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सरकार के खिलाफ संघर्ष तेज करेंगे रमसा अध्यापक
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदकोट
Updated Sun, 10 Apr 2016 06:23 PM IST
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एसएसए/रमसा अध्यापक यूनियन पंजाब की तरफ से शनिवार को फरीदकोट में प्रदेश स्तरीय कन्वेंशन का आयोजन किया गया। इस दौरान पिछले 8 सालों से पंजाब भर के सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब 14 हजार एसएसए/रमसा अध्यापकों की सेवाएं स्थायी करने की मांग की गई और साथ ही इसके लिए राज्य सरकार के खिलाफ संघर्ष तेज करने का एलान किया गया।
इस मौके पर यूनियन के प्रांतीय प्रधान दीदार सिंह मुदकी व प्रांतीय महासचिव हरजीत सिंह जीदा ने कहा कि शिक्षा अधिकार कानून व मानव संसाधन मंत्रालय की तरफ से प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड व कार्यकारिणी कमेटी के साथ हुई मीटिगें साबित करती हैं कि वह शिक्षा विभाग का हिस्सा है और ऐसे हालात में सरकार एसएसए व रमसा अध्यापकों का अलग कैडर नहीं तैयार कर सकती।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने 2012 में रमसा अध्यापकों की सेवाएं स्थायी करने का वादा किया था और इसके लिए 3 जून 2015 को शिक्षा मंत्री ने हाई पावर कमेटी का भी गठन किया था। हालांकि सरकार अपने इस वादे से साफ मुकर गई लेकिन हाल ही में 2 फरवरी 2016 को मुख्य सचिव व डीजीएसई ने यूनियन के साथ मीटिंग करते हाई पावर कमेटी से मार्च तक रिपोर्ट लेकर सेवाएं स्थायी करने का भरोसा दिया था लेकिन उनका वादा भी अधर में लटक कर रहा गया।
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इस मौके पर एसएसए/रमसा के तहत कार्यरत अध्यापकों समेत अन्य शिक्षा कर्मियों की सेवाएं स्थायी करने, 12 माह से रुका वेतन जारी करने, वेतन से कटौती वापस लेकर बकाया जारी करने, महिला अध्यापकों को छह माह की प्रसुता छूट्टी देने व संघर्ष के दौरान यूनियन नेताओं पर दर्ज केस वापस लेने की मांग की गई।
कन्वेंशन में प्रांतीय उपाध्यक्ष राजवीर समराला, गुरप्रीत सिंह रूपरा, जजपाल बाजेके, सपरजन जोन, दलजीत कौर, सुखजिंदर सिंह मोगा, जगसीर सिंह, अमनदीप कौर फिरोजपुर समेत डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट के नेता संतेष भूंदड़, 3442 अध्यापक यूनियन के आकाश अरोड़ा, 7654 अध्यापक यूनियन के रमन चावला ने भी विचार रखे।
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इस मौके पर यूनियन के प्रांतीय प्रधान दीदार सिंह मुदकी व प्रांतीय महासचिव हरजीत सिंह जीदा ने कहा कि शिक्षा अधिकार कानून व मानव संसाधन मंत्रालय की तरफ से प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड व कार्यकारिणी कमेटी के साथ हुई मीटिगें साबित करती हैं कि वह शिक्षा विभाग का हिस्सा है और ऐसे हालात में सरकार एसएसए व रमसा अध्यापकों का अलग कैडर नहीं तैयार कर सकती।
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उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने 2012 में रमसा अध्यापकों की सेवाएं स्थायी करने का वादा किया था और इसके लिए 3 जून 2015 को शिक्षा मंत्री ने हाई पावर कमेटी का भी गठन किया था। हालांकि सरकार अपने इस वादे से साफ मुकर गई लेकिन हाल ही में 2 फरवरी 2016 को मुख्य सचिव व डीजीएसई ने यूनियन के साथ मीटिंग करते हाई पावर कमेटी से मार्च तक रिपोर्ट लेकर सेवाएं स्थायी करने का भरोसा दिया था लेकिन उनका वादा भी अधर में लटक कर रहा गया।
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इस मौके पर एसएसए/रमसा के तहत कार्यरत अध्यापकों समेत अन्य शिक्षा कर्मियों की सेवाएं स्थायी करने, 12 माह से रुका वेतन जारी करने, वेतन से कटौती वापस लेकर बकाया जारी करने, महिला अध्यापकों को छह माह की प्रसुता छूट्टी देने व संघर्ष के दौरान यूनियन नेताओं पर दर्ज केस वापस लेने की मांग की गई।
कन्वेंशन में प्रांतीय उपाध्यक्ष राजवीर समराला, गुरप्रीत सिंह रूपरा, जजपाल बाजेके, सपरजन जोन, दलजीत कौर, सुखजिंदर सिंह मोगा, जगसीर सिंह, अमनदीप कौर फिरोजपुर समेत डेमोक्रेटिक टीचर फ्रंट के नेता संतेष भूंदड़, 3442 अध्यापक यूनियन के आकाश अरोड़ा, 7654 अध्यापक यूनियन के रमन चावला ने भी विचार रखे।