मदर्स डे : प्रकाश कौर के आंगन में चहकती हैं समाज से ठुकराई बेटियां, कर रही हैं 84 बच्चियों का लालन-पालन
पद्मश्री हासिल कर चुकीं प्रकाश कौर नकोदर रोड पर यूनीक होम चलाती हैं। जालंधर में यूनीक होम चला रहीं प्रकाश कौर 84 बच्चियों का लालन-पालन करती हैं।
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पंजाब के जालंधर में 65 साल की उम्र का पड़ाव पर पहुंच चुकी प्रकाश कौर आज भी 84 बच्चियों की मां हैं, जिनका वह पालन पोषण कर रही हैं। आज भी मदर्स डे पर हाथ जोड़कर कहती हैं कि... प्लीज कोई भी मां अपने पेट में बच्ची को न मारे, क्योंकि उनके पेट में पलने वाली बच्ची की मां अभी जिंदा है। मैं मां हूं, उन बच्चियों की जिनको उनके माता पिता बाहर पंगूड़े में छोड़ जाते हैं। कोई भी मां अपनी बच्ची को पेट में न मारे, मैं यकीन दिलाती हूं कि मैं उसका पालन पोषण करूंगी। मेरे मोबाइल पर सिंगल मिस कॉल कर दो, बच्ची को मैं घर से ले जाऊंगी।
पद्मश्री का खिताब हासिल कर चुकी प्रकाश कौर नकोदर रोड पर यूनिक होम चलाती हैं। फाइव स्टार होटल की तरह से चल रहे यूनिक होम के बाहर लगे पालने में जब भी कोई मां अपनी कोख से जन्मी बच्ची को डालकर जाती है तो होम के भीतर खुशियां दौड़ जाती हैं कि उनके यहां एक बेटी का जन्म हुआ है। प्रकाश कौर सभी बच्चियों का जन्मदिन 24 अप्रैल को मनाती हैं।
हरेक बच्ची के जन्मदिन की तारीख 24 अप्रैल बन जाती है और उसके सर्टिफिकेट पर मां प्रकाश कौर का नाम दर्ज हो जाता है। प्रकाश कौर के घुटनों में दिक्कत है लेकिन फिर भी वह हिम्मत की मिसाल बनकर 84 बच्चियों का पालन कर रही हैं। सुबह चार बजे बच्चियों को उठाना, उनको गुरबाणी का पाठ कराना, तैयार कराना, स्कूल कॉलेज भेजना, नाश्ते का बंदोबस्त करना, उनके बैग तैयार कराना सब कुछ दिनचर्या का हिस्सा है।
वे कहती हैं कि बेटियों की पढ़ाई से लेकर शादी तक की जिम्मेदारी उनकी होती है। शादी भी होटल में की जाती है। चाव से बताती हैं कि मैने एक लड़की को पाला था जिसकी शादी फिजिक्स की पीएचडी कर रहे एक युवक से होने जा रही है।
बड़ी संस्कारी हैं मेरी बच्चियां, आज बड़े बड़े घरानों की बहू हैं। आज भी बच्चियां मसूरी से लेकर यूके व कनाडा में पढ़ रही हैं और वाहेगुरुउनकी मदद कर रहा है। दिल में दर्द तब होता है जब सुनती हूं किसी मां ने अपने पेट में कन्या की हत्या कर दी और भ्रूण को फेंक दिया।
मेरा पालना बाहर लगा है, मेरा नंबर 98721-20664 है। एक मिस कॉल दे दो, मैं बच्ची को खुद ले जाऊंगी। काफी दिल दुखा जब बाहर पालने में मृत कन्या को डालकर कोई चला गया। किसी कलयुगी ने बच्ची को जन्म देकर कुएं में फेंक दिया। उसे यूनिक होम की टीम ने जाकर निकाला और आज हमारे आंगन में खेल रही है।
पुरातन समय में माता भाग कौर से सीख लेनी चाहिए। वह फौज की मुखी थीं। घुड़सवारी करती थीं और दमदार महिला थीं लेकिन उनके नैतिक मूल्य व संस्कार महान थे। झांसी की रानी हुई हैं, कितनी हिम्मत वाली थीं और उस जमाने से थीं जब महिलाओं को नंगे हाथ रखने नहीं दिया जाता था। लेकिन अब वक्त काफी बदला हुआ है, इसका कारण है कि अनुशासन डांवाडोल हो चुका है, अपनी मर्यादा व संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। हमें इतिहास व पुरातन ग्रंथों से सीख लेनी चाहिए।
खुद शादी नहीं की...अनाथ थी सो दर्द का एहसास था...
प्रकाश कौर को अनाथ होने के दर्द का एहसास था लिहाजा इस दर्द को उन्होंने उन बच्चियों को महसूस नहीं होने दिया जिनके मां बाप लड़की को बोझ समझकर ठुकरा देते हैं। उन्हें एहसास था कि बिना मां के बच्चों का रहना कितना मुश्किल है। प्रकाश कौर ने तय कर लिया था कि वह शादी नहीं करेंगी। ऐसे बच्चों के पास रहेंगी जिन्हें समाज ने ठुकरा दिया है। उनके संगी- साथियों ने भी इसके लिए उनका हौसला बढ़ाया। आज भी प्रकाश कौर का यूनिक होम में निजी कमरा नहीं है, जहां दिल करता है वह जमीन पर अपना बिस्तर बिछाकर बच्चियों के बीच सो जाती हैं। उनके साथ ही खाना खाती हैं, उनके बाल संवारना, कपड़े सहेजना उसकी दिनचर्या का हिस्सा है।
खुशियां मनाई जाती हैं जब नई बच्ची आती है
प्रकाश कौर के यूनिक होम में बच्चा छोड़ने के लिए भी एक खास जगह बनी है। इसका नाम बेबी क्रेडल है। इस जगह पर न तो कोई कैमरा लगा है, न कोई मौजूद रहता है। हां, यह जरूर है कि जब भी इस बेबी क्रेडल में कोई बच्ची रख जाता है, एक घंटी अपने आप बज जाती है। इससे प्रकाश कौर को पता चल जाता है कि कोई बच्ची छोड़ गया है। इसके साथ ही अंदर सब चहकने लगते हैं। प्रकाश कौर बताती हैं कि जो बच्चे यहां आते हैं, वे इतने बीमार होते हैं कि उन्हें 6-6 महीनों तक अस्पताल में रखना पड़ता है।