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Mohali News: उपभोक्ता अदालत के निर्देशों का पालन न करने पर बिल्डर को तीन साल की सजा, 1 लाख जुर्माना

Fri, 27 Sep 2024 10:56 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली
संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली Updated Fri, 27 Sep 2024 10:56 PM IST
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Builder sentenced to three years' imprisonment, fine of Rs 1 lakh for not following consumer court's instructions
जुर्माने की रकम से 40 हजार रुपये शिकायतकर्ता को मिलेंगे, बाकी राशि राज्य के खजाने में जाएगी
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संवाद न्यूज एजेंसी

मोहाली। उपभोक्ता विभाग के निर्देशों का पालन ना करने पर स्काई रॉक सिटी वेलफेयर सोसाइटी के मालिक नवजीत सिंह को तीन साल की सजा सुनाई है। बिल्डर को 1 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया है, जिसमें से 40 हजार रुपये शिकायतकर्ता को दिए जाएंगे और शेष राशि राज्य के खजाने में जमा होगी। बिल्डर पर प्लॉट का पजेशन समय पर न देने के आरोप थे और उपभोक्ता अदालत के आदेश के बाद उसे 9 फीसदी राशि के साथ राशि लौटानी थी लेकिन उसने अदालत के आदेश की अवमानना की, जिस कारण शिकायतकर्ता ने नई याचिका दायर की थी जिस पर फैसला सुनाया गया है।

अदालत ने फैसला सुनाया कि बिल्डर नवजीत सिंह ने कोई उचित स्पष्टीकरण या कारण नहीं बताया कि उसने आदेश का पालन क्यों नहीं किया। अदालत ने कहा कि इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि शिकायतकर्ता को आरोपी के कृत्य के कारण न्याय से वंचित किया गया। ऐसी विचित्र परिस्थितियों में दोषी के प्रति कोई नरम रुख नहीं अपनाया जा सकता। अदालत ने कहा कि बिल्डर ने जमानत या जमानत बांड या फिर सजा के निलंबन के लिए कोई आवेदन प्रस्तुत नहीं किया। ऐसे में अदालत के पास अभियुक्त को नाभा जेल भेजने के अलावा विकल्प नहीं है, जहां वह पहले से ही हिरासत में है।
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शिकायतकर्ता रविंदर वालिया ने इस आयोग के समक्ष आरोपी के खिलाफ याचिका दायर की थी। यह याचिका 8 अगस्त 2022 के तहत दिए गए निर्देशों का पालन ना करने के तहत थी। अदालत ने बिल्डर को निर्देश दिए थे कि वह शिकायतकर्ता को विभिन्न जमाओं की तारीख से वसूली तक 9 फीसदी प्रति वर्ष ब्याज के साथ 8.30 लाख रुपये की राशि वापस करें। बिल्डर को मानसिक पीड़ा, उत्पीडऩ और मुकदमे की लागत के लिए शिकायतकर्ता को 25 हजार रुपये का मुआवजा देने के भी निर्देश थे। 30 दिनों के भीतर बिल्डर ने यह रकम लौटानी थी। हालांकि बिल्डर ने आयोग निर्देशों का पालन नहीं किया। शिकायतकर्ता ने अलग से याचिका दायर की जिस पर अदालत ने फैसला सुनाते हुए उसे सजा के निर्देश दिए हैं।
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