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Punjab: नशामुक्त मरीजों को मिलेगी फ्री स्किल ट्रेनिंग; मान सरकार ने किसानों को दी बड़ी राहत, कपास के दाम बढ़े

Fri, 05 Dec 2025 09:02 PM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लुधियाना
अमर उजाला नेटवर्क, लुधियाना Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 05 Dec 2025 09:02 PM IST
सार

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के सीधे और सख्त आदेशों पर, राज्य में नशे के खिलाफ शुरू की गई निर्णायक लड़ाई ने 9 महीने पूरे कर लिए हैं और इसके बड़े नतीजे दिख रहे हैं।

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War against drugs: Campaign gains momentum, a major step by the Mann government
मुख्यमंत्री भगवंत मान। - फोटो : संवाद

विस्तार

जो युवा कभी नशे की दलदल में थे, आज वही पंजाब के उज्ज्वल भविष्य के निर्माता बनने को तैयार हैं। यह कोई सपना नहीं, बल्कि पंजाब सरकार के महत्वाकांक्षी अभियान 'युद्ध नशा विरुद्ध' की जमीनी हकीकत है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने सिर्फ नशा तस्करों पर नकेल ही नहीं कसी है, बल्कि नशा छोड़ने वाले हमारे युवाओं के लिए सम्मान और स्वरोजगार का मार्ग भी प्रशस्त किया है।  वहीं, मान सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी है। सक्रिय पहल से कपास के दाम ₹5,700 से सीधे ₹7,500+ तक पहुंचे।

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पंजाब में नशा बेचने वालों का बुरा समय आ गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के सीधे और सख्त आदेशों पर, राज्य में नशे के खिलाफ शुरू की गई निर्णायक लड़ाई ने 9 महीने पूरे कर लिए हैं और इसके बड़े नतीजे दिख रहे हैं। 1 मार्च 2025 से अब तक, पंजाब पुलिस ने रिकॉर्ड कार्रवाई करते हुए 26,256 केस दर्ज किए हैं और 38,687 नशा तस्करों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान, 1714 किलोग्राम से अधिक हेरोइन समेत बहुत सारा नशीला सामान जब्त किया गया है। ये आंकड़े दिखाते हैं कि सरकार नशे को बिल्कुल बर्दाश्त न करने की नीति पर कायम है और नशे के जाल को खत्म करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
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कड़ी कार्रवाई के साथ ही, सरकार सुधार और रोजगार को जोड़कर एक दोहरी रणनीति पर काम कर रही है। इसी कड़ी में, लुधियाना के जिला प्रशासन ने डेयरी विकास और स्वास्थ्य विभाग की मदद से, जगरांव के सरकारी पुनर्वास केंद्र में 10 दिन का हुनर सिखाने का खास कार्यक्रम शुरू किया है। इस पहल का मकसद, नशा छुड़ाने का इलाज करा रहे नौजवानों को पक्की कमाई के मौके देना है ताकि वे पैसों के लिए वापस नशे के दलदल में न फंसें।
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उपायुक्त हिमांशु जैन ने इस पहल को पूरा सुधार (होलिस्टिक पुनर्वास) की दिशा में एक बड़ा और इंसानियत भरा कदम बताया। उन्होंने साफ कहा कि हम पक्का कर रहे हैं कि जो भी व्यक्ति नशे को हराकर बाहर आया है, वह गरीबी या काम न मिलने की वजह से वापस नशे की तरफ न फिसले। इसी सोच के साथ, डेयरी विकास विभाग के उप निदेशक सुरिंदर सिंह ने उद्घाटन के दिन युवाओं को डेयरी फार्मिंग (पशुपालन) और इससे जुड़े कामों की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी। 

अधिकारियों का मानना है कि ये हुनर ठीक हो रहे लोगों को खुद का काम शुरू करने और आर्थिक रूप से आजाद होने में मदद करेंगे, जिससे उनका सुधार पक्का हो सके। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद, जो लोग काबिल होंगे उन्हें छोटी डेयरी यूनिट लगाने के लिए सरकारी योजनाओं के तहत बैंक से लोन और पैसे की मदद भी दी जाएगी। यह पहल सिविल सर्जन डॉ. रमनदीप कौर, लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर गुरदेव सिंह कंग, और केंद्र प्रभारी डॉ. विवेक गोयल जैसे खास अधिकारियों की देखरेख में चल रही है।

पंजाब सरकार मानती है कि हुनर सिखाने से ही सुधार को एक नया मौका बनाया जा सकता है। यह कार्यक्रम सिर्फ हुनर सिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं को आत्मविश्वास की पूंजी देता है, जिससे वे सम्मान के साथ समाज की मुख्यधारा में लौट सकें। जब उनके हाथ में पक्का काम होता है, तो उन्हें किसी भी मजबूरी या लत की तरफ मुड़ना नहीं पड़ता। इस तरह यह पहल न केवल उनका जीवन सुधारती है, बल्कि नशे के पूरे दुष्चक्र को ही जड़ से तोड़ देती है, और उन्हें एक नई पहचान दिलाती है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान जी की अगुवाई में, पंजाब सरकार ने दिखाया है कि वह इरादों की पक्की है। सरकार ने न केवल नशा बेचने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं, बल्कि उन नौजवानों के प्रति भी संवेदनशीलता दिखाई है जो नशे की चपेट में आ गए थे। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अपने बच्चों को सुरक्षित भविष्य दे, और इसी जिम्मेदारी को समझते हुए, उसने नशे से बचाने के लिए एक निर्णायक लड़ाई लड़ी है और उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने के लिए बेहतरीन मौके दिए हैं।

पंजाब की अगली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित हो रहा है, जब सरकार नशे के कारोबारियों पर कड़ा एक्शन लेती है (जैसे 38 हजार से ज्यादा तस्करों को पकड़ा गया है) और साथ ही, हमारे युवाओं को हुनर सिखाकर, काम देकर और इज्जत की जिंदगी देकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करती है, तो यह पूरे समाज के लिए एक बड़ी और अच्छी बात है। यह कोशिश सिर्फ एक परेशानी खत्म करने तक नहीं रुकती, बल्कि यह पंजाब को फिर से रंगला पंजाब, और खुशहाल बनाने की एक मजबूत शुरुआत है।

मान सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी
पंजाब में सीसीआई की सक्रिय भागीदारी के कारण, कपास की कीमतों में जबरदस्त सुधार हुआ। पंजाब मंडी बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, नरमा कपास का औसत दाम ₹7,500 प्रति क्विंटल से भी ज्यादा हो गया है, जो कि ₹7,710 प्रति क्विंटल के एमएसपी के बेहद करीब है। वहीं, देसी कपास की कीमतों में भी भारी उछाल देखने को मिला है। यह किसानों के लिए एक बड़ी राहत है, जिन्होंने पहले कम दाम पर अपनी फसल बेचने की मजबूरी महसूस की थी। मान सरकार की पहल से वे अब अपनी मेहनत का सही मूल्य पा रहे हैं।


शुरुआत में जब कपास मंडियों में आना शुरू हुआ, तो निजी व्यापारी इसे ₹5,700 से ₹6,800 प्रति क्विंटल के बीच खरीद रहे थे। यह दाम MSP से काफी कम थे, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई थी। इस मुश्किल घड़ी में, मुख्यमंत्री भगवंत मान के निर्देश पर, राज्य सरकार ने तुरंत केंद्र सरकार की एजेंसी कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआई) पर बड़े पैमाने पर खरीद शुरू करने के लिए दबाव डाला।

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