जीरकपुर। चंडीगढ़-अंबाला हाईवे पर जीरकपुर में पंचकूला लाइट प्वाइंट के पास पूर्व अकाली सरकार के दौरान बनाया गया बस स्टैंड मुसाफिरों की जरूरतों को पूरा नहीं कर रहा है। जिस लोकेशन में बस स्टैंड बनाया गया है, वह लांग रूट की बसों के हिसाब से सही जगह नहीं है, इसलिए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर इस बस टर्मिनल में लांग रूट की बसों की एंट्री के लिए बंद कर दिया गया था। अब यहां केवल लोकल बस सर्विस की ही कुछ ही बसें आती-जाती हैं। ऐसे में लोगों को जीरकपुर-पटियाला चौक व सिंघपुरा चौक पर जहां बसें रुकती हैं, वहां बस का इंतजार करना पड़ता है, लेकिन यहां बस क्यू शेल्टर नहीं है। लोगों को धूप व बारिश में सड़क पर खड़े होने का मजबूर होना पड़ता है। बस क्यू शेल्टर न होने से बसें भी किसी स्थायी जगह पर नहीं रुकतीं। लोगों का कहना है कि पेप्सु रोडवेज हर साल मनमर्जी से किराए में तो इजाफा कर देती है लेकिन यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं की ओर ध्यान नहीं है। यहां से काफी लोग बस, ऑटो और कैब से चंडीगढ़, अंबाला, पटियाला व दिल्ली जाते हैं। काफी देर तक धूप में खड़े रहने से महिलाओं और बुजुर्गों को परेशानी होती है। लोगों को बस में सफर का फायदा तो हो रहा है, लेकिन क्यू शेल्टर न होने से गर्मी व बारिश की मार झेलनी पड़ती है।
जीरकपुर के पटियाला और सिंघपुरा चौक पर बसों के रुकने का कोई स्थायी ठिकाना नहीं है। बस यात्री कमलजीत ने बताया कि ड्राइवर चौक के आसपास जहां ब्रेक लगा दें, वहीं बस रुकती है। ऐसे में जिन यात्रियों के पास लगेज थोड़ा ज्यादा होता है तो उन्हें दौड़ लगानी पड़ती है। बस यात्री अमरप्रीत सिंह गिन्नी ने बताया कि यहां से काफी संख्या में लोग सुबह-शाम दिल्ली व पटियाला साइड जाते हैं। बस व ऑटो के इंतजार के लिए मजबूरी में उन्हें सड़क पर खड़ा होना पड़ता है। लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रोडवेज को बस क्यू शेल्टर बनवाना चाहिए। बस यात्री सुमिता ने बताया कि मुख्य चौराहों पर बस क्यू शेल्टर न होने से सबसे अधिक परेशानी महिलाओं व बच्चों को होती है। गर्मी और बारिश के मौसम में तो बाहर खड़ा होना काफी मुश्किल है।