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बरसात के समक्ष बौने दिखाई दिए गेहूं खरीद के सरकारी प्रबंध
Updated Tue, 10 Apr 2018 10:20 PM IST
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बारिश ने खोली प्रबंधों की पोल
बारिश के शुरू होते ही रुकी बोली, गेहूं संभालने में जुटे किसान
किसान संगठनों ने खरीद प्रबंधों के सरकारी दावों पर उठाए सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
सुनाम ऊधम सिंह वाला (संगरूर)।
जिले की सबसे बड़ी माने जाने वाली अनाज मंडी में सरकारी प्रबंधों की पोल मंगलवार को हुई बारिश ने खोल दी। बरसात के समक्ष सरकार के प्रबंध बौने दिखाई दिए और शेड टूटे होने के चलते किसान खुद ही गेहूं संभालने को विवश हो गए। जैसे ही बरसात शुरू हुई सरकारी खरीद तुरंत थम गई। मंडी में गेहूं खरीद का आगाज मंगलवार को ही हुआ था।
किसान संगठनों ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते आरोप लगाए कि वर्तमान सरकार भी किसानों के प्रति गंभीर नहीं है। किसानों के नाम पर सियासत हो रही है। भाकियू एकता उग्राहां के जिला सचिव दरबारा सिंह छाजला ने कहा कि अनाज मंडी की दयनीय हालत पिछले लंबे समय से बनी है। मंडी में पानी निकासी का प्रबंध नहीं है। टूटे शेड सरकार दावों की पोल खोल रहे हैं। मंडी के फर्श की हालत भी दयनीय है। मंडी के इस नाजुक हालात की कीमत आखिर में किसान को ही चुकानी पड रही है। गेहूं बेचने आए किसान दर्शन सिंह, जगदेव सिंह आदि ने कहा कि बरसात शुरू होते ही उनकी दिक्कतें बढ़ गईं। सरकारी बोली थम गई और उन्हें अपना गेहूं संभलाने में भारी दिक्कतें आईं।
इस संबंधी मार्केट कमेटी के सचिव अजीत सूद ने दावा किया कि अनाज मंडी में प्रबंध पूरे किए गए हैं। मंडी का एक शेड लंबे से टूटा है और इसके निर्माण् ाके लि मंडी बोर्ड को पत्र भेजा गया है। पानी निकासी के अस्थाई प्रबंध किए गए हैं। उन्होंने माना कि ज्यादा बरसात में ऐसे प्रबंधों में कमी नजर आने लगती है।
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बारिश के शुरू होते ही रुकी बोली, गेहूं संभालने में जुटे किसान
किसान संगठनों ने खरीद प्रबंधों के सरकारी दावों पर उठाए सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
सुनाम ऊधम सिंह वाला (संगरूर)।
जिले की सबसे बड़ी माने जाने वाली अनाज मंडी में सरकारी प्रबंधों की पोल मंगलवार को हुई बारिश ने खोल दी। बरसात के समक्ष सरकार के प्रबंध बौने दिखाई दिए और शेड टूटे होने के चलते किसान खुद ही गेहूं संभालने को विवश हो गए। जैसे ही बरसात शुरू हुई सरकारी खरीद तुरंत थम गई। मंडी में गेहूं खरीद का आगाज मंगलवार को ही हुआ था।
किसान संगठनों ने सरकार के दावों पर सवाल उठाते आरोप लगाए कि वर्तमान सरकार भी किसानों के प्रति गंभीर नहीं है। किसानों के नाम पर सियासत हो रही है। भाकियू एकता उग्राहां के जिला सचिव दरबारा सिंह छाजला ने कहा कि अनाज मंडी की दयनीय हालत पिछले लंबे समय से बनी है। मंडी में पानी निकासी का प्रबंध नहीं है। टूटे शेड सरकार दावों की पोल खोल रहे हैं। मंडी के फर्श की हालत भी दयनीय है। मंडी के इस नाजुक हालात की कीमत आखिर में किसान को ही चुकानी पड रही है। गेहूं बेचने आए किसान दर्शन सिंह, जगदेव सिंह आदि ने कहा कि बरसात शुरू होते ही उनकी दिक्कतें बढ़ गईं। सरकारी बोली थम गई और उन्हें अपना गेहूं संभलाने में भारी दिक्कतें आईं।
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इस संबंधी मार्केट कमेटी के सचिव अजीत सूद ने दावा किया कि अनाज मंडी में प्रबंध पूरे किए गए हैं। मंडी का एक शेड लंबे से टूटा है और इसके निर्माण् ाके लि मंडी बोर्ड को पत्र भेजा गया है। पानी निकासी के अस्थाई प्रबंध किए गए हैं। उन्होंने माना कि ज्यादा बरसात में ऐसे प्रबंधों में कमी नजर आने लगती है।
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