लुधियाना: महिलाओं के लिए दावे बड़े-बड़े पर टिकट देने को कोई राजी नहीं, 14 विधानसभा सीटों पर मात्र तीन महिला उम्मीदवार
पंजाब विधानसभा चुनाव में सबसे पहले आम आदमी पार्टी के कनवीनर और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वादा किया था कि हर महिला को एक हजार रुपये महीना दिया जाएगा। अकाली दल ने वादा किया कि नीले कार्ड होल्डर महिलाओं को दो हजार रुपये दिए जाएंगे।
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पंजाब विधानसभा चुनाव फरवरी महीने में होने वाले हैं। हर राजनीतिक पार्टी महिलाओं के वोट बटोरने के लिए कई तरह के वादे कर रही है। कोई एक हजार रुपये देने की बात कर रही है तो कोई दो हजार। वहीं जमीनी हकीकत देखी जाए तो पार्टियों को महिलाओं पर ज्यादा भरोसा नहीं है। पार्टियां महिलाओं को चुनाव मैदान में उतारने से डरती हैं। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लुधियाना की 14 विधानसभा सीटों पर सिर्फ तीन महिला उम्मीदवारों को उतारा गया है।
दो टिकट आम आदमी पार्टी की तरफ से दी गई हैं व एक अकाली दल ने दी है। आम आदमी पार्टी ने जगरांव से सरबजीत कौर माणुके और हलका साउथ से राजिंदरपाल कौर छीना को मैदान में उतारा है। अकाली दल ने खन्ना से जसदीप कौर को टिकट दिया है।
पंजाब विधानसभा चुनाव में सबसे पहले आम आदमी पार्टी के कनवीनर और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वादा किया था कि हर महिला को एक हजार रुपये महीना दिया जाएगा। अकाली दल ने वादा किया कि नीले कार्ड होल्डर महिलाओं को दो हजार रुपये दिए जाएंगे। कांग्रेस की तरफ से नवजोत सिंह सिद्धू ने भी दो हजार रुपये देने की बात कही थी। वहीं कांग्रेस की बात की जाए तो नौ विधानसभा क्षेत्रों में किसी भी महिला टिकट नहीं दी गई है। भाजपा ने भी जो पांच सीटें जारी की हैं उनमें कोई महिला नहीं है।
सबसे बड़े निगम में 50 प्रतिशत महिला पार्षद
पंजाब के सबसे बड़े नगर निगम में इस समय 95 वार्ड हैं। यहां पहले 75 वार्ड होते थे, लेकिन 2018 में नगर निगम की तरफ से 95 वार्ड कर दिए गए थे। कांग्रेस की तरफ से नगर निगम में 50 प्रतिशत महिला उम्मीदवार करने का वादा किया गया था और 50 प्रतिशत महिला वार्ड भी बना दिए। इस समय नगर निगम की बात की जाए तो 50 प्रतिशत महिला पार्षद तो हैं ही, साथ ही एक महिला पार्षद को डिप्टी मेयर भी बनाया हुआ है।
सिर्फ नाम की हैं महिला पार्षद
नगर निगम लुधियाना में 50 प्रतिशत पार्षद तो हैं, लेकिन वह भी फील्ड में कम उतरती हैं। कहा यह जा सकता है कि यह महिला पार्षद सिर्फ रबड़ की स्टैंप ही बनकर रह गई हैं। कुछ महिला पार्षद हैं जो फील्ड में पूरी तरह से उतर कर काम करती हैं। बाकी महिला पार्षदों का भाई काम देखता है या फिर पिता। इसके अलावा कुछ महिला पार्षदों के पिता खुद के नाम के आगे पार्षद लिखवाकर काम कर रहे हैं।