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दो हजार बढ़े रेत के दाम, आशियाना बनाना हुआ मुश्किल

Mon, 16 Dec 2019 11:38 PM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 16 Dec 2019 11:38 PM IST
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2000 rupees increased the price of sand, making it difficult for the house
जीरकपुर। रेत के दाम में उछाल आने से लोगों के लिए घर बनाने का सपना महंगा हो गया है। दो महीने में रेत के दाम 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं और निर्माण सामग्री विक्रेताओं के अनुसार अभी कुछ दिनों तक राहत मिलने की उम्मीद नहीं है बल्कि रेत के दामों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इससे जहां आम लोग परेशान हैं, वहीं रेत बेचने वाले ठेकेदारों की चांदी हो गई है। उन्होंने पुराने स्टॉक को भी आज के रेट पर महंगे दामों में बेचना शुरू कर दिया है। पहले जो ट्रॉली तीन हजार रुपये में आती थी, वह अब 4500 से 5000 रुपये में मिल रही है।
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बता दें कि रेत माफिया लंबे समय से इस कार्य में सक्रिय हैं।यह धंधा अकाली-भाजपा की सरकार के समय से चलता आ रहा है और चुनाव से पहले कैप्टन सरकार ने यह दावा भी किया था कि जीतने के बाद उनकी सरकार रेत के दाम आधे कर देगी, लेकिन दाम आधे होने की बजाय और बढ़ गए हैं। कुछ दिन पहले हलका विधायक एनके शर्मा ने रेत माफिया और गुंडा पर्ची के खिलाफ आवाज उठाई थी। अकाली दल पार्टी के प्रधान सुखबीर बादल और एनके शर्मा की देखरेख में मोहाली डीसी ऑफिस के बाहर धरना लगाया था जिसके बाद माफिया ने रेत खनन का काम बंद कर दिया है पर इसका फायदा होने की बजाय लोगों को नुकसान हुआ है क्योंकि रेत और महंगी हो गई है।
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16 हजार में आने वाला टिप्पर 20 हजार रुपये में मिल रहा
वीआईपी रोड पर घर बना रहे एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पहले उनको रेत की ट्रॉली तीन हजार रुपये में पड़ती थी। अब वही ट्रॉली उन्हें 4500 से 5000 रुपये में खरीदनी पड़ रही है। रेत बेचने वाले दुकानदारों ने बताया कि पहले रामपुरा छत के घाट से रेत आती थी तो उन्हें टिप्पर 16 हजार रुपये में पड़ता था लेकिन रेड पड़ने के बाद घाट बंद है तो वही टिप्पर करीब 20 हजार रुपये का पड़ रहा है। सप्लाई कम होने और महंगे भाव में आने से लोगों को रेत अब महंगे भाव में मिल रही है।
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मानसून के चलते अक्तूबर महीने तक माइनिंग साइट्स बंद थी। इस कारण जरूरत अनुसार सप्लाई न होने की वजह से रेत महंगा मिल रहा है। सरकार की ओर से जल्द ही बंद पड़ी माइनिंग साइट्स की अलॉटमेंट कर दी जाएगी जिससे लोगों को राहत मिलेगी। -लखवीर सिंह, एसडीओ माइनिंग
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