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घायल कार में तड़पते रहे, पीसीआर कर्मी बोले-कंट्रोल रूम में करो फोन
अमर उजाला ब्यूरो, मोहाली
Updated Mon, 29 Aug 2016 09:55 AM IST
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Mohali Accident
- फोटो : Amar ujala
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पीसीएल चौक पर सड़क हादसे की शिकार एक महिला सहित तीन व्यक्ति लहूलुहान हालत में कार से बाहर निकलने के लिए तड़प रहे थे, जबकि दो व्यक्तियों की मौके पर ही मौत हो गई थी। प्रत्यक्षदर्शी युवक चेतन पाराशर ने थोड़ी ही दूरी पर खड़े पीसीआर पुलिसकर्मियों को पीसीएल चौक पर हुए हादसे की जानकारी दी। वहां दो पुलिस वाले पीसीआर से बाहर कुर्सी पर बैठे थे। चेतन ने बताया कि पुलिस ने उससे पुलिस कंट्रोल रूप में फोन करने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया। उधर, संबंधित थाना पुलिस से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि जैसे ही सूचना मिली वह मौके पर पहुंच गए थे।
पुलिस मुलाजिमों ने कहा, कंट्रोल रूम फोन कर दो
हादसे की जानकारी देने के बाद भी, पुलिस मुलाजिमों ने तुरंत घटनास्थल पर पहुंचकर सहायता करने की बजाय युवक से कहा कि वह पुलिस कंट्रोल रूम में इसकी जानकारी दे दें। मौके पर ही खड़े होकर चेतन पाराशर ने कई बार पुलिस कंट्रोल रूम के नंबर पर फोन किया, लेकिन फोन बिजी जाता रहा। आखिरकार चेतन ने गाड़ी में फंसे लहूलुहान लोगों को बाहर निकालने की भरपूर कोशिश की, लेकिन गाड़ी इतनी बुरी तरह से पिचक चुकी थी कि वह निकाल नहीं सके। वहां से गुजर रहे 11 युवकों की मदद से घायलों को चेतन ने अस्पताल पहुंचाया, जहां दो लोगों को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया गया।
पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
-हादसे में वाहनों की टक्कर की आवाज पास में ही मौजूद पीसीआर कर्मियों को कैसे नहीं सुनाई दी?
-प्रत्यक्षदर्शी के बुलाने पर भी मौके पर मदद के लिए क्यों नहीं पहुंचे पुलिस मुलाजिम?
फिल्म देखकर घर लौट रहे थे घर
इंडिया अगेंस्ट क रप्शन की टीम के सदस्य चेतन पाराशर ने अमर उजाला को बताया कि वह शनिवार रात दोस्त के साथ फिल्म देखने के लिए कंट्री मॉल गया था। लौटते समय उसे अपने दोस्त को फेज-7 में छोड़ा। इसके बाद वह इंडस्ट्रियल एरिया स्थित अपने घर जा रहा था। चेतन के मुताबिक, मिनी बस-कार हादसे के क्षण भर पहले ही वह कार से आगे निकला था, लेकिन अचानक एक जोरदार धमाके की आवाज आई। गाड़ी रोक कर देखा तो मिनी बस कार को काफी दूर तक खींचते हुए ले गई थी।
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बस में चार लोग थे सवार
चेतन पाराशर ने बताया हादसे के बाद मिनी बस कुछ दूर जाकर रुक गई। उसके टायर में कुछ फंस गया था, जिससे बस आगे नहीं बढ़ सकी। बस में से उतर कर चार लोग अंधेरे का फायदा उठा भाग गए। चेतन के अनुसार, उसने तुरंत बस और उस पर लगे नंबर की फोटो ली और वापस घटनास्थल पर पहुंचा।
घायलों के अस्पताल पहुंचने पर आई पुलिस
चेतन ने कहा कि वीवीआईपी दौरे के दौरान मुस्तैद दिखने वाली पुलिस आमजन के लिए कितनी चौकस है यह रात दो बजे देखने को मिला। इससे पुलिस का दोहरा चरित्र देखने को मिला।
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पुलिस मुलाजिमों ने कहा, कंट्रोल रूम फोन कर दो
हादसे की जानकारी देने के बाद भी, पुलिस मुलाजिमों ने तुरंत घटनास्थल पर पहुंचकर सहायता करने की बजाय युवक से कहा कि वह पुलिस कंट्रोल रूम में इसकी जानकारी दे दें। मौके पर ही खड़े होकर चेतन पाराशर ने कई बार पुलिस कंट्रोल रूम के नंबर पर फोन किया, लेकिन फोन बिजी जाता रहा। आखिरकार चेतन ने गाड़ी में फंसे लहूलुहान लोगों को बाहर निकालने की भरपूर कोशिश की, लेकिन गाड़ी इतनी बुरी तरह से पिचक चुकी थी कि वह निकाल नहीं सके। वहां से गुजर रहे 11 युवकों की मदद से घायलों को चेतन ने अस्पताल पहुंचाया, जहां दो लोगों को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया गया।
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पुलिस की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
-हादसे में वाहनों की टक्कर की आवाज पास में ही मौजूद पीसीआर कर्मियों को कैसे नहीं सुनाई दी?
-प्रत्यक्षदर्शी के बुलाने पर भी मौके पर मदद के लिए क्यों नहीं पहुंचे पुलिस मुलाजिम?
फिल्म देखकर घर लौट रहे थे घर
इंडिया अगेंस्ट क रप्शन की टीम के सदस्य चेतन पाराशर ने अमर उजाला को बताया कि वह शनिवार रात दोस्त के साथ फिल्म देखने के लिए कंट्री मॉल गया था। लौटते समय उसे अपने दोस्त को फेज-7 में छोड़ा। इसके बाद वह इंडस्ट्रियल एरिया स्थित अपने घर जा रहा था। चेतन के मुताबिक, मिनी बस-कार हादसे के क्षण भर पहले ही वह कार से आगे निकला था, लेकिन अचानक एक जोरदार धमाके की आवाज आई। गाड़ी रोक कर देखा तो मिनी बस कार को काफी दूर तक खींचते हुए ले गई थी।
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बस में चार लोग थे सवार
चेतन पाराशर ने बताया हादसे के बाद मिनी बस कुछ दूर जाकर रुक गई। उसके टायर में कुछ फंस गया था, जिससे बस आगे नहीं बढ़ सकी। बस में से उतर कर चार लोग अंधेरे का फायदा उठा भाग गए। चेतन के अनुसार, उसने तुरंत बस और उस पर लगे नंबर की फोटो ली और वापस घटनास्थल पर पहुंचा।
घायलों के अस्पताल पहुंचने पर आई पुलिस
चेतन ने कहा कि वीवीआईपी दौरे के दौरान मुस्तैद दिखने वाली पुलिस आमजन के लिए कितनी चौकस है यह रात दो बजे देखने को मिला। इससे पुलिस का दोहरा चरित्र देखने को मिला।