शराब वाली दुकान की खबर के साथ

Panchkula bureau Updated Fri, 08 Dec 2017 02:02 AM IST
अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे पर फिर खुलीं शराब की दुकानें
घायलों के इलाज के शहर के अंदर एक भी ट्रामा सेंटर नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
जीरकपुर।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को हाईवे से 500 मीटर दूर शराब की दुकानें खोलने के आदेश पर राहत देकर नगर काउंसिल के सीमा क्षेत्र के हाईवे को इस सूची से बाहर कर दिया था। अब शहर के बीच से गुजर रहे हाईवे पर शराब की दुकानें एक बार फिर से खुल गई है, लेकिन अदालत के निर्देशानुसार इन शराब की दुकानों के पास ट्रामा सेंटर खोलना अनिवार्य है। जबकि जीरकपुर में शराब की पांच दुकानें होने के बावजूद एक भी ट्रामा सेंटर नहीं है।
सर्वोच्च अदालत के आदेशानुसार एक अप्रैल से हाईवे के 500 मीटर के दायरे में शराब की दुकानें हटाई गई थी। जो कोर्ट द्वारा शहरों में छूट देने के आदेशों के बाद दोबारा खुल गई हैं। जीरकपुर शहर में एक भी ट्रामा सेंटर नहीं है। यहां पर पांच ठेके हैं, जिनमें दो पटियाला व अंबाला रोड पर और एक पंचकूला रोड पर है। इसके अलावा कई बीयर बार, डिस्कोथेक एवं होटल हैं, जो हाईवे किनारे फिर से शराब परोस कर हादसों के कारण बन रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, हरमन सिद्धू की संस्था अराइव सेफ की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईवे के 500 मीटर के दायरे में शराब बेचने और परोसने पर पाबंदी लगा दी थी। सिद्धू वर्ष 1996 में एक सड़क दुर्घटना के बाद वह अपने पैरों पर खड़े होने के लायक नहीं रहे थे। उन्हें लगा कि इस दुर्घटना का कारण दोस्त द्वारा शराब पीकर गाड़ी चलाना था। उनके दोस्त ने हाईवे किनारे की दुकान से शराब खरीदी थी। उन्होंने वर्ष 2012 में एक जनहित याचिका दायर की थी। इसके बाद नेशनल और स्टेट हाईवे के किनारे शराब की दुकानें हटाने को लेकर कोर्ट ने कहा था कि लोगों की सेहत सबसे पहले है।


डेराबस्सी ही एकमात्र अस्पताल
गौरतलब है कि जीरकपुर में शराब की पांच दुकानें होने के बावजूद एक भी ट्रामा सेंटर नहीं है। घायलों को इलाज के लिए सिविल अस्पताल डेराबस्सी पर निर्भर रहना पड़ता है। दूसरी ओर, डेराबस्सी स्थित एकमात्र सरकारी अस्पताल किसी बड़ी आपदा से निपटने को तैयार नहीं है। वहीं, शहर में एक्सीडेंटल ट्रामा की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस कारण पीड़ितों दूसरे शहरों पर आश्रित रहना पड़ता है।

ईटीओ ने नहीं उठाया फोन
इस संबंध में जब ईटीओ रणदीप सिंह गिल से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। जबकि उनके नंबर पर मैसेज भेजकर उनसे जवाब देने को कहा गया, लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया।

जीरकपुर में ट्रामा सेंटर बनाने को लेकर विभाग द्वारा कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। ट्रामा सेंटर निर्माण का मामला पहले ही उच्चाधिकारियों के ध्यान में लाया जा चुका है, इस पर अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है।
-संगीता जैन, एसएमओ, डेराबस्सी सिविल अस्पताल।

ट्रामा सेंटर बनाने का जिम्मा सेहत विभाग के अधीन आता है, इसके बारे में सेहत विभाग के अधिकारी बता सकते हैं।
- सरूप सिंह, एक्साइज ऑफिसर, जिला मोहाली।

सिविल सर्जन का फोन मिला बंद
मामले को लेकर जब सिविल सर्जन (मोहाली) रीटा भारद्वाज से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उनका फोन बंद था। बार-बार प्रयास करने के बावजूद उनसे संपर्क नहीं हो सका।

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