लिए उन्हें 72,375 रुपये अस्पताल और 2,000 रुपये एंबुलेंस पर खर्च करने पड़े। इसके बाद उन्होंने आयोग में शिकायत दर्ज कराई।


सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि दुर्घटना से जुड़े क्लेम पर प्रतीक्षा अवधि लागू नहीं होने का प्रावधान था। केवल दूसरी मेडिकल राय में पुरानी समस्याओं का उल्लेख होना यह साबित नहीं करता कि अस्पताल में भर्ती होने का संबंध गिरने से नहीं था। आयोग ने पुरानी पॉलिसी की निरंतरता पर भी विचार किया और माना कि कंपनी क्लेम खारिज करने के लिए पर्याप्त आधार साबित नहीं कर सकी। इसे सेवा में कमी माना गया।
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