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आयुर्वेदिक डाक्टरों ने सरकार पर लगाया कोरोना काल में आर्थिक शोषण का आरोप
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मोहाली। भत्तों को बेसिक वेतन के हिस्से के तौर पर जारी रखने और उसमें बढ़ोतरी करने की मांग को लेकर आयुर्वेदिक डाक्टरों ने मांग पत्र सौंपा। यह मांग पत्र पंजाब आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर्ज एसोसिएशन की मोहाली इकाई के प्रतिनिधिमंडल ने एडीसी आशिका जैन को सौंपा है। एसोसिएशन ने सरकार पर कोरोना काल में डाक्टरों का आर्थिक शोषण करने का आरोप लगाया है।
वीरवार को पंजाब आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल के तौर पर डॉ. अमरदीप ढिल्लों, डॉ. राजीव, डॉ. आशिमा, डॉ. नवदीप, डॉ. अमनप्रीत, डॉ. जीवनजोत ढिल्लों और डॉ. रजनी ने एडीसी आशिका जैन से मुलाकात की। इन लोगों ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान पंजाब सरकार ने एनपीए को 25 से घटाकर 20 प्रतिशत करने का फैसला लिया है। जो डाक्टरी पेशे के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि कोरोनो महामारी के दौरान सैकड़ों डाक्टर कोरोना पीड़ित हुए और कुछ डाक्टरों को तो अपनी जान तक गंवानी पड़ी। उनकी हौंसला अफजाही करने के बजाय सरकार उनका आर्थिक शोषण कर रही है। उन्होंने कहा कि आज तक पंजाब सरकार अपने सरकारी डाक्टरों को बेसिक सेलरी के 25 प्रतिशत के समान एनपीए देती आ रही है।
यह एनपीए हर लाभ के लिए बेसिक सेलरी का हिस्सा माना जाता रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार की ओर से गठित छठे पेय-कमीशन में एनपीए को घटाया और बेसिक सेलरी के अलावा कोई भी भत्ता बेसिक सेलरी का हिस्सा नहीं बनाया गया। उन्होंने पंजाब सरकार को इस फैसले को सिरे से रद्द करने, एनपीए को 33 प्रतिशत करने, एनपीए को बेसिक सेलरी का हिस्सा मानने और पेंशन फिक्स करने के साथ-साथ कोरोना महामारी के साथ लड़ने वाले डाक्टरों को स्पेशल भत्ता देने की मांग की है।
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वीरवार को पंजाब आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल के तौर पर डॉ. अमरदीप ढिल्लों, डॉ. राजीव, डॉ. आशिमा, डॉ. नवदीप, डॉ. अमनप्रीत, डॉ. जीवनजोत ढिल्लों और डॉ. रजनी ने एडीसी आशिका जैन से मुलाकात की। इन लोगों ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान पंजाब सरकार ने एनपीए को 25 से घटाकर 20 प्रतिशत करने का फैसला लिया है। जो डाक्टरी पेशे के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि कोरोनो महामारी के दौरान सैकड़ों डाक्टर कोरोना पीड़ित हुए और कुछ डाक्टरों को तो अपनी जान तक गंवानी पड़ी। उनकी हौंसला अफजाही करने के बजाय सरकार उनका आर्थिक शोषण कर रही है। उन्होंने कहा कि आज तक पंजाब सरकार अपने सरकारी डाक्टरों को बेसिक सेलरी के 25 प्रतिशत के समान एनपीए देती आ रही है।
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यह एनपीए हर लाभ के लिए बेसिक सेलरी का हिस्सा माना जाता रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार की ओर से गठित छठे पेय-कमीशन में एनपीए को घटाया और बेसिक सेलरी के अलावा कोई भी भत्ता बेसिक सेलरी का हिस्सा नहीं बनाया गया। उन्होंने पंजाब सरकार को इस फैसले को सिरे से रद्द करने, एनपीए को 33 प्रतिशत करने, एनपीए को बेसिक सेलरी का हिस्सा मानने और पेंशन फिक्स करने के साथ-साथ कोरोना महामारी के साथ लड़ने वाले डाक्टरों को स्पेशल भत्ता देने की मांग की है।
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