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जलभराव से निपटने को निगम ने शुरू किया नया सर्वे
Updated Wed, 07 Mar 2018 02:00 AM IST
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जलभराव से निपटने को निगम ने शुरू किया नया सर्वे
पूरे शहर में जलभराव वाली जगह और कारणों की हो रही पड़ताल
सर्वे में तीन चीजों पर है फोकस, आने वाले हफ्ते में पूरा होगा सर्वे
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली।
शहर को इस बार जलभराव से बचाने के लिए नगर निगम प्लानिंग से जुट गया है। इस कड़ी में निगम एक साथ कई सर्वे करवा रहा है, जिनकी वजह से शहर में जलभराव हुआ और लोगों का लाखों रुपये का नुकसान हुआ था। उम्मीद है कि यह सर्वे आने वाले हफ्ते में पूरा हो जाएगा।
इसके बाद निगम के तकनीकी माहिर अपनी रिपोर्ट बनाएंगे। फिर इस दिशा में काम शुरू कर दिया जाएगा। नगर निगम के कमिश्नर संदीप हंस ने सर्वे करवाने की पुष्टि की है।
कमिश्नर ने बताया कि इस बार उनकी कोशिश यही है कि शहर में जलभराव की समस्या न आए। नगर निगम इस समस्या का पक्का हल निकालने की तैयारी में जुट गया है। इस दौरान होने वाले सर्वे में तीन मुख्य चीजों पर नगर निगम का फोकस है, जिसमें सड़कों का लेवल, कॉजवे और सेंटर वर्ग में गेप बनाने का काम शामिल है। क्योंकि गत बरसात के दिनों में यह बात देखने को मिली थी कि शहर के विभिन्न रिहायशी इलाकों में सड़कों का लेवल काफी ऊंचा हो गया। ऐसे में पानी सीधा लोगों के घरों में घुस जाता है। कुछ इलाकों में मुख्य सड़क का लेवल अंदरूनी सड़कों से काफी ऊंचा हो गया है। सड़क के सेंटर में टाइल आदि लगे होने के कारण पानी आगे नहीं जा रहा था। इससे भी जलभराव ज्यादा हुआ था। नगर निगम द्वारा इसकी भी गहनता से सर्वे किया जा रहा है। इसके अलावा कॉजेव बनाए जाने जगहों की भी नगर निगम द्वारा निशानदेही की जा रही है। जिसके बाद निगम द्वारा यह काम शुरू कराया जाएगा।
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इसके अलावा नगर निगम द्वारा रोड गलियों और ड्रेनेज लाइन की सफाई से लेकर अन्य सभी कार्य भी किए जा रहे हैं। नगर निगम इस बार किसी तरह का रिस्क लेने के पक्ष में नहीं है।
बरसात से पहले पूरा होगा काम
नगर निगम के अधिकारियों की माने तो इस बार बाढ़ और जलभराव से बचने के लिए प्रबंध किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि बरसात शुरू होने से पहले सारा काम पूरा हो जाएगा। निगम इस तरह काम करने की योजना बना रहा है, जिससे निकट भविष्य में भी शहर को इसका फायदा मिले। वहीं, शहर की सुंदरता से भी किसी तरह का खिलवाड़ न हो।
आईआईटी मुंबई व पेक की टीमें कर चुकी हैं सर्वे
शहर को जलभराव से बचाने के लिए गमाडा और नगर निगम ने अपने स्तर पर कई काम किए हैं। कुछ समय पहले गमाडा द्वारा जलभराव से निपटने के लिए आईआईटी मुंबई की टीम से सर्वे कराया गया था। निगम ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज पेक से सर्वे करवाया था। दोनों एजेंसियों की तरफ से कुछ सुझाव भी दिए गए थे, जिस पर कुछ काम भी दोनों संस्थाओं द्वारा किया गया। इसके बाद भी प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया।
90 मिनट की बारिश में पानी में डूब गया मोहाली
शहर में जलभराव की समस्या करीब पंद्रह वर्षों से है। 2002 में भी यह समस्या आई थी, उस समय भी शहर पानी में डूब गया था। जिसके बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने लोगों को इस समस्या से निकालने के लिए तत्कालीन नगर परिषद को प्लान तैयार करने के लिए कहा था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। जिसके बाद इस संबंध में अवमानना की याचिका भी दायर की गई थी।
