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निगम शहरवासियों से नहीं वसूल पा रहा 55 करोड़

Thu, 02 Jul 2015 10:04 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर Updated Thu, 02 Jul 2015 10:04 PM IST
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आर्थिक संकट से निकलने के लिए नगर निगम जालंधर खुद प्रयास नहीं कर रहा है।
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अगर निगम चाहे तो खुद पर मंडरा रही तंगी के बादल दूर कर दें। निगम अभी तक शहरवासियों के प्रॉपर्टी टैक्स और एरियल के बनते करीब 55 करोड़ रुपये वसूल नहीं पाया है।

साल 2013-14 के 8 करोड़ और साल 2014-15 के 7 करोड़ के करीब बनता प्रॉपटी टैक्स अभी तक शहरवासियों ने नहीं भरा है। निगम अधिकारी शुरुआती तौर पर कामर्शियल इमारतों से प्रॉपर्टी टैक्स वसूलने में लगे हैं, लेकिन वे सभी से टैक्स लेने में कामयाब नहीं हो पाए हैं। वहीं अभी तक निगम साल 2013 से पहले बनते हाउस टैक्स का एरियल शहरवासियों सेे नहीं ले पाया है। कई सालों से एरियल की 24 करोड़ की राशि लटक रही है, जो जुर्माना डालकर 40 करोड़ रुपये के करीब बन गई है। यह राशि लेने में अभी तक निगम कामयाब नहीं हो पाया है। एरियल और प्रॉपर्टी टैक्स को मिलाकर निगम ने शहरवासियों से करीब 55 करोड़ लेने हैं।


निगम ने साल 2013-14 में 26 करोड़ प्रॉपर्टी टैक्स वसूल किया था। वहीं, टैक्स की रकम 35 करोड़ तक आने का अनुमान लगाया जा रहा था। निगम के सर्व मुताबिक शहर में 2.25 लाख प्रॉपर्टी शामिल थी। इनमें सेे केवल 1.25 लाख लोगों ने टैक्स जमा करवाया था। वहीं 1 लाख प्रॉपर्टी होल्डरों ने प्रॉपर्टी टैक्स दिया ही नहीं था। इसके बाद साल 2014-15 में निगम को 17 करोड़ ही प्रॉपर्टी टैक्स मिला था। इस साल से खाली प्लॉट और 5 मरले तक बने सिंगल स्टोरी मकान को प्रॉपर्टी टैक्स के दायरे से बाहर कर दिया गया था। फिर भी निगम ने 1.50 लाख पॉपर्टी से टैक्स वसूलना था, मगर सिर्फ 50 हजार लोगों ने प्रॉपर्टी टैक्स भरा था। निगम को प्रॉपर्टी टैक्स के 15 करोड़ और एरियर के 40 करोड़ लेने बाकी हैं।


नहीं बना सॉफ्टवेयर, फाइलों में दबे पड़े हैं कागज
प्रॉपर्टी टैक्स के काम का आसान करने के लिए सॉफ्टवेयर शुरू करने की बात कही गई थी, जो अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। इस सॉफ्टवेयर से पता चल जाना था कि किस प्रॉपर्टी होल्डर ने कौन से साल का टैक्स भरा है। इसकी जानकारी कंप्यूटर पर आ जानी थी, लेकिन अभी तक यह सॉफ्टवेयर शुरू नहीं हो पाया है। लोगों की ओर से जमा करवाने वाले प्रॉपर्टी टैक्स के कागज फाइलों में ही दबे पड़े हैं। इसे निकाल कर चैक करने में विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को काफी समय लग रहा है। इस सॉॅफ्टवेयर की जानकारी निगम कमिश्नर गुरप्रीत सिंह खैहरा ने दी थी।


प्रॉपर्टी टैक्स वसूल करने के लिए हो रही कार्रवाई : ऋषि
निगम के प्रॉपटी टैक्स विभाग के सुपरिंटेंडेंट राजीव ऋषि नेे कहा कि शहरवासियों से प्रॉपर्टी टैक्स वसूल करने के लिए कार्रवाई की जा रही है। शुरुआती तौर पर कामर्शियल इमारतों पर कार्रवाई की जा रही है। अगर कोई प्रॉपर्टी टैक्स जमा नहीं करवाता है तो उसकी बिल्डिंग सील कर दी जाती है। उन्होंने कहा कि साल 2014-15 का प्रॉपर्टी टैक्स जुलाई माह में जमा करवाने के लिए प्रॉपर्टी होल्डर को 20 फीसदी पेनल्टी और 6 फीसदी ब्याज देना होगा।
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