फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   ludhiana metro project took u turn

आर्थिक संकट में चूर हुआ लुधियाना मेट्रो का सपना

Wed, 25 Sep 2013 10:47 PM IST
अमर उजाला, लुधियाना
अमर उजाला, लुधियाना Updated Wed, 25 Sep 2013 10:47 PM IST
विज्ञापन
ludhiana metro project took u turn
आर्थिक संकट के कारण उपमुख्यमंत्री सुखबीर बादल का सूबे की आर्थिक राजधानी
विज्ञापन
में मेट्रो रेल चलाने का सपना फिलहाल चूर होता दिखाई दे रहा है।

अब सरकार ने लुधियाना में महंगी मेट्रो की बजाए तुर्की के इस्तांबुल शहर की तर्ज पर सस्ती बस रेपिड ट्रांजिट सिस्टम (बीआरटीएस) को लागू करने का फैसला किया है। इस प्रोजेक्ट पर तकरीबन सात सौ करोड़ रुपये का खर्च आएगा। बीआरटीएस प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाने के लिए सरकार ने निगम के साथ मिल कर कसरतें तेज कर दी हैं। मेट्रो के मुकाबले बीआरटीएम सिस्टम लागू होने से सरकार का खर्च 11,300 करोड़ रुपये बच जाएगा।
नगर निगम के कमिश्नर राहुल तिवारी का कहना है कि मेट्रो प्रोजेक्ट की लागत 12 हजार करोड़ रुपये पर पहुंच गई है।
केंद्र सरकार इसके लिए केवल दो हजार करोड़ रुपये देने पर हामी भर रही है। बाकी दस हजार करोड़ रुपये का इंतजाम राज्य सरकार को करना है, जोकि काफी बड़ी रकम है। दूसरे बीआरटीसी सिस्टम को शुरू करने में केवल 700 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। बीआरटीसी को भी मेट्रो वाले कारीडोर में ही शुरू किया जाएगा। हां, दूसरे चरण में मेट्रो पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल बस रेपिड सिस्टम को ही आगे बढ़ाया जाएगा।   
काबिलेजिक्र है कि 2007 के विधानसभा चुनावों में सुखबीर बादल ने लुधियाना की जनता को मेट्रो में सैर कराने का सपना दिखाया था। इस सिलसिले में दिल्ली मेट्रो रेल के साथ एक अनुबंध भी हो गया था। लेकिन इस दौरान प्रोजैक्ट की लागत 6600 करोड़ से उछल कर महंगाई की मार के चलते 12 हजार करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। इसलिए इस प्रोजेक्ट से फिलहाल सरकार ने हाथ खींच लिए हैं।

क्या है बीआरटीएस  
बस रेपिड ट्रांजिट सिस्टम को हाई केपेसिटी बस सिस्टम भी कहा जा सकता है। इस सिस्टम को चलाने के लिए तीन लेन की सड़क का होना अनिवार्य है। इनमें से दो लेन बीआरटीएस के लिए आरक्षित रहती हैं। इन लेन में अन्य कोई वाहन नहीं आ सकता। हर घंटे करीब एक दर्जन तक बसें इस रूट पर चलाई जा सकती हैं। अहमदाबाद, दिल्ली और देश के कई शहरों में ट्रैफिक समस्या के समाधान में यह सिस्टम कारगर साबित हुआ है। पहले चरण में लुधियाना में करीब 48 किलोमीटर के रूट पर यह सेवा शुरू करने की योजना है।

बीआरटीएस की लागत काफी कम
मेट्रो रेल से बीआरटीएस सिस्टम काफी सस्ता है। मेट्रो के निर्माण में प्रति किलोमीटर जहां ढाई सौ करोड़ रुपये या इससे अधिक का खर्च आता है, वहीं बीआरटीएस का रोड पंद्रह से 17 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से तैयार हो जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed