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Mohali News: संरक्षित पशु बन रहे हादसों का कारण, फसलें कर रहे बर्बाद
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दो गोशालाओं के बावजूद संरक्षित पशुओं की समस्या का नहीं हो रहा समाधान, बाजारों-सड़कों पर घूमते हैं झुंड बनाकर
नगर काउंसिल क्षेत्र में दो गोशालाएं होने के बावजूद संरक्षित पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। बाजारों, गलियों और मुख्य मार्गों पर घूम रहे पशुओं के कारण लोग परेशान हैं। पशुओं के हमलों में एक व्यक्ति की मौत और 12 से अधिक लोगों के घायल होने की घटनाओं के बाद भी समस्या बरकरार रहने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों ने प्रशासन से गोवंश को पकड़कर गोशालाओं में पहुंचाने की मांग की है। गांव मगरा में 32 एकड़ में बनी गोशाला के चार शेडों में करीब 650 संरक्षित पशुओं रखे गए हैं। यह बताई गई क्षमता से 20 अधिक हैं। सूत्रों के मुताबिक, पांचवें शेड का ढांचा तैयार होने के बाद करीब 100 और पशुओं को रखने की व्यवस्था हो सकती है। इसके अलावा लालड़ू मंडी में पांच एकड़ में दूसरी गोशाला भी बनाई गई है। इसके बावजूद सड़कों और बाजारों में संरक्षित पशुओं के झुंड घूमते दिखाई देते हैं।
फसलों का नुकसान, रहता है खतरा
स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़कों पर घूम रहे संरक्षित पशुओं से हर समय हादसों का खतरा बना रहता है। उग्र पशु लोगों पर हमला कर देते हैं, जिससे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को भी परेशानी होती है। खेतों में घुसकर गोवंश फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसानों को फसलों की रखवाली के लिए दिन-रात पहरा देना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि गोशालाएं बनाने के साथ-साथ लावारिस पशुओं को पकड़ने और उनकी निगरानी की व्यवस्था भी जरूरी है। इलाके में गोवंश को पकड़ने के लिए कैचर वाहन नहीं होने से समस्या और गंभीर बनी हुई है।
हादसों में गई जान, कई लोग घायल
अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे पर भी लावारिस पशु सड़क हादसों का कारण बन रहे हैं। कुछ वर्ष पहले मोटरसाइकिल सवार 30 वर्षीय बजिंद्र कुमार की पशु के अचानक सामने आने से हुए हादसे में मौके पर ही मौत हो गई थी। लालड़ू मंडी निवासी मंजीत कौर को लावारिस पशु ने टक्कर मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। उन्हें अंबाला के एक निजी अस्पताल में 60 से 70 टांके लगाने पड़े। इसके अलावा छोटू, अजमेर सिंह, भिंदी और निखिल सहित कई लोग भी पशुओं की चपेट में आकर घायल हो चुके हैं।
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कोट
गोशालाएं होने के बावजूद संरक्षित पशु लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। गोसेस लेने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। प्रशासन को इस तरह ध्यान देना चाहिए। -संजीव गोयल,
संरक्षित पशु खेतों में घुसकर फसलों को बर्बाद कर देते हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। किसानों को दिन-रात खेतों में पहरा देना पड़ता है। - उदय राणा, किसान
प्रशासन को लावारिस पशुओं को सड़कों से हटाकर सुरक्षित गोशालाओं में पहुंचाना चाहिए, ताकि लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। संरक्षित पशुओं से हादसों का खतरा लगातार बना रहता है। - एडवोकेट राजेश राणा
लावारिस पशुओं की समस्या को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच करवाई जाएगी। संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट लेकर समस्या के समाधान के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। -अमित गुप्ता, एसडीएम डेराबस्सी
संरक्षित पशुओं को पकड़कर गोशाला छोड़ा जाता है, कुछ लोग उन्हें दोबारा खुला छोड़ देते हैं। इससे समस्या बनी हुई है। -अशोक पथरियां, नगर काउंसिल, लालड़ू
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नगर काउंसिल क्षेत्र में दो गोशालाएं होने के बावजूद संरक्षित पशुओं की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। बाजारों, गलियों और मुख्य मार्गों पर घूम रहे पशुओं के कारण लोग परेशान हैं। पशुओं के हमलों में एक व्यक्ति की मौत और 12 से अधिक लोगों के घायल होने की घटनाओं के बाद भी समस्या बरकरार रहने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों ने प्रशासन से गोवंश को पकड़कर गोशालाओं में पहुंचाने की मांग की है। गांव मगरा में 32 एकड़ में बनी गोशाला के चार शेडों में करीब 650 संरक्षित पशुओं रखे गए हैं। यह बताई गई क्षमता से 20 अधिक हैं। सूत्रों के मुताबिक, पांचवें शेड का ढांचा तैयार होने के बाद करीब 100 और पशुओं को रखने की व्यवस्था हो सकती है। इसके अलावा लालड़ू मंडी में पांच एकड़ में दूसरी गोशाला भी बनाई गई है। इसके बावजूद सड़कों और बाजारों में संरक्षित पशुओं के झुंड घूमते दिखाई देते हैं।
फसलों का नुकसान, रहता है खतरा
स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़कों पर घूम रहे संरक्षित पशुओं से हर समय हादसों का खतरा बना रहता है। उग्र पशु लोगों पर हमला कर देते हैं, जिससे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को भी परेशानी होती है। खेतों में घुसकर गोवंश फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसानों को फसलों की रखवाली के लिए दिन-रात पहरा देना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि गोशालाएं बनाने के साथ-साथ लावारिस पशुओं को पकड़ने और उनकी निगरानी की व्यवस्था भी जरूरी है। इलाके में गोवंश को पकड़ने के लिए कैचर वाहन नहीं होने से समस्या और गंभीर बनी हुई है।
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हादसों में गई जान, कई लोग घायल
अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे पर भी लावारिस पशु सड़क हादसों का कारण बन रहे हैं। कुछ वर्ष पहले मोटरसाइकिल सवार 30 वर्षीय बजिंद्र कुमार की पशु के अचानक सामने आने से हुए हादसे में मौके पर ही मौत हो गई थी। लालड़ू मंडी निवासी मंजीत कौर को लावारिस पशु ने टक्कर मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। उन्हें अंबाला के एक निजी अस्पताल में 60 से 70 टांके लगाने पड़े। इसके अलावा छोटू, अजमेर सिंह, भिंदी और निखिल सहित कई लोग भी पशुओं की चपेट में आकर घायल हो चुके हैं।
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गोशालाएं होने के बावजूद संरक्षित पशु लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। गोसेस लेने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। प्रशासन को इस तरह ध्यान देना चाहिए। -संजीव गोयल,
संरक्षित पशु खेतों में घुसकर फसलों को बर्बाद कर देते हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। किसानों को दिन-रात खेतों में पहरा देना पड़ता है। - उदय राणा, किसान
प्रशासन को लावारिस पशुओं को सड़कों से हटाकर सुरक्षित गोशालाओं में पहुंचाना चाहिए, ताकि लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। संरक्षित पशुओं से हादसों का खतरा लगातार बना रहता है। - एडवोकेट राजेश राणा
लावारिस पशुओं की समस्या को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच करवाई जाएगी। संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट लेकर समस्या के समाधान के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। -अमित गुप्ता, एसडीएम डेराबस्सी
संरक्षित पशुओं को पकड़कर गोशाला छोड़ा जाता है, कुछ लोग उन्हें दोबारा खुला छोड़ देते हैं। इससे समस्या बनी हुई है। -अशोक पथरियां, नगर काउंसिल, लालड़ू