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साथियों के समर्थन में टंकी पर चढ़े 12 अध्यापक
ब्यूरो/अमर उजाला, बठिंडा
Updated Sun, 05 Jun 2016 09:55 PM IST
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बठिंडा में टंकी पर चढ़े अध्यापक
- फोटो : अमर उजाला
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ईजीएस/एआईई/एसटीआर अध्यापक रविवार को बठिंडा-अमृतसर नेशनल हाईवे स्थित गांव गोनियाना कलां की वाटर वर्कर्स टंकी पर चढ़ गए। इसी यूनियन के नेता बीते 22 दिनों से जैतो के पास स्थित गांव सेवेवाला में टंकी पर चढे़ हुए हैं।
वहां पर किसी भी प्रशासनिक अधिकारी की ओर से उनकी सुनवाई न करने के रोष में वे गोनियाना कलां की वाटर वर्कर्स टंकी पर चढ़ गए। टंकी पर चढे़ करीब 12 अध्यापकों ने हाथों में पेट्रोल की बोतलें ले रखी हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
पुलिस ने मौके पर पहुंच अध्यापकों को जबरदस्ती टंकी से उतारने का प्रयास किया, लेकिन वह नाकाम रही। अध्यापकों ने मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने गांव के सरपंच छिंदर सिंह व अन्य लोगों को उनकी किसी तरह से भी कोई सहायता न करने के लिए कहा है।
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ईजीएस/एआईई/एसटीआर अध्यापक यूनियन के नेता अंग्रेज सिंह और गगन ने बताया कि एसपी (डी) ने यूनियन के साथ फोन पर संपर्क कर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के साथ 15 जून को पेनल मीटिंग करवाने का विश्वास दिलाया है। वहीं वह अपना संघर्ष तब तक जारी रखेंगे जब तक पंजाब सरकार उनको रेगुलर भर्ती नहीं करती। करीब सौ अध्यापकों ने बताया कि उनके घरेलू हालात ऐसे हो चुके हैं कि उनके पास संघर्ष के अलावा और कोई चारा नहीं था।
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वहां पर किसी भी प्रशासनिक अधिकारी की ओर से उनकी सुनवाई न करने के रोष में वे गोनियाना कलां की वाटर वर्कर्स टंकी पर चढ़ गए। टंकी पर चढे़ करीब 12 अध्यापकों ने हाथों में पेट्रोल की बोतलें ले रखी हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।
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पुलिस ने मौके पर पहुंच अध्यापकों को जबरदस्ती टंकी से उतारने का प्रयास किया, लेकिन वह नाकाम रही। अध्यापकों ने मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने गांव के सरपंच छिंदर सिंह व अन्य लोगों को उनकी किसी तरह से भी कोई सहायता न करने के लिए कहा है।
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ईजीएस/एआईई/एसटीआर अध्यापक यूनियन के नेता अंग्रेज सिंह और गगन ने बताया कि एसपी (डी) ने यूनियन के साथ फोन पर संपर्क कर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के साथ 15 जून को पेनल मीटिंग करवाने का विश्वास दिलाया है। वहीं वह अपना संघर्ष तब तक जारी रखेंगे जब तक पंजाब सरकार उनको रेगुलर भर्ती नहीं करती। करीब सौ अध्यापकों ने बताया कि उनके घरेलू हालात ऐसे हो चुके हैं कि उनके पास संघर्ष के अलावा और कोई चारा नहीं था।