{"_id":"a1b7536e94ac55dae2fa42f20cc0b76e","slug":"cigrette-petrol-vat-less-smuggling","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिगरेट की तस्करी रोकने को वैट कम, पेट्रोल पर क्यों नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिगरेट की तस्करी रोकने को वैट कम, पेट्रोल पर क्यों नहीं
अमर उजाला, लुधियाना
Updated Tue, 21 Jan 2014 10:15 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब सरकार द्वारा सिगरेट की तस्करी रोकने के मकसद से एक झटके में वैट की दर में करीब 35 फीसदी की कमी करने पर पेट्रोल पंप डीलर भड़क गए हैं।
एक तरफ सिगरेट स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, सार्वजनिक स्थल पर सिगरेट पीने पर पाबंदी है, कई शहरों को स्मोक फ्री जोन घोषित करने की तैयारी चल रही है, बावजूद इसके राजस्व बढ़ाने के लिए सिगरेट पर वैट में भारी कमी की जा रही है। वहीं आम आदमी की जरूरत पेट्रोल की लगातार अनदेखी की जा रही है।
डीलरों का तर्क है कि सूबे में पड़ोसी राज्यों के मुकाबले पेट्रोल की कीमत अधिक वैट के कारण छह से सात रुपये प्रति लीटर अधिक है। इसके चलते हरियाणा, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, राजस्थान की सीमा के साथ लगते करीब सात सौ पेट्रोल पंप बंदी के कगार पर हैं।
सीमावर्ती जिलों में लगे पंप अपने खर्च तक नहीं निकाल पा रहे हैं। इस संबंध में पंजाब पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन पिछले लंबे समय से संघर्ष कर रही है, लेकिन सरकार ने कोई राहत नहीं दी है। अब सिगरेट पर वैट में 35 फीसदी की कमी को देखते हुए पेट्रोल पंप डीलर भी नए सिरे से सरकार का दरवाजा खटखटाएंगे।
विज्ञापन
हरियाणा में पेट्रोल पर वैट 20 फीसदी, चंडीगढ़ में 22 फीसदी और पंजाब में वैट, सरचार्ज और एक रुपये प्रति लीटर का इंफ्रास्ट्रक्चर सेस लगा कर कुल टैक्स 33.5 फीसदी है। अधिक टैक्स के कारण पड़ोसी राज्यों में पेट्रोल काफी सस्ता है। इसलिए पेट्रोल की तस्करी जमकर हो रही है।
पंजाब पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन के स्टेट प्रेसिडेंट जेपी खन्ना का तर्क है कि लोग अपने वाहन भर कर और टैंकरों में भी सस्ता पेट्रोल सूबे में ला रहे हैं। नतीजतन सूबे में सीमा पर लगे तमाम पेट्रोल पंपों के सामने अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है। खन्ना कहते हैं कि पिछले साल ही सरकार ने सिगरेट पर वैट बढ़ा कर 55 फीसदी किया था, जबकि हरियाणा में यह 20 फीसदी है।
सिगरेट की तस्करी देखते हुए सरकार ने इसे एक साल में ही कम करके हरियाणा के बराबर कर दिया, फिर पेट्रोल के मामले में सरकार दोहरी नीति क्यों अपना रही है। अधिकतम वैट के कारण पंजाब के पेट्रोल पंप कारोबारियों को जबरदस्त नुकसान हो रहा है।
खन्ना ने कहा कि इस संबंध में एसोसिएशन शीघ्र ही सरकार के पास जाएगी, यदि सरकार ने राहत न दी तो संघर्ष का रास्ता भी अख्तियार किया जा सकता है। खन्ना का दावा है कि पेट्रोल पर वैट हरियाणा के बराबर करते ही पंजाब का पेट्रोल से मिलने वाला राजस्व कई गुणा तक उछल जाएगा। पंपों पर भी रौनक लौट आएगी और पंजाब में पेट्रोल की बिक्री में भी इजाफा होगा।
विज्ञापन
एक तरफ सिगरेट स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, सार्वजनिक स्थल पर सिगरेट पीने पर पाबंदी है, कई शहरों को स्मोक फ्री जोन घोषित करने की तैयारी चल रही है, बावजूद इसके राजस्व बढ़ाने के लिए सिगरेट पर वैट में भारी कमी की जा रही है। वहीं आम आदमी की जरूरत पेट्रोल की लगातार अनदेखी की जा रही है।
डीलरों का तर्क है कि सूबे में पड़ोसी राज्यों के मुकाबले पेट्रोल की कीमत अधिक वैट के कारण छह से सात रुपये प्रति लीटर अधिक है। इसके चलते हरियाणा, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर, राजस्थान की सीमा के साथ लगते करीब सात सौ पेट्रोल पंप बंदी के कगार पर हैं।
विज्ञापन
सीमावर्ती जिलों में लगे पंप अपने खर्च तक नहीं निकाल पा रहे हैं। इस संबंध में पंजाब पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन पिछले लंबे समय से संघर्ष कर रही है, लेकिन सरकार ने कोई राहत नहीं दी है। अब सिगरेट पर वैट में 35 फीसदी की कमी को देखते हुए पेट्रोल पंप डीलर भी नए सिरे से सरकार का दरवाजा खटखटाएंगे।
विज्ञापन
हरियाणा में पेट्रोल पर वैट 20 फीसदी, चंडीगढ़ में 22 फीसदी और पंजाब में वैट, सरचार्ज और एक रुपये प्रति लीटर का इंफ्रास्ट्रक्चर सेस लगा कर कुल टैक्स 33.5 फीसदी है। अधिक टैक्स के कारण पड़ोसी राज्यों में पेट्रोल काफी सस्ता है। इसलिए पेट्रोल की तस्करी जमकर हो रही है।
पंजाब पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन के स्टेट प्रेसिडेंट जेपी खन्ना का तर्क है कि लोग अपने वाहन भर कर और टैंकरों में भी सस्ता पेट्रोल सूबे में ला रहे हैं। नतीजतन सूबे में सीमा पर लगे तमाम पेट्रोल पंपों के सामने अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है। खन्ना कहते हैं कि पिछले साल ही सरकार ने सिगरेट पर वैट बढ़ा कर 55 फीसदी किया था, जबकि हरियाणा में यह 20 फीसदी है।
सिगरेट की तस्करी देखते हुए सरकार ने इसे एक साल में ही कम करके हरियाणा के बराबर कर दिया, फिर पेट्रोल के मामले में सरकार दोहरी नीति क्यों अपना रही है। अधिकतम वैट के कारण पंजाब के पेट्रोल पंप कारोबारियों को जबरदस्त नुकसान हो रहा है।
खन्ना ने कहा कि इस संबंध में एसोसिएशन शीघ्र ही सरकार के पास जाएगी, यदि सरकार ने राहत न दी तो संघर्ष का रास्ता भी अख्तियार किया जा सकता है। खन्ना का दावा है कि पेट्रोल पर वैट हरियाणा के बराबर करते ही पंजाब का पेट्रोल से मिलने वाला राजस्व कई गुणा तक उछल जाएगा। पंपों पर भी रौनक लौट आएगी और पंजाब में पेट्रोल की बिक्री में भी इजाफा होगा।