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अकाली नेता कोल्यांवाली ने अदालत में किया सरेंडर
Updated Sat, 15 Dec 2018 01:20 AM IST
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आरोपी पर विजिलेंस ने आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था
आरोपी पांच महीने से विजिलेंस से बच रहा था, सुप्रीम कोर्ट तक जा चुका था
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली। आय से अधिक संपत्ति के मामले में जमानत याचिका रद होने के बाद आखिर शुक्रवार को बादलों के करीब सीनियर अकाली नेता दियाल सिंह कौलीयांवाली ने जिला अदालत में सरेंडर कर दिया। अदालत ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वहीं, विजिलेंस अब आरोपी का प्रोडक्शन वारंट पर लाने की तैयारी में है। इसके लिए जल्दी ही एक एप्लीकेशन मोहाली की अदालत में दायर की जाएगी। क्योंकि जिस समय आरोपी ने सरेंडर किया, उस समय विजिलेंस के पास रिमांड लेने के लिए समय का अभाव था।
जानकारी के मुताबिक दियाल सिंह कौलीयांवाली केस दर्ज होने के करीब पांच महीन से विजिलेंस के साथ ही आंख मिचौली की गेम कर रहे थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने आरोपी को राहत देने से साफ मना कर दिया था। इसके बाद उन्होंने मोहाली जिला अदालत में एक एप्लीकेशन लगाई थी, लेकिन अदालत ने अर्जी को रद कर दिया था। इसके बाद से वह विजिलेंस से बचते। पता चला है कि अदालत में जिस समय उन्होंने आत्मसमर्पण किया। उस समय मोहाली विजिलेंस के डीएसपी धर्मपाल सिंह पहुंच गए थे। इसके साथ ही इस संबंधी बठिंडा की विजिलेंस को भी सूचित कर दिया गया था, लेकिन समय ज्यादा हो जाने के चलते बठिंडा विजिलेंस की टीम मोहाली अदालत में समय पर नहीं पहुंच सकी जिस कारण अदालत ने दियाल सिंह कौलीयांवाली को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
जिक्रयोग है कि विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दियाल सिंह कौलीयांवाली के खिलाफ आय से अधिक स्रोतों से संपत्ति बनाने के आरोपों तहत केस दर्ज किया गया है। विजिलेंस द्वारा साल 2009 से लेकर 2014 के समय दौरान वाली की गई जांच में पता चला कि उसके द्वारा इस कार्यकाल में अपने पद पर रहते हुए अपनी आमदन से 1.71 करोड़ रुपये का अधिक खर्च किया गया जोकि उनकी असल आमदन से लगभग 71 फीसदी अधिक बनता है। इसके अलावा सरकारी गाड़ियों के गलत प्रयोग करने संबंधी कई गंभीर आरोप हैं। उन पर विजिलेंस के फेज-आठ थाने में केस दर्ज किया गया है।
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मामला राजनीति से प्रेरित है...
इस मौके पर आरोपी अकाली नेता के वकील बाबू सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि विजिलेंस की तरफ से अकाली नेता पर झूठा केस दर्ज किया गया। यह सारा मामला राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने बताया कि जत्थेदार पंजाब से बाहर किसी भी सूबे में कोई बेनामी संपत्ति नहीं बनाई है। उन्होंने कहा कि केस की सुनवाई दौरान बचाव पक्ष की तरफ से अपना पक्ष मजबूती से रखा जाएगा।
सरेंडर का स्टाइल बना चर्चा का विषय
हालांकि अकाली नेता जिस स्टाइल में अदालत में अदालत में सरेंडर किया है। वह काफी चर्चा में रहा। इस दौरान वह सफेद रंग के कपड़ों में संत की तरह अदालत में पहुंचे थे। जैसे ही मीडिया व अन्य जानकारों को उनकी खबर पहुंची सारे लोग वहां पर पहुंच गए।
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आरोपी पांच महीने से विजिलेंस से बच रहा था, सुप्रीम कोर्ट तक जा चुका था
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली। आय से अधिक संपत्ति के मामले में जमानत याचिका रद होने के बाद आखिर शुक्रवार को बादलों के करीब सीनियर अकाली नेता दियाल सिंह कौलीयांवाली ने जिला अदालत में सरेंडर कर दिया। अदालत ने आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वहीं, विजिलेंस अब आरोपी का प्रोडक्शन वारंट पर लाने की तैयारी में है। इसके लिए जल्दी ही एक एप्लीकेशन मोहाली की अदालत में दायर की जाएगी। क्योंकि जिस समय आरोपी ने सरेंडर किया, उस समय विजिलेंस के पास रिमांड लेने के लिए समय का अभाव था।
जानकारी के मुताबिक दियाल सिंह कौलीयांवाली केस दर्ज होने के करीब पांच महीन से विजिलेंस के साथ ही आंख मिचौली की गेम कर रहे थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने आरोपी को राहत देने से साफ मना कर दिया था। इसके बाद उन्होंने मोहाली जिला अदालत में एक एप्लीकेशन लगाई थी, लेकिन अदालत ने अर्जी को रद कर दिया था। इसके बाद से वह विजिलेंस से बचते। पता चला है कि अदालत में जिस समय उन्होंने आत्मसमर्पण किया। उस समय मोहाली विजिलेंस के डीएसपी धर्मपाल सिंह पहुंच गए थे। इसके साथ ही इस संबंधी बठिंडा की विजिलेंस को भी सूचित कर दिया गया था, लेकिन समय ज्यादा हो जाने के चलते बठिंडा विजिलेंस की टीम मोहाली अदालत में समय पर नहीं पहुंच सकी जिस कारण अदालत ने दियाल सिंह कौलीयांवाली को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
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जिक्रयोग है कि विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दियाल सिंह कौलीयांवाली के खिलाफ आय से अधिक स्रोतों से संपत्ति बनाने के आरोपों तहत केस दर्ज किया गया है। विजिलेंस द्वारा साल 2009 से लेकर 2014 के समय दौरान वाली की गई जांच में पता चला कि उसके द्वारा इस कार्यकाल में अपने पद पर रहते हुए अपनी आमदन से 1.71 करोड़ रुपये का अधिक खर्च किया गया जोकि उनकी असल आमदन से लगभग 71 फीसदी अधिक बनता है। इसके अलावा सरकारी गाड़ियों के गलत प्रयोग करने संबंधी कई गंभीर आरोप हैं। उन पर विजिलेंस के फेज-आठ थाने में केस दर्ज किया गया है।
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मामला राजनीति से प्रेरित है...
इस मौके पर आरोपी अकाली नेता के वकील बाबू सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि विजिलेंस की तरफ से अकाली नेता पर झूठा केस दर्ज किया गया। यह सारा मामला राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने बताया कि जत्थेदार पंजाब से बाहर किसी भी सूबे में कोई बेनामी संपत्ति नहीं बनाई है। उन्होंने कहा कि केस की सुनवाई दौरान बचाव पक्ष की तरफ से अपना पक्ष मजबूती से रखा जाएगा।
सरेंडर का स्टाइल बना चर्चा का विषय
हालांकि अकाली नेता जिस स्टाइल में अदालत में अदालत में सरेंडर किया है। वह काफी चर्चा में रहा। इस दौरान वह सफेद रंग के कपड़ों में संत की तरह अदालत में पहुंचे थे। जैसे ही मीडिया व अन्य जानकारों को उनकी खबर पहुंची सारे लोग वहां पर पहुंच गए।