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पूरे शहर में जलभराव वाली जगह और कारणों की हो रही पड़ताल
सर्वे में तीन चीजों पर है फोकस, आने वाले हफ्ते में पूरा होगा सर्वे
अमर उजाला ब्यूरो
मोहाली।
शहर को इस बार जलभराव से बचाने के लिए नगर निगम प्लानिंग से जुट गया है। इस कड़ी में निगम एक साथ कई सर्वे करवा रहा है, जिनकी वजह से शहर में जलभराव हुआ और लोगों का लाखों रुपये का नुकसान हुआ था। उम्मीद है कि यह सर्वे आने वाले हफ्ते में पूरा हो जाएगा।
इसके बाद निगम के तकनीकी माहिर अपनी रिपोर्ट बनाएंगे। फिर इस दिशा में काम शुरू कर दिया जाएगा। नगर निगम के कमिश्नर संदीप हंस ने सर्वे करवाने की पुष्टि की है।
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कमिश्नर ने बताया कि इस बार उनकी कोशिश यही है कि शहर में जलभराव की समस्या न आए। नगर निगम इस समस्या का पक्का हल निकालने की तैयारी में जुट गया है। इस दौरान होने वाले सर्वे में तीन मुख्य चीजों पर नगर निगम का फोकस है, जिसमें सड़कों का लेवल, कॉजवे और सेंटर वर्ग में गेप बनाने का काम शामिल है। क्योंकि गत बरसात के दिनों में यह बात देखने को मिली थी कि शहर के विभिन्न रिहायशी इलाकों में सड़कों का लेवल काफी ऊंचा हो गया। ऐसे में पानी सीधा लोगों के घरों में घुस जाता है। कुछ इलाकों में मुख्य सड़क का लेवल अंदरूनी सड़कों से काफी ऊंचा हो गया है। सड़क के सेंटर में टाइल आदि लगे होने के कारण पानी आगे नहीं जा रहा था। इससे भी जलभराव ज्यादा हुआ था। नगर निगम द्वारा इसकी भी गहनता से सर्वे किया जा रहा है। इसके अलावा कॉजेव बनाए जाने जगहों की भी नगर निगम द्वारा निशानदेही की जा रही है। जिसके बाद निगम द्वारा यह काम शुरू कराया जाएगा।
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इसके अलावा नगर निगम द्वारा रोड गलियों और ड्रेनेज लाइन की सफाई से लेकर अन्य सभी कार्य भी किए जा रहे हैं। नगर निगम इस बार किसी तरह का रिस्क लेने के पक्ष में नहीं है।
बरसात से पहले पूरा होगा काम
नगर निगम के अधिकारियों की माने तो इस बार बाढ़ और जलभराव से बचने के लिए प्रबंध किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि बरसात शुरू होने से पहले सारा काम पूरा हो जाएगा। निगम इस तरह काम करने की योजना बना रहा है, जिससे निकट भविष्य में भी शहर को इसका फायदा मिले। वहीं, शहर की सुंदरता से भी किसी तरह का खिलवाड़ न हो।
आईआईटी मुंबई व पेक की टीमें कर चुकी हैं सर्वे
शहर को जलभराव से बचाने के लिए गमाडा और नगर निगम ने अपने स्तर पर कई काम किए हैं। कुछ समय पहले गमाडा द्वारा जलभराव से निपटने के लिए आईआईटी मुंबई की टीम से सर्वे कराया गया था। निगम ने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज पेक से सर्वे करवाया था। दोनों एजेंसियों की तरफ से कुछ सुझाव भी दिए गए थे, जिस पर कुछ काम भी दोनों संस्थाओं द्वारा किया गया। इसके बाद भी प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पाया।
90 मिनट की बारिश में पानी में डूब गया मोहाली
शहर में जलभराव की समस्या करीब पंद्रह वर्षों से है। 2002 में भी यह समस्या आई थी, उस समय भी शहर पानी में डूब गया था। जिसके बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने लोगों को इस समस्या से निकालने के लिए तत्कालीन नगर परिषद को प्लान तैयार करने के लिए कहा था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। जिसके बाद इस संबंध में अवमानना की याचिका भी दायर की गई थी।