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बाबा हरिवल्लभ सम्मेलन में बही सुर व ताल की गंगा
अमर उजाला, जालंधर
Updated Sat, 21 Dec 2013 10:45 PM IST
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कहर की सर्दी और ओलावृष्टि के बावजूद उत्तरी भारत के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल में सुर व ताल की ऐसी गंगा बही कि श्रोताओं को समय का अहसास ही नहीं हुआ।
समय था बाबा हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन का, जिसमें भारत के नामी गिरामी कलाकार अपनी प्रतिभा के जरिए श्रोताओं को संगीत की दुनिया में डुबकी लगवाने के लिए आए हुए थे। बाबा हरिवल्लभ संगीत महासभा की महासचिव पूर्णिमा बेरी व दीपक बाली ने आए हुए कलाकारों का अभिनंदन किया।
शनिवार को सम्मेलन की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई। इसमें एपीजे कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स की छात्राओं ने अपनी सुरीली आवाज से वंदना का उच्चारण किया। पिछले साल की विजेता अवतार कौर ने वोकल पर अपनी प्रतिभा को उजागर किया तो श्रोता मुग्ध हो गए।
वोकल पर डॉ. विजय राजपूर ने अपनी कला की प्रस्तुति दी, जिसमें उनका साथ तबला पर सुधीर पांडे व हरमोनियम पर पारोमित्ता मुखर्जी ने दिया। डिजांबे व तबला की जुगलबंदी का तो मानो श्रोताओं को लंबा इंतजार था, जिन्होंने ऐसा समय बांधा कि श्रोताओं को पता ही नहंीं चला।
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इसके पश्चात सितार पर उस्ताद मसखूर अली ने वोकल पर अपनी कला को बिखेरा, जिसमें उनका साथ तबला पर निसार अहमद, हरमोनियम पर पारोमित्ता मुखर्जी ने साथ दिया। सितार पर निलाधारी कुमार व तबला पर विजय घाटे ने खूब तालियां बटोरीं।
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समय था बाबा हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन का, जिसमें भारत के नामी गिरामी कलाकार अपनी प्रतिभा के जरिए श्रोताओं को संगीत की दुनिया में डुबकी लगवाने के लिए आए हुए थे। बाबा हरिवल्लभ संगीत महासभा की महासचिव पूर्णिमा बेरी व दीपक बाली ने आए हुए कलाकारों का अभिनंदन किया।
शनिवार को सम्मेलन की शुरुआत सरस्वती वंदना से हुई। इसमें एपीजे कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स की छात्राओं ने अपनी सुरीली आवाज से वंदना का उच्चारण किया। पिछले साल की विजेता अवतार कौर ने वोकल पर अपनी प्रतिभा को उजागर किया तो श्रोता मुग्ध हो गए।
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वोकल पर डॉ. विजय राजपूर ने अपनी कला की प्रस्तुति दी, जिसमें उनका साथ तबला पर सुधीर पांडे व हरमोनियम पर पारोमित्ता मुखर्जी ने दिया। डिजांबे व तबला की जुगलबंदी का तो मानो श्रोताओं को लंबा इंतजार था, जिन्होंने ऐसा समय बांधा कि श्रोताओं को पता ही नहंीं चला।
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इसके पश्चात सितार पर उस्ताद मसखूर अली ने वोकल पर अपनी कला को बिखेरा, जिसमें उनका साथ तबला पर निसार अहमद, हरमोनियम पर पारोमित्ता मुखर्जी ने साथ दिया। सितार पर निलाधारी कुमार व तबला पर विजय घाटे ने खूब तालियां बटोरीं।