{"_id":"699cba346c8a72c02007cee8","slug":"32-societies-and-35-colonies-need-parks-but-the-municipal-corporation-has-no-space-mohali-news-c-71-1-mli1016-139487-2026-02-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mohali News: 32 सोसाइटियाें, 35 कॉलोनियां को पार्क की दरकार, नप के पास जगह ही नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mohali News: 32 सोसाइटियाें, 35 कॉलोनियां को पार्क की दरकार, नप के पास जगह ही नहीं
विज्ञापन
जीरकपुर। बलटाना क्षेत्र में बच्चों और बुजुर्गों के लिए एक भी सार्वजनिक पार्क नहीं है। तेजी से बढ़ती आबादी और लगातार हो रहे निर्माण कार्यों के बीच लोगों को खुली जगह के लिए तरसना पड़ रहा है। बलटाना में वार्ड नंबर-1 से लेकर वार्ड नंबर-6 के बीच 32 सोसाइटियां और 35 कॉलोनियां हैं।
यहां 35 हजार वोटर हैं जबकि आबादी सवा लाख तक है। इस आबादी के लिए यहां एक भी पार्क नहीं है। स्थानीय निवासी लंबे समय से पार्क की मांग कर रहे हैं, मगर अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। बलटाना के स्थानीय निवासी गुरबिंदर सिंह संधू ने बताया कि यहां हाईप्रोफाइल सोसाइटियों से लेकर मिडिल क्लास परिवार और दिहाड़ी मजदूर तक रहते हैं।
उत्तर-प्रदेश, बिहार, हरियाणा सहित कई राज्यों से आए लोग यहां किराये या खुद के मकान में बसे हैं। जीरकपुर की तुलना में किफायती होने के कारण यह इलाका तेजी से विकसित हुआ है, लेकिन बुनियादी सुविधाएं उसी गति से नहीं बढ़ सकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों के खेलने के लिए कोई सुरक्षित स्थान नहीं है। वे या तो सड़कों पर खेलते हैं या फिर खाली प्लॉटों में, जहां हादसे का खतरा बना रहता है। वहीं बुजुर्गों को सुबह-शाम टहलने के लिए सड़कों का सहारा लेना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
यहां 35 हजार वोटर हैं जबकि आबादी सवा लाख तक है। इस आबादी के लिए यहां एक भी पार्क नहीं है। स्थानीय निवासी लंबे समय से पार्क की मांग कर रहे हैं, मगर अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। बलटाना के स्थानीय निवासी गुरबिंदर सिंह संधू ने बताया कि यहां हाईप्रोफाइल सोसाइटियों से लेकर मिडिल क्लास परिवार और दिहाड़ी मजदूर तक रहते हैं।
विज्ञापन
उत्तर-प्रदेश, बिहार, हरियाणा सहित कई राज्यों से आए लोग यहां किराये या खुद के मकान में बसे हैं। जीरकपुर की तुलना में किफायती होने के कारण यह इलाका तेजी से विकसित हुआ है, लेकिन बुनियादी सुविधाएं उसी गति से नहीं बढ़ सकी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों के खेलने के लिए कोई सुरक्षित स्थान नहीं है। वे या तो सड़कों पर खेलते हैं या फिर खाली प्लॉटों में, जहां हादसे का खतरा बना रहता है। वहीं बुजुर्गों को सुबह-शाम टहलने के लिए सड़कों का सहारा लेना पड़ता है।
विज्ञापन