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Jalandhar News: मजीठिया पर विजिलेंस की कार्रवाई, माझा में अकाली दल को नहीं मिल रहा कद्दावर नेता
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अमर उजाला ब्यूरो
जालंधर। शिरोमणि अकाली दल में माझा के जरनैल को जाने वाले वाले बिक्रम सिंह मजीठिया पर विजिलेंस की कार्रवाई के बाद पार्टी को माझा में कोई कद्दावर नेता नहीं मिल रहा है, जो अकाली दल की रीढ़ की हड्डी बनकर पार्टी में जान फूंक सके। माझा का इलाका ही पंथक व शिअद का वोट बैंक रहा है।
माझा इलाके की 25 विधानसभा सीटों पर शिरोमणि अकाली दल को मजीठिया पर भरोसा था, बल्कि दोआबा में भी वह काफी सक्रिय थे। दोनों इलाकों में मजीठिया शिरोमणि अकाली दल का स्टार चेहरा रहे हैं। सक्रिय राजनीति में वह 2007 में आए और आते ही माझा के सेवा सिंह सेखवां (अब दिवंगत), रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा, रतन सिंह अजनाला, सुच्चा सिंह लंगाह, विरसा सिंह वल्टोहा और कैरों परिवार को किनारे लगा दिया। जो भी उनके रास्ते में आया उसे किनारे लगा दिया गया। 2012 में मजीठिया ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को लगभग 47 हजार वोटों से मात दी। प्रकाश सिंह बादल सरकार में वह कैबिनेट मंत्री बने और माझा के ‘जरनैल’ भी। तभी से विवादों का उनके साथ गहरा रिश्ता कायम हो गया जो पंजाब के छह हजार करोड़ के ड्रग कारोबार से सीधा जुड़ा।
दिवंगत सीएम प्रकाश सिंह बादल हमेशा अपने पुराने टकसाली अकाली नेताओं रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा, रतन सिंह अजनाला, सुच्चासिंह लंगाह, विरसा सिंह वल्टोहा, आदेश प्रताप कैरों पर खासा विश्वास करते थे, लेकिन मजीठिया की एंट्री से पूरा कुनबा बिखर गया। सेवा सिंह सेखवां का बेटा जगरूप सेखवां आप में शामिल हो चुके हैं। सुच्चा सिंह लंगाह पर एक महिला आरोप लगा चुकी है और उनको श्री अकाल तख्त साहब से सजा सुनाई जा चुकी है। विरसा सिंह वल्टोहा श्री अकाल तख्त साहब के जत्थेदार से विवाद के बाद पार्टी छोड़ चुके हैं। आदेश प्रताप कैरों को सुखबीर सिंह बादल पार्टी से निकल चुके हैं। अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल का पूरा दारोमदार बिक्रम मजीठिया के कंधों पर था। बुलारिया भी माझा से थे, लेकिन वह भी कांग्रेस में आ चुके हैं।
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बिक्रम मजीठिया ने माझा में आप के खिलाफ पूरा अभियान छेड़ रखा था, लेकिन अब मजीठिया के कानून पचड़ों में फंसने से अकाली दल माझा में सतह पर आ गया है। माझा में अकाली दल के पास एक ही विधायक है, वह बीबी गनीव कौर मजीठिया हैं, जो मजीठा इलाके से अकाली दल की विधायक हैं। वहीं, पंथक वोट अकाली दल से खिसक चुका है और सांसद भाई अमृतपाल सिंह खालसा की तरफ जा चुका है। माझा में प्रभाव रखने वाले दमदमी टकसाल के चीफ बाबा हरनाम सिंह धूमा ने भी अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल के खिलाफ झंडा उठा रखा है।
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जालंधर। शिरोमणि अकाली दल में माझा के जरनैल को जाने वाले वाले बिक्रम सिंह मजीठिया पर विजिलेंस की कार्रवाई के बाद पार्टी को माझा में कोई कद्दावर नेता नहीं मिल रहा है, जो अकाली दल की रीढ़ की हड्डी बनकर पार्टी में जान फूंक सके। माझा का इलाका ही पंथक व शिअद का वोट बैंक रहा है।
माझा इलाके की 25 विधानसभा सीटों पर शिरोमणि अकाली दल को मजीठिया पर भरोसा था, बल्कि दोआबा में भी वह काफी सक्रिय थे। दोनों इलाकों में मजीठिया शिरोमणि अकाली दल का स्टार चेहरा रहे हैं। सक्रिय राजनीति में वह 2007 में आए और आते ही माझा के सेवा सिंह सेखवां (अब दिवंगत), रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा, रतन सिंह अजनाला, सुच्चा सिंह लंगाह, विरसा सिंह वल्टोहा और कैरों परिवार को किनारे लगा दिया। जो भी उनके रास्ते में आया उसे किनारे लगा दिया गया। 2012 में मजीठिया ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी को लगभग 47 हजार वोटों से मात दी। प्रकाश सिंह बादल सरकार में वह कैबिनेट मंत्री बने और माझा के ‘जरनैल’ भी। तभी से विवादों का उनके साथ गहरा रिश्ता कायम हो गया जो पंजाब के छह हजार करोड़ के ड्रग कारोबार से सीधा जुड़ा।
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दिवंगत सीएम प्रकाश सिंह बादल हमेशा अपने पुराने टकसाली अकाली नेताओं रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा, रतन सिंह अजनाला, सुच्चासिंह लंगाह, विरसा सिंह वल्टोहा, आदेश प्रताप कैरों पर खासा विश्वास करते थे, लेकिन मजीठिया की एंट्री से पूरा कुनबा बिखर गया। सेवा सिंह सेखवां का बेटा जगरूप सेखवां आप में शामिल हो चुके हैं। सुच्चा सिंह लंगाह पर एक महिला आरोप लगा चुकी है और उनको श्री अकाल तख्त साहब से सजा सुनाई जा चुकी है। विरसा सिंह वल्टोहा श्री अकाल तख्त साहब के जत्थेदार से विवाद के बाद पार्टी छोड़ चुके हैं। आदेश प्रताप कैरों को सुखबीर सिंह बादल पार्टी से निकल चुके हैं। अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल का पूरा दारोमदार बिक्रम मजीठिया के कंधों पर था। बुलारिया भी माझा से थे, लेकिन वह भी कांग्रेस में आ चुके हैं।
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बिक्रम मजीठिया ने माझा में आप के खिलाफ पूरा अभियान छेड़ रखा था, लेकिन अब मजीठिया के कानून पचड़ों में फंसने से अकाली दल माझा में सतह पर आ गया है। माझा में अकाली दल के पास एक ही विधायक है, वह बीबी गनीव कौर मजीठिया हैं, जो मजीठा इलाके से अकाली दल की विधायक हैं। वहीं, पंथक वोट अकाली दल से खिसक चुका है और सांसद भाई अमृतपाल सिंह खालसा की तरफ जा चुका है। माझा में प्रभाव रखने वाले दमदमी टकसाल के चीफ बाबा हरनाम सिंह धूमा ने भी अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल के खिलाफ झंडा उठा रखा है।