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हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल में किसानों को पॉली हाउस की खेती के लिए पंजाब से ज्यादा सब्सिडी मिलती है

Sun, 04 Nov 2018 12:46 AM IST
Updated Sun, 04 Nov 2018 12:46 AM IST
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हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल में किसानों को पॉली हाउस की खेती के लिए पंजाब से ज्यादा सब्सिडी मिलती है
- हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल में किसानों को पॉली हाउस की खेती के लिए पंजाब से ज्यादा सब्सिडी मिलती है
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- अब धीरे धीरे किसानों का रूझान भी गुलाब की खेती के प्रति कम होने लगा है, बड़ी मशक्कत से खिलते हैं गुल यहां

दीपक शाही
जीरकपुर। पंजाब के किसान परंपरागत खेती से आधुनिक फूलों की खेती की ओर कदम बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी ने उनके कदम रोक रखे हैं। क्योंकि हरियाणा, हिमाचल व राजस्थान में पॉलीहाउस खेती के लिए पंजाब से ज्यादा सब्सिडी किसानों की दी जाती है। ऐसे में जीरकपुर के ज्यादातर किसान फूलों की खेती नहीं कर पा रहे हैं। ये कहना है जीरकपुर में गुलाब की खेती करने वाले गांव नाबा साहिब निवासी सुरजीत सिंह का। वह पिछले चार सालों से गुलाब की खेती कर रहे हैं। सुरजीत का कहना है कि अगर हिमाचल में 85, राजस्थान में 70, हरियाणा में 65 फीसदी सब्सिडी किसानों को मिल सकती है, तो पंजाब में 50 फीसदी सब्सिडी ही क्यों? यहां भी सब्सिडी की राशि बढ़ाई जानी चाहिए। हिमाचल में एडवेंचर के साथ सरकार किसानों को ज्यादा सब्सिडी देती हैं, हम तो यहां ऐसे तापमान में भी गुल खिलाने को तैयार हैं। सरकार तो सब्सिडी बढ़ाने के लिए आगे आएं।

सरकार से सब्सिडी ज्यादा मिले तो भारत के गुलाब विदेशियों के आंगन भी महकाएंगे
कई बार जीरकपुर में गुलाब की खेती करने वाले किसानों के पास दुबई से भी सफेद गुलाब के फूलों की डिमांड आ चुकी है, लेकिन पैसे की कमी की वजह से यहां के किसान उनकी डिमांड पूरी नहीं कर पाते। उनका कहना है कि हिमाचल की तर्ज पर पंजाब के किसानों को भी सब्सिडी ज्यादा मिले तो वह विदेशियों के आंगन देश की फूलों से भी महकाने का बल रखते हैं। क्योंकि अभी उनकी बागवानी से सिर्फ ट्राइसिटी में हीं फूलों की सप्लाई पूरी नहीं हो पाती। इसके अलावा उन्होंने बताया कि पालीहाउस के रेट भी कम होने चाहिए। 844 रुपये स्क्वेयर फीट के हिसाब से पालीहाउस मिलते हैं। ऐसे में एक गरीब किसान कहां से इतने पैसे वहन करेगा।
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बड़ी मशक्कत के बाद खिलते हैं गुल यहां
कहते हैं कि पंजाब में बहुत ज्यादा गर्मी या फिर ठंड रहती है इसलिए कट फ्लावर की खेती खुले में नहीं की जा सकती। कट फ्लावर को न ज्यादा गर्मी चाहिए और न हीं ठंड। इसे कम से कम से कम 10 से 12 डिग्री और अधिक से अधिक 30 से 32 डिग्री सेल्सियस का तापमान चाहिए। पालीहाउस कट फ्लावर को तेज आंधी, बारिश और सूर्य से निकलने वाली अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाती हैं। सबसे पहले पालीहाउस का निर्माण करवाया जाता है उसके साथ पानी की सप्लाई देने के लिए ड्रिप सिस्टम लगवाया जाता है। कट फ्लावर के प्रति स्क्वायर मीटर आठ से 10 पौधे लगाए जाते हैं और प्रति एकड़ 40 हजार पौधे लगाए जा सकते हैं। गुलाब की खेती के साथ सबसे अच्छी बात ये है कि इसकी डिमांड कभी कम नहीं होती। एक बार बोने के बाद गुलाब का पौधा करीब छह साल तक फूल देता है। इसमें शुरुआती मेहनत के बाद केवल पौधों की छंटाई करनी होती है और सिंचाई पर ध्यान देना होगा। एक गुलाब का पौधा सालभर में 1 से 2 किलो फूल देता है।
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रोजाना पांच से आठ हजार रुपये तक की बिक्री
45 वर्षीय सुरजीत सिंह ने बताया कि नाबा गांव में ढाई एकड़ जमीन में उन्होंने फूूलों की खेती है। इसके रखरखाव के लिए तीन मजदूर रखे हैं। इसके अलावा सुबह पांच से नौ बजे तक वह खुद अपने पाली हाउस में मजदूरों के साथ रहकर फूलों की छटाई करते हैं। यह एक कृषि उद्योग की तरह है। उन्होंने बताया कि एक गुलाब का पौधा लगाने के चार माह के बाद फूल देता है। रोजाना सुरजीत के पालीहाउस से पांच से आठ हजार रुपये के फूूलों की सप्लाई पूरे ट्राइसिटी में होती है। स्ट्रक्चर को मिलाकर 48 लाख रुपये की लागत से उन्होंने फूलों की खेती की है।
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