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आफिस व तहसीलों में रुक गया काम, लोग आए आफत में
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हड़ताल : डीसी ऑफिस व तहसीलों में अटके लोगों के काम
- सरकार के विरोध में मुलाजिम गए पांच दिवस कलम छोड़ हड़ताल पर
- पूरा दिन लोग होते रहे परेशान, मुलाजिमों ने मांगा सहयोग
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली। सरकार की नीतियों के विरोध में बुधवार से कर्मचारियों की पांच दिवसीय कलम छोड़ हड़ताल शुरू हो गई। इस हड़ताल में सभी सरकारी, अर्ध सरकारी व बोर्ड-निगमों के कर्मचारी शामिल रहे। हड़ताल पर गए कर्मचारी डीए की बकाया राशि सहित कुछ अन्य मांगों को लेकर सरकार की कारगुजारी से नाराज हैं। पटियाला में आंदोलनकारी अध्यापक नेताओं पर केस दर्ज करने से भी कर्मचारियों में रोष है। वहीं हड़ताल के चलते डीसी ऑफिस और तहसीलों में लोगों के काम अटक गए हैं। अब उन्हें पांच दिन तक परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
डीसी दफ्तर कर्मचारी यूनियन के जिला प्रधान अशोक कुमार के नेतृत्व में डीसी ऑफिस, तहसील दफ्तर सहित अन्य सरकारी कर्मचारियों ने कलम छोड़ हड़ताल करके धरना दिया। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि कर्मचारियों के लिए 6 प्रतिशत डीए की घोषणा तो केंद्र सरकार की तर्ज पर कर दी गई है, लेकिन पंजाब की कैप्टन सरकार एरियर देने से पीछे हट रही है। वक्ताओं का कहना था कि वो रैलियां और हड़ताल कर जनसेवाओं को प्रभावित नहीं करना चाहते, लेकिन सरकार की जन विरोधी नीतियों के चलते उन्हें काम बंद कर हड़ताल के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उनका कहना था कि कांग्रेस ने पंजाब विधानसभा चुनाव के समय वादा किया था कि पंजाब में सरकार आने पर पे कमीशन की सिफारिशों को 15 दिन में लागू किया जाएगा। कर्मचारी वर्ग ने कांग्रेस पर विश्वास कर उसकी सरकार पंजाब में बनवाई थी, लेकिन सत्ता में आते ही कांग्रेस ने कर्मचारियों के साथ धोखा किया। अब आने वाले लोकसभा चुनावों में कर्मचारी वर्ग कांग्रेस का विरोध करेगा और कांग्रेस के जनविरोधी चेहरे को आम जनता तक पहुंचाया जाएगा। इस मौके यूनियन के जिला जनरल सचिव हरमिंदर सिंह चीमा, गुरशरन सिंह, विजय प्रभाकर, धर्मेंद्र पाल, मनोज कुमार, बलबीर सिंह, जगनंदन सिंह, कुलदीप सिंह, चरनजीत कौर, हरजीत कौर, हरजिंदर कौर, करमजीत कौर, हरचरन कौर, यादविंदर कौर, सोनिका मेहता, अमनदीप कौर सहित अन्य मौजूद थे।
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- सरकार के विरोध में मुलाजिम गए पांच दिवस कलम छोड़ हड़ताल पर
- पूरा दिन लोग होते रहे परेशान, मुलाजिमों ने मांगा सहयोग
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली। सरकार की नीतियों के विरोध में बुधवार से कर्मचारियों की पांच दिवसीय कलम छोड़ हड़ताल शुरू हो गई। इस हड़ताल में सभी सरकारी, अर्ध सरकारी व बोर्ड-निगमों के कर्मचारी शामिल रहे। हड़ताल पर गए कर्मचारी डीए की बकाया राशि सहित कुछ अन्य मांगों को लेकर सरकार की कारगुजारी से नाराज हैं। पटियाला में आंदोलनकारी अध्यापक नेताओं पर केस दर्ज करने से भी कर्मचारियों में रोष है। वहीं हड़ताल के चलते डीसी ऑफिस और तहसीलों में लोगों के काम अटक गए हैं। अब उन्हें पांच दिन तक परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
डीसी दफ्तर कर्मचारी यूनियन के जिला प्रधान अशोक कुमार के नेतृत्व में डीसी ऑफिस, तहसील दफ्तर सहित अन्य सरकारी कर्मचारियों ने कलम छोड़ हड़ताल करके धरना दिया। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि कर्मचारियों के लिए 6 प्रतिशत डीए की घोषणा तो केंद्र सरकार की तर्ज पर कर दी गई है, लेकिन पंजाब की कैप्टन सरकार एरियर देने से पीछे हट रही है। वक्ताओं का कहना था कि वो रैलियां और हड़ताल कर जनसेवाओं को प्रभावित नहीं करना चाहते, लेकिन सरकार की जन विरोधी नीतियों के चलते उन्हें काम बंद कर हड़ताल के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उनका कहना था कि कांग्रेस ने पंजाब विधानसभा चुनाव के समय वादा किया था कि पंजाब में सरकार आने पर पे कमीशन की सिफारिशों को 15 दिन में लागू किया जाएगा। कर्मचारी वर्ग ने कांग्रेस पर विश्वास कर उसकी सरकार पंजाब में बनवाई थी, लेकिन सत्ता में आते ही कांग्रेस ने कर्मचारियों के साथ धोखा किया। अब आने वाले लोकसभा चुनावों में कर्मचारी वर्ग कांग्रेस का विरोध करेगा और कांग्रेस के जनविरोधी चेहरे को आम जनता तक पहुंचाया जाएगा। इस मौके यूनियन के जिला जनरल सचिव हरमिंदर सिंह चीमा, गुरशरन सिंह, विजय प्रभाकर, धर्मेंद्र पाल, मनोज कुमार, बलबीर सिंह, जगनंदन सिंह, कुलदीप सिंह, चरनजीत कौर, हरजीत कौर, हरजिंदर कौर, करमजीत कौर, हरचरन कौर, यादविंदर कौर, सोनिका मेहता, अमनदीप कौर सहित अन्य मौजूद थे।
